आपकी बात से सहमत है नेहा जी! देश में SC ST वर्ग को 70+ और OBC वर्ग को 30+ साल से ज्यादा का समय आरक्षण का लाभ लेते हुए हो गए हैं लेकिन उसके बाद भी इन वर्गों में से कोई जाति GEN वर्ग में शामिल होने लायक नहीं बन पाई। आखिर इसका क्या कारण हो सकता है? आज बात सिर्फ SC वर्ग की करेंगे...
देश में केन्द्र और राज्य सरकारों को कुल मिलाकर कितने कर्मचारी हैं इसका एक्जैक्ट डेटा तो नही मिला लेकिन सातवें वेतन आयोग के हिसाब से केंद्र सरकार के अधीन लगभग 50 लाख कुल कर्मचारी कार्यरत हैं जिसमे सैन्य सेवाओं में लगभग 14 लाख एम्पलाइज भी शामिल हैं। अगर केंद्र और सभी राज्य सरकारों के अधीन कार्यरत कर्मचारियों को जोड़ लें तो लगभग 2.15 करोड़ रहते हैं। अगर मोटा मोटा भी मान लिया जाए तो 2.5 करोड़ होंगे। इस हिसाब से लगभग 2% कुल सरकारी नौकरी होंगी देश में। आबादी के हिसाब से SC वर्ग को 15% आरक्षण मिलता है। अगर इसमें SC वर्ग के लिए रिजर्व नौकरी की संख्या देखें तो लगभग 40 लाख (कुल नौकरियों का 15%) होंगी।
भारत की जनसंख्या लगभग 140 करोड़ है। देश में SC वर्ग की आबादी लगभग 17% है। वर्तमान के लिहाज से देखा जाय तो देश में लगभग 24 करोड़ लोग या फिर लगभग 6 करोड़ परिवार होंगे। अगर प्रति परिवार एक सरकारी नौकरी भी ले तो भी SC वर्ग को लगभग 6 करोड़ नौकरी चाहिए होंगी लेकिन मिल कितनी रही है लगभग 40 लाख जो कि कुल SC वर्ग की आबादी का लगभग 2% है। तो बाकी बची लगभग 98% SC आबादी उसकी नौकरी का क्या?
पता है अब आपका सवाल ये रहेगा की कुल SC आबादी में बच्चे बूढ़े महिलाएं पुरुष सभी शामिल हैं तो उन सबकी काउंटिंग इसमें क्यों? एक्चुअली GEN वर्ग को ऐसा लगता है कि SC वर्ग के प्रत्येक व्यक्ति को रिजर्वेशन मिल रहा है और वो उससे सरकारी नौकरी में चला जायेगा। ये गलत धारणा है आपको इसमें सुधार करना चाहिए। SC वर्ग की लगभग 98% आबादी को नौक���ी में रिजर्वेशन नहीं मिलता है। इसके अलावा अगर पारिवारिक हिसाब से देखें तो लगभग 5.6 करोड़ परिवारों को नौकरी में रिजर्वेशन नहीं मिलता।
बिहार में हुई जाति जनगणना को उदाहरण के रूप में देखें तो.....
बिहार में हुई जातीय जनगणना की रिपोर्ट के अनुसार बिहार में SC वर्ग की कुल आबादी लगभग 2.56 करोड़ (19.65%) है जबकि राज्य में सरकारी नौकरी करने वाले SC वर्ग की आबादी 2.89 लाख यानी कि कुल SC वर्ग की आबादी का लगभग 1.13% है।
बिहार में लगभग 88% SC परिवारों की आय 20 हजार रूपए से कम है। 43% परिवारों की आय 6 हजार रुपए से कम है। केवल 6% परिवारों की आय 20 हजार से 50 हजार के बीच है। केवल 1.72% परिवारों की आय 50 हजार से ज्यादा है। देश के अन्य राज्यों में भी अगर इस तरह जाति जनगणना के माध्यम से आंकड़े जुटाएं जाए तो स्थिति और भी साफ हो जाएगी।
बिहार में SC वर्ग की लगभग 50% आबादी 10 वीं कक्षा तक या उससे कम पढ़ी है तो 10% आबादी 10 वीं से आगे ग्रेजुएशन तक पढ़ी है ( लगभग 6% इंटर और लगभग 3% डिग्री)। इस हिसाब से SC वर्ग में लगभग 40% आबादी अनपढ़ होगी।
बिहार में SC वर्ग लगभग 40% आबादी का पढ़ा लिखा न होना और लगभग 50% आबादी 10 वीं कक्षा तक या उससे कम पढ़ा होना क्या दर्शाता है? सिंपल सी बात है कि SC वर्ग की लगभग 90% आबादी को आगे सरकारी नौकरी और शिक्षा में आरक्षण तो नहीं ही मिलेगा।
अब आपसे मेरे कुछ सवाल हैं...
1. जिस वर्ग की लगभग 90% आबादी गरीब हो (जिनकी आय 20 हजार से कम है) वो लोग अपने बच्चो को कैसे अच्छी शिक्षा दे पाएंगे और कैसे वो लोग GEN वर्ग से कंपीट कर पाएंगे?
2. जिस वर्ग की लगभग 90% आबादी अनपढ़ या उससे थोड़ी साक्षर हो वो लोग अपना UPLIFTMENT कैसे कर पाएंगे और कैसे वो लोग GEN वर्ग से कंपीट कर पाएंगे?
3. क्या रिजर्वेशन देने मात्र से SC वर्ग के लोग समृद्ध हो पाएंगे?
