#VasantPanchamiWithGSSY
🧘♀️Guru Siyag’s Meditation (GSM) is a simple, mantra-based meditation system taught by Shri Ramlalji Siyag (Guru Siyag), aimed at enabling practitioners to experience inner transformation through spontaneous yogic movements (kriyas) and kundalini awakening.🧘♀️
🍀🧘♀️It is known for being accessible to people of all backgrounds and for not requiring any complicated postures, rituals, or lifestyle changes.
@SumanSi02188892 Meditating twice a day brings peace to the mind and balance to life — by the grace of Gurudev, everything falls into place. 🧘♀️
The divine mantra given by Gurudev can be chanted at all times, without moving the tongue or lips 🍀
Continuous practice is the true path.
#INDvsNZ
🧘♀️If you meditate twice a Day everything will be fine by the Grace of Gurudev.🧘♀️
🍀You can chant the Divine Mantra Round the clock given by the Gurudev
without moving your tongue and lips 🍀
*गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः*
*गुरुर्देवो महेश्वरः*
*गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म*
*तस्मै श्री गुरवे नमः*
ऐ जीवन बहुत छोटा है।इस जीवन मे हम सिर्फ परमात्मा की प्राप्ति,ओर परमार्थ की सेवा के लिये आऐ है।भोतिक कार्यो से समय निकाल कर परमात्मा को जाने,स्वयम के अन्दर झांक कर देखे,परमात्मा की अनुभुति महसूस करे।
ऐ जीवन परमात्मा से परमात्मा तक है।
क्या स्मरण करना और ना करना भी पहले से लिखा है?
अगर ऐसा है तो मोक्ष कैसे मिले?
➡️पहली बात सिर्फ सुमिरन करने से मोक्ष नही मिलता, प्रेममय होके सतगुरु के अधीन होके मोक्ष की चाह और पुरुषार्थ करने से सतगुरु द्वारा नाम निअक्षर मिलने से, अंतरिक यात्रा करने से, कर्म जीरो होते है और मोक्ष मिलता है, आपने पूछा क्या सिमरन भी पहले से लिखा है, बायोलॉजिकल शरीर से जो भी करते हो वो सब लिखा हुआ होता है, पर ध्यान सिर्फ शरीर से नही बल्कि शरीर से शुरू होके अंतर मन से होते हुए आत्मा तक जाता है, हा, शरीर द्वारा सिमरन में बैठने के संजोग मिलते या नही मिलते, ये पिछले जन्मों के अध्यात्म पुण्यों के कारण बनते है, अगर हम किसी जन्म में सतगुरु के प्रीति प्रेम भक्ति है, मोक्ष की तीव्र चाहना है और अंदर में विरह तड़प है और दूसरो को भी हेल्प करने का भाव है तो नेक्स्ट जन्म में भजन सुमिरन ध्यान सच्चे सत्संग के संजोग मिलते है, ध्यान में बैठने के संजोग मिलते है पर फिर अगर हमें इस जीवन में अध्यात्म में रुचि नहीं है या मायावी रस है या सतगुरु से दूर है तो बाहर से ध्यान में बैठने के संजोग मिलेंगे पर अंदर गहरे नही जा सकेंगे और अगर अंदर में रुचि , तड़प प्रेम बहुत है पर बाहर घर का माहोल ऐसा नही है की ध्यान में बैठ पाए, पति या पत्नी मना करते है, तब नेक्स्ट जन्म में गुरु का सांध्य मिलता है, ज्ञान मिलता है, इसलिए हम बार बार कहते है, आप अपनी आत्मा से, पूरी ईमानदारी से बैठने की कोशिश करो, बाकी सब गुरु पर छोड़ दो, क्युकी अगर बैठने के संजोग नही भी मिल रहे पर आप बैठना चाह रहे हो तब इसी जन्म में आगे या नेक्स्ट जन्म में जरूर संजोग बनेंगे और अगर आप की अध्यात्म में रुचि भी है, सतगुरु भी है, नाम भी मिला है और ध्यान में बैठने के संजोग और माहोल भी है तो आपके जितना भागशाली इस संसार में कोई नही है, ये आपके पिछले जन्मों की मेहनत की वजह से मिल रहा , ये सब तो हुआ कर्मो का खेल, एक और बात याद रखना, इसमें सबसे ऊपर है
सतगुरु की कृपा, सतगुरु का राजीपन, सतगुरु का निजमन, सतगुरु का अगर निजमन आ जाए तो सारे कर्मो के नियम वहा टूट जाते है, जैसे विज्ञान में हर सिदांत के कुछ एक्सेप्शन भी होते है ऐसे ही अध्यात्म विज्ञान में सतगुरु exception होते है, सतगुरु की कार्यप्राण्णली कैसे वर्क करती है ये विज्ञान बताने का अभी सही समय नही आया है, इसलिए आप गुरु आज्ञा अनुसार ध्यान करने की सहज कोशिश करे, ध्यान में गहरे उतर पाए तो बढ़िया है, बाहर से नही बैठ पाए तो भी अंतरिक मन से गुरु की आज्ञा मानो, कोशिश करो, वो कोशिश आपको मोक्ष का अधिकारी है
श्री अरबिंद ने घोषणा की कि इस दिन पृथ्वी पर एक दिव्य शक्ति का जन्म हुआ, जो कृष्ण ही थे, और यह शक्ति मानवता को अंधकार से निकालकर दिव्यता की ओर ले जाने का कार्य करेगी,
भारत फिर अपने सर्वोच्च स्थिति में स्वर्णकाल में पहुंचेगा, यहां भारत अर्थात सनातन की बात है
#गुरुसियाग_सिद्धयोग🧘
श्री अरबिंद ने घोषणा की कि इस दिन पृथ्वी पर एक दिव्य शक्ति का जन्म हुआ, जो कृष्ण ही थे, और यह शक्ति मानवता को अंधकार से निकालकर दिव्यता की ओर ले जाने का कार्य करेगी,
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