तर्क: हमारे साथ 5000 वर्षों से डिस्क्रिमिनेशन हुआ। अतः आरक्षण सकारात्मक डिस्क्रिमिनेशन है और उचित है।
उत्तर: हिन्दुओं का नरसंहार मुगलों के समय में हुआ, बलात्कार हुआ, गाँव जलाए गए। यह 4-500 वर्ष पहले की ही बात है। तो क्या वर्तमान मुसलमानों का, उपरिलिखित तर्क से, नरसंहार उचित हो जाएगा?
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इस पर तुरंत भीम वाले पगला जाएँगे कि ऐसे कैसे तुम आरक्षण के डिबेट में लॉजिकल बातें ले आते हो। आज तक ये 5,000 वर्ष का कोई भी प्राइमरी सोर्स ले कर आए नहीं। और उस समय किसने किया, क्या किया, मैं उसका लोड क्यों लेता फिरूँ?
जिन जातियों को आरक्षण से हटाने के लिए 1960 के ही दशक में सिफारिश हुई, वो आज तक टिकी हुई हैं लिस्ट में, सबसे अधिक आरक्षण खा रही है। जिन जातियों को मुगलों के समय में जमींदारी दी गई, वो आज ओबीसी लिस्ट में हैं।
यदि सरकार को लगता है कि ये सारे डॉक्यूमेंट प्रधानमंत्रियों के तकिए की खोली में रखे होते हैं, तो वो भूल जाएँ। ये सब सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आँकड़े और तथ्य हैं।
‘व्हाइट पेपर’ तो लाना ही होगा। नहीं लाओगे तो हम निकलवा लेंगे या ऐसे आँकड़े रख देंगे जो तुम्हें और भी असहज करेगा।
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एक बात संघ के लिए भी है: मूर्ख बनाना बंद करो ये सब लीक करवा कर कि ‘UGC पर तो हमें न उगलते बन रहा, न निगलते’। यह ऐसा स्तरहीन तर्क है कि सामने मिले ऐसा आदमी तो पूछूँ कि तुम्हारी बुद्धि घास चरने चली गई?
इसमें ‘उगलना-निगलना’ क्या है? सीधा वक्तव्य यह दो: “आज के संदर्भ में, जब विश्वविद्यालयों की दीवारों पर सवर्णों के नरसंहार की बातें लिखी जाती हैं, हर सप्ताह कब्र खुदने के नारे लगते हैं, तो यह मानना अनुचित है कि उनको लेकर जातिगत घृणा नहीं है। अतः उन्हें भी इस लिस्ट का हिस्सा होना चाहिए।”
तत्पश्चात्, इसमें एक और बिन्दु जोड़ा जाए: यदि कोई भी शिकायत झूठी निकली, उस पर दोगुना जुर्माना और जेल का दंड होगा।
ऐसा कोई रॉकेट साइंस नहीं है।
तर्क: हमारे साथ 5000 वर्षों से डिस्क्रिमिनेशन हुआ। अतः आरक्षण सकारात्मक डिस्क्रिमिनेशन है और उचित है।
उत्तर: हिन्दुओं का नरसंहार मुगलों के समय में हुआ, बलात्कार हुआ, गाँव जलाए गए। यह 4-500 वर्ष पहले की ही बात है। तो क्या वर्तमान मुसलमानों का, उपरिलिखित तर्क से, नरसंहार उचित हो जाएगा?
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इस पर तुरंत भीम वाले पगला जाएँगे कि ऐसे कैसे तुम आरक्षण के डिबेट में लॉजिकल बातें ले आते हो। आज तक ये 5,000 वर्ष का कोई भी प्राइमरी सोर्स ले कर आए नहीं। और उस समय किसने किया, क्या किया, मैं उसका लोड क्यों लेता फिरूँ?
जिन जातियों को आरक्षण से हटाने के लिए 1960 के ही दशक में सिफारिश हुई, वो आज तक टिकी हुई हैं लिस्ट में, सबसे अधिक आरक्षण खा रही है। जिन जातियों को मुगलों के समय में जमींदारी दी गई, वो आज ओबीसी लिस्ट में हैं।
यदि सरकार को लगता है कि ये सारे डॉक्यूमेंट प्रधानमंत्रियों के तकिए की खोली में रखे होते हैं, तो वो भूल जाएँ। ये सब सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आँकड़े और तथ्य हैं।
‘व्हाइट पेपर’ तो लाना ही होगा। नहीं लाओगे तो हम निकलवा लेंगे या ऐसे आँकड़े रख देंगे जो तुम्हें और भी असहज करेगा।
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एक बात संघ के लिए भी है: मूर्ख बनाना बंद करो ये सब लीक करवा कर कि ‘UGC पर तो हमें न उगलते बन रहा, न निगलते’। यह ऐसा स्तरहीन तर्क है कि सामने मिले ऐसा आदमी तो पूछूँ कि तुम्हारी बुद्धि घास चरने चली गई?
