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OBC अगर SC के साथ भेदभाव करेगा तो क्या करेगा UGC? नए नियमों के इस पॉइंट पर भी बवाल!
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पूरी वीडियो देखें यूट्यूब पर अभिनव पाण्डेय के साथ।
#UGC जातिगत भेदभाव को एकजुटता से रोका जाना चाहिए। ये काम साफ नियत से करना चाहिए, सियासी उल्लू सीधा करने के लिए नहीं। और नियम जाति के महीन पिरामिड को समझते हुए बनाए जाने चाहिए।
1. सवर्ण छात्र अगर जातिगत भेदभाव करते हैं तो उनपर कार्रवाई हो,मगर उन्हें आपसी रंजिश में फँसाया जाए तो फँसाने वाले पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। क़ानून का दुरूपयोग नहीं होना चाहिए।
2. अगर कोई OBC वर्ग का छात्र SC/ST वर्ग से भेदभाव करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान क्यों नहीं है? भेदभाव के मामले तो यहां भी होते हैं
3. नए नियमों में OBC वर्ग को भी पीड़ित पक्ष में रखा गया है, तो क्या Gen वर्ग को पहले से ही दोषी मान लिया गया है?
जातिगत भेदभाव देश के लिए नासूर है। ऐसे मामलों में दोषी के खिलाफ सख़्त सजा का प्रावधान होना चाहिए,मगर निर्दोष को बचने का अवसर भी मिलना चाहिए। 2012 में बने नियम में था कि अगर आरोप ग़लत निकले या फँसाने की मंशा निकली तो जुर्माना लगता था। नए नियम में क्यों नहीं है?
बाक़ी जाति का पिरामिड समझना है तो नियम बनाने वालों को गाँव में घूमकर समझना चाहिए। एसी कमरों में सिर्फ़ हवा ठंडी लगती है,जातिगत गर्माहट नहीं पता लगती।
अंत में- परसाई जी,सच लिख गए हैं। इस देश में हर जाति ने अपने से छोटी जाति खोज रखी है। ये लिखा समझना है तो @TheNewspinch की Documentary Musahar देख लीजिएगा
एससी/एसटी एक्ट क्या वाकई एससी/एसटी के फायदे के लिए है या दुश्मनी निकालने के लिए? 🤔
प्राइवेट कंपनी या दुकानदार एससी/एसटी को काम देने से बचते हैं, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि इनकी वजह से किसी भी व्यक्ति पर फ़र्ज़ी केस डालकर फैक्ट्री या दुकान मालिक को बेवजह घसीटा जाएगा।
क्या आज के समय में इस एक्ट की ज़रूरत है, जब चमार को भी अपनी जाति लिखने में गर्व महसूस होता है और वह “The Great Chamar” लिखता है?
2 मिनट की शानदार चर्चा सुनिए 🎤🔥