Form6 can’t be filled by a deleted voter. It’s only for NEW voters. All those who have been forced to fill it have committed criminal offence carrying 1 yr prison. EC officials who forced them are abetters to crime. This press note shows ECI’s abetment!
Nitesh Siwach into the Greco 97kg final. First Greco finalist for India at Asian Games since 1962
Good chance to win gold as well and end the 64-year wait
#WATCH | Jind, Haryana: Neeru Dhanda wins Gold medal in women's trap shooting event in Asian Games 2026.
Neeru Dhanda's mother, Sudesh Devi, says, "We are overjoyed. She started training three or four months ago... When I got to know about this, I was on my way to collect my Below Poverty Line (BPL) wheat ration... We are poor; we have zero balance. We keep buffaloes, etc. I have two daughters and one son. Regarding the government—if they see a future for the child, they will provide support on their own; there is no need for us to ask. We have received plenty of help from the government..."
एशियन गेम्स 2026 में हरियाणा के जींद की बेटी नीरू ढांडा ने ट्रैप शूटिंग में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीतकर देश और हरियाणा का नाम रोशन किया है।
बधाई व शुभकामनाएँ।
देश को आज़ाद हुए 79 साल हो गए। राज्यों में और देश में जाने कितनी सरकारें आई। एक उदाहरण नहीं मिलेगा शहीद भगत सिंह जी का जन्मदिवस इस तरह शान से मनाने का, कि आने वाली पीढ़ियाँ भी उनके जीवन से सीखती रहें।
यही AAP को दूसरी पार्टियों और सरकारों से अलग बनाता है। शानदार @BhagwantMann
पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने राजनीति में जाने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि वह जनता की आवाज़ बनेंगी। हाल ही में दिव्या मित्तल ने VRS लिया था। वह मिर्जापुर, देवरिया समेत कई जिलों में DM रह चुकी हैं। दिव्या मित्तल ने कहा, “चलिए हिसाब मांगते हैं।” उन्होंने कहा कि वह राजनीति किसी दल के साथ नहीं, बल्कि जनता के साथ करेंगी। दिव्या ने कहा, “हिसाब चाहिए, न्याय चाहिए, डरना नहीं है।” उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति की शुरुआत उत्तर प्रदेश से होगी।
#DivyaMittal #FormerIASofficer #Enterspolitics #UP
सुमित्रा 24 वर्ष की थीं, जब उन्होंने पहली बार अपने गाँव गुडा, हरियाणा में स्थित सरकारी स्वामित्व वाली इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) के एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में चपरासी या खलासी (सहायक) के पद के लिए आवेदन किया था। वेतन महज 34 रुपये प्रतिदिन था, लेकिन यह एक ऐसी नौकरी थी जिसमें पेंशन संबंधी लाभ मिलते थे, और सुमित्रा को पूरा विश्वास था कि उन्हें यह नौकरी मिल जाएगी—आखिरकार, वे साक्षात्कार तक पहुँच गई थीं।
लेकिन जब अंतिम नियुक्ति पत्र आए, तो उनके गाँव से आवेदन करने वाले 49 लोगों में से 43 का चयन हो गया, लेकिन सुमित्रा का नहीं। “मुझे बताया गया कि इसकी वजह यह है कि मैं एक महिला हूँ। वे सभी 43 लोग धीरे-धीरे सुपरवाइजर के पद पर पदोन्नत हो गए और अंततः लगभग 1.5 लाख रुपये मासिक वेतन तथा पेंशन लाभ पाने लगे। लेकिन मुझे निजी कंपनियों में काम करना पड़ा और हर महीने 100 रुपये से लेकर 14,000 रुपये तक कमाने पड़े।”
आज 63 वर्षीय सुमित्रा को लगता है कि उन्हें न्याय मिल गया है। 17 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने IOC द्वारा नौकरी देने से इनकार करने के आधार को भेदभावपूर्ण पाया और उन्हें 12 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। सुमित्रा के लिए यह फैसला 36 वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद आया—इतना लंबा समय, जितना कि उनकी वास्तविक नौकरी की अवधि भी नहीं होती। “मेरे पति ने तत्कालीन मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को पत्र लिखे थे, लेकिन कुछ नहीं हुआ।”
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मैं अभी रीतिका चौपड़ा की एक बातचीत सुन रहा हूँ। रीतिक चौपड़ा कितना विनम्र रिपोर्टर हैं। अभी उन्हें यह एहसास ही नहीं कि उन्होंने क्या कर दिया है। वे अपनी इस इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट को बाकी इन्वेसटिगेटिव रिपाेर्ट की तरह ही मान रही हैं। यह उनकी विनम्रता और विशाल हृदयता है। यह उनके व्यक्तित्व को बहुत अलग बनाता है। इंडियन एक्सप्रेस की यह स्टोरी भारतीय पत्रकारिता की माइल स्टोन स्टोरी है। यह बिना किसी शक़ पुलित्ज़र अवार्ड स्तर की स्टेारी है। क्येांकि यह स्टोरी भारतीय लोकतंत्र के भीतर की उस सड़न को बाहर लाती है, जिसने संविधान को निरर्थक कर दिया है।
@RitikaChopra__