इसमें ‘उगलना-निगलना’ क्या है? सीधा वक्तव्य यह दो: “आज के संदर्भ में, जब विश्वविद्यालयों की दीवारों पर सवर्णों के नरसंहार की बातें लिखी जाती हैं, हर सप्ताह कब्र खुदने के नारे लगते हैं, तो यह मानना अनुचित है कि उनको लेकर जातिगत घृणा नहीं है। अतः उन्हें भी इस लिस्ट का हिस्सा होना चाहिए।”
तत्पश्चात्, इसमें एक और बिन्दु जोड़ा जाए: यदि कोई भी शिकायत झूठी निकली, उस पर दोगुना जुर्माना और जेल का दंड होगा।
ऐसा कोई रॉकेट साइंस नहीं है।
आजाद समाज पार्टी के नेता जिसे बोलने तक का ढंग नहीं पता समाज का ठेका लिए घूम रहा और इक इंटलेक्चुअल अजीत भारती जैसे व्यक्ति के ऊपर फर्जी FIR करवाई जा रही, थू है ऐसे सिस्टम ओर कानून पर अगर गाड़ में दम नहीं बहस कर पाने का तो क्यों कूद के पहुंच जाते हो बहस करने। #stopmisuseofSCSTact
ये भीम आर्मी का गुंडा पुलिस के सामने कह रहा है कि मेरी शादी ब्राह्मण ठाकुर गुर्जर लड़कियों सेकरवाओ
आखिर पुलिस ने उसे उसी समय गिरफ्तार क्यों नहीं किया
क्या हम बेटियां इन बलात्कारी सोच के @BhimArmyChief
और उसके आर्टिफिशियल दलित गुंडों के आरक्षण का साधन है
बताओ
@delhipolice
अजीत भारती ने जवाब दिया तो उन पर मुकदमा क्यों?
@amitshah
जबाव दो
जो लोग स्वर्णों की बेटियाँ मांगते थे, जब अजीत भारती ने उसकी बहन बेटी मांग लिया तो चले गए sc/st act में केस करने
अबे चादरमोद तुम्हारी बेटी, बेटी है और स्वर्णो की बेटी, बेटी नहीं है?
हम अजीत भारती का पूरा समर्थन करते हैं 🔥 🔥 🔥
@ajeetbharti
IAS संतोष वर्मा के इस आपत्तिजनक बयान का समर्थन सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने खुलकर किया था।
अगर अजीत भारती के कमेंट पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है तो फ़िर इस बयान पर कार्रवाई कब होगी?
दिल्ली में सांसद चंद्रशेखर रावण की आज़ाद समाज पार्टी ने पत्रकार अजीत भारती के खिलाफ़ SC/ST एक्ट और IT एक्ट 2000 के तहत मुकदमा दर्ज कराया है।
अजीत भारती पर ये कार्रवाई सरासर गलत है यह पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है जब इनके पास कोई तर्क नहीं बचता तो यह SC/ST एक्ट का सहारा लेते है।
घास फूस की छत नहीं दिखती
मिट्टी की दीवारें नहीं दिखती
बारिश के मौसम में छत से टपकता पानी नहीं दिखता
दिखता है तो सिर्फ इनके नाम के अंत में लिखा हुआ शब्द - ब्राह्मण ।
अगर वास्तव में कोई इस दुनिया में secular है तो वो गरीबी है जो ना तो कोई धर्म देखती है ओर ना ही कोई जाती देखती है।
अगर आपके नाम के आगे ब्राह्मण,राजपूत या बनिया लिखा है तो आप संविधान की नजरों में जन्म से ही अमीर है,
में तो सरकारों से कहता हु आपको गरीबी मिटाने के लिए परिश्रम करने की जरूरत ही नहीं है देश में जितने भी गरीब है या जिन्हें आप पीड़ित ओर शोषित समझते हो उनके नाम के अन्त में ब्राह्मण, बनिया ओर राजपूत लिख दो वो अपने आप ही अमीर ओर बहादुर हो जाएंगे।
पूरा विपक्ष हमारे खिलाफ़ है, पूरा पक्ष ख़िलाफ़ है।
न कोई नेता, न मंत्री, न कोई कवि न कोई साहित्यकार, न मीडिया और न कोई बड़ा सेलिब्रिटी! किसी का कोई सपोर्ट नहीं!
