@NeelamWrites मैं थक जाता हूँ कर-कर के मरम्मत अपनी,
हर रोज़ निकल आती है नई दरार मुझमें।
आईना भी अब मेरी सूरत से ख़ामोश है,
जाने क्या-क्या बिखर चुका है इस बार मुझमें।
— शुबहम यादव (Shubham Yadav)
@NeelamWrites
उड़ता देखा था परिंदों को फ़लक की ओर,
आज सवाल भी उड़ चले हैं शहर-शहर की ओर।
मेहनत अब भी ज़मीन पर चल रही है,
और किस्मत… शायद किसी एयरपोर्ट की ओर।
#NEET#NTA#NEETUG
आज फिर किताबों के बीच कुछ वक़्त चुरा लिया।
एक किताब खोली तो लगा जैसे किसी ने अपनी उम्र भर की ख़ामोशी मेरे हाथों में रख दी हो।
हर पन्ना पलटते-पलटते एहसास हुआ…
कुछ सफ़र पैरों से नहीं, अल्फ़ाज़ से तय होते हैं|
@ShikhaS44365499@Hindinama2@Kitabganj1#teentaal#poetry#Alfaaz
मैं थक जाता हूँ कर-कर के मरम्मत अपनी,
हर रोज़ निकल आती है नई दरार मुझमें।
आईना भी अब मेरी सूरत से ख़ामोश है,
जाने क्या-क्या बिखर चुका है इस बार मुझमें।
— शुभम यादव ✍️
#kitabganj1#hindinama1#ppnaravit#teentaal
प्रतिबिंबों की इस दुनिया में,
भ्रम से परे......
चलो, चलते हैं उस धारा के पार,
जहाँ जीवन संभव हो!
भावनाएँ उन्मुक्त हों--शीतल हवा के जैसे,
जहाँ न कुछ सोचना हो,न समझना हो,
बस, एक बहाव में बहना हो।
जहाँ भाव हों, संवेदनाएँ हों,
करुणा हो, कोमलता हो;
जहाँ प्रेम मुस्कानों में बहता हो।
मैंने सुना है, बर्फीली पहाड़ियों के पार,
एक ऐसी जगह है...
जहाँ शांति है, स्थिरता है।
वहाँ कौन है डूबा हुआ,
भाव में, भंगिमाओं में?
या, वो मुझमें है कहीं?
✍️शिखा सिंह।