मुझे लगता है कि आगे 100 साल और भी रिजर्वेशन देंगे तब भी उनका अपल��फ्टमेंट नहीं होगा। इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण है उनके लिए नियमित रोजगार को सुनिश्चित करना जिससे उनकी आर्थिक स्थिति ठीक हो सके। दूसरा उनके लिए बेहतर शिक्षा की व्यवस्था करना। जब SC वर्ग के सभी लोग आर्थिक रूप से समृद्ध हो जायेंगे और देश में सभी लोगों के लिए समान शिक्षा नीति (मतलब एक देश एक शिक्षा मान लीजिए) लागू हो जायेगी फिर SC वर्ग को इस आरक्षण की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।
"Reservation exists for 70+ yrs!
Still not a single community has become forward enough to move into general category!
Reservation has become a race to bottom, where everyone is fighting for the 'backward' tag!"
Very well said @talk2anuradha
Kudos for speaking the hard truth🙌
नीतू मैम ने भी अपने जातिवादी स्वभाव के चलते यह झूठा फैलाया और आरक्षण के खिलाफ जहर भरा।
लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि Cutoff सब के लिए ZERO हुआ था और उस कटऑफ पर एडमिशन लेने वाला स्वर्ण छात्र था।
ऐसे कम से कम 20 वकीलों की क्लिप परसो से देख रहा हूँ जिसमे बता रहे है कि बिहार में 1 साल के बच्चे पर एससी/एसर्टी एक्ट लग गया। आरक्षण, एसस���/एसटी अधिकारों के विरुद्ध चल रहे कार्यक्रमो की संयोजनकर्ता नेहा दास से लेकर सभी वायरल कर रहे है।।
खैर, अफवाह फैलाना व एससी/एसटी को बदनाम करना इनका काम है लेकिन एक भी एससी/एसटी बुद्धिजीवी ने भी इनसे नही पूछा कि;
"भारत का कानून "Doli Incapax" पर चलता है जिसमे भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 20 (पुराने कानून में भारतीय दंड संहिता यानी IPC की धारा 82) के अनुसार 7 वर्ष से कम उम्र के बच्चे पर कोई केस दर्ज नही किया जा सकता है। अगर किया है तो पुलिस की गलती है"
और यह "1 साल के बच्चे" पर केस दर्ज करना बता रहे है।
एससी/एसटी पर इसी प्रकार की फर्जी घटनाओं का हवाला देकर वार किया जा रहा है।
लेकिन उससे बड़ी बात है कि एससी/एसटी इन योजनाओं को विफल नही कर रहा है। जबकि यह लोग सफलतापूर्वक सरकार पर दवाब बनाने में कामयाब हो रहे है जिसका नुकसान एससी/एसटी से जुड़ी सैकड़ो योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ रहा है।।
एससी/एसटी अपने ही समाज के अकाउंटों को न तो लाइक करते, न शेयर, न प्रमोट करते है। जिसके कारण भी पलटवार नही हो पा रहा है।।
अजीब बात है।
@neha_laldas अफवाहें क्यो फैलाती हो।
@Shubhamshuklamp तो भाई साहब अभी अपना सरनेम चेंज करके वाल्मीकि कर लो जो काम आप इसी जन्म में शुभम वाल्मीकि बन कर सकते हो जाटव बन कर नहीं कर पाओगे जैसे अभी आप शुक्ला बन कर जाटवों का भला नहीं सोच सकते इसमें अगला जन्म लेने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी ताकि हाथरस जैसे केस दोबारा न हो उसके लिए आन्दोलन चलाओ।
@Airtel_Presence@airtelindia, I am facing severe internet issues in my village for the last 3 days. Despite having an unlimited 5G recharge, speed is barely equivalent to 2G. Neither the Airtel app nor 121 is helping. #Airtel#NetworkIssue#AirtelDown"
लड़कियों को गोरा होने के लिए क्रीम, घरेलू नुस्खे से गोरा होने की सलाह दी जाती है, क्योंकि समाज ने विवाह और सौंदर्य का मानक “गोरेपन” को ही मान लिया गया है। इससे लड़कियां गोरी हो भी जाती हैं लेकिन जब बच्चे काले होते हैं तो कहती हैं कि बाप पे गया है। काजोल देवगन को ही देख लो।
भारत में काले–गोरे के भेद का असर बचपन से शुरू हो जाता है। घर–परिवार में अक्सर मासूम बच्चों को “गोरा है तो सुंदर है, स��मार्ट है, क्यूट है” या “काला है तो कालू, कलुआ” जैसे शब्द सुनने पड़ते हैं।
@The___brahmans जो गलत है वो हम���शा गलत ही कहा जाएगा चाहे वो आर्यन मिश्रा हो या कोई इरफान हो या कोई दलित। गौरक्षकों के द्वारा हिंसा की शुरुआत गुजरात में दलितों की लांचिंग से हुई थी उस वक्त ही अगर इसका विरोध किया होता तो शायद आज आर्यन मिश्रा जैसे कई जिंदा होते। खैर देर आय दुरुस्त आए...
उम्र और मार्क्स में छूट की वजह से SC/ST/OBC के उम्मीदवार ज़्यादा नम्बर पाकर भी जनरल मेरिट लिस्ट में शामिल नहीं हो पा रहे है।ज़्यादा उम्र ��ें चयन होने वाले जल्दी रिटायर भी हो जाते हैं।यह छूट इन समुदायों के लिए अधिशाप बनती जा रही है।
https://t.co/SOSiehvIx9
जाति जनगणना अब होकर रहेगी। बिना जाति के कॉलम के अगली जनगणना नहीं होगी। सरकार इसको जितना टालेगी, उतना ही विवाद बढ़ेगा।
इस मुद्दे में SC/ST के लिए कुछ नहीं है। इस समुदाय को अगर तेज़ी से तरक़्क़ी करनी है तो Technology, Medicine, Business और शहर की तरफ़ और तेज़ी से बढ़ना होगा।