याद रखना इन सबको!
मेरे ऊपर SC/ST एक्ट में FIR पर कुछ बातें सवर्ण समाज से
कोई मेरी माँ या बहन पर सीधे बलात्कारी मानसिकता के साथ यह कहे कि उसका विवाह मैं चंद्रशेखर के साथ करा दूँ, और मैं चुप रह जाऊँ तो आप बताइए कि मैं कैसा पुत्र या भाई हूँ?
इतने पर भी चंद्रशेखर को ले कर मैंने कोई जातिसूचक शब्द नहीं बोला, जो उक्त वीडियो में है। जब स्टेज से ब्राह्मणों की बेटियों को खींचने की बातें होती हैं और किसी SC नेता का चेला सोच-समझ कर उकसाने के लिए ऐसी बात करेगा, तो मैं चुप कैसे रहूँगा?
आज व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों को समझे या न समझे, वह यह अवश्य जानता है कि SC/ST एक्ट क्या है। तो मैं जब बोलता हूँ तो मुझे अपनी सीमाएँ (चाहे वह कितनी ही अनुचित क्यों न हों) पता हैं कि क्या बोलना है, क्या नहीं।
मैं जानता हूँ कि दिल्ली पुलिस के नॉर्थ अवेन्यू स्टेशन में आजाद समाज पार्टी वालों ने कितना दवाब दे कर रात के बारह बजे यह FIR लिखवाया है जो कोर्ट में दो मिनट नहीं टिकेगा। एक भी धारा ऐसी नहीं है जो होल्ड करेगी।
मैं सैनिक स्कूल का छात्र हूँ और इतनी रैगिंग झेल चुका हूँ कि मेरा मनोबल तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस को कस्टडी में मेरी हत्या करनी पड़ेगी, दो-चार डंडों से मेरा मनोबल नहीं टूटने वाला। और यदि मैं जीवित बच गया तो इसी स्थिति में जंतर मंतर जाऊँगा और अपने समाज से कहूँगा कि बताओ, तुम्हारी बहन और माँ को ले कर कोई ऐसी टिप्पणी करे तो क्या करोगे?
यदि ऐसा कमेंट फिर मेरे वीडियो पर आया तो मैं पुनः उसी तरीके से उत्तर दूँगा जो मैंने दिया। कानून जब तक है, संशोधन नहीं होता, मैं उसका सम्मान करूँगा और दिल्ली पुलिस के साथ पूर्ण सहयोग करूँगा। 92% ऐसे केस केवल प्रताड़ित करने के लिए होते हैं।
अंत में, सवर्ण समाज से यह पूछना चाहता हूँ कि क्या इस तरह की टिप्पणी पर मुझे सह लेनी चाहिए थी क्योंकि किसी पार्टी के लोग नाराज हो जाएँगे? क्या ब्राह्मणों की माँ और बहनें इन रेप मैंटिलिटी से संचालित गुंडों के शाब्दिक बलात्कार के लिए जन्म लेती हैं?
आज अजीत भाई को हम सब के समर्थन की जरूरत है।
क्या देश में मौलिक अधिकार “जाति विशेष” तक सीमित है।
ब्राह्मण लड़कियों के बारे में अभद्र टिप्पणियों पर कभी FIR क्यों नहीं होती ?
ब्राह्मणवाद से आज़ादी मांगने वाले पर भी FIR नहीं होती।
लेकिन अगर कोई पलट कर जवाब दे दे,
तो पूरे समाज की भावना आहत हो जाती है, आख़िर क्यो ? 🤷🏻♂️
पुलिस से 24 घंटे ड्यूटी की उम्मीद करना आसान है, लेकिन क्या उसके परिवार, आराम और मानसिक दबाव की भी कभी चिंता होगी? पुलिसकर्मी भी इंसान हैं, मशीन नहीं। बेहतर पुलिसिंग के लिए बेहतर कार्य-व्यवस्था जरूरी है?क्या आप सहमत हैं? बदलाव होना चाहिए @CMOfficeUP@myogiadityanath#PoliceReform
सवर्णों के सम्मान में शौर्य सेना मैदान🇮🇳✊✊
भारत विरोधी कानून वापस लो
अन्यथा संवैधानिक सभी
संग्राम के लिए तैयार 🇮🇳🚩🚩
दिल्ली के जंतर मंतर पहुंच
बचाएं अपने बच्चों का भविष्य
अगर आ नहीं सकते तो कम से कम इस संदेश को
समाज को वहां पहुंचाएं जो प्रभावित🙏
#UGC_काला_कानून_वापस_लो