Dear Prime Minister Ambani,
Please accept my humble apologies for not realizing that you are the real boss of India.
Naturally, you would prefer to maintain your monopolistic exploitation of the great people of India, but would you nonetheless consider allowing Starlink to compete?
There are many areas of India, as there are in all countries, with no Internet access, which denies children the opportunity for education and for small businesses the opportunity to sell their goods to a global market. Starlink would change their lives for the better.
Thank you 🙏
1.जैसाकि यह विदित है कि पिछले कुछ दिनों से देश के विभिन्न भागो में भारी वर्षा व आँधी, तूफान आदि के कारण जनता काफी मुश्किल दौर से गुजर रही है। ऐसे कुदरती विकट हालात में सम्बन्धित सभी राज्य सरकारों को प्रभावित लोगों की हर स्तर पर पूरी-पूरी मदद करनी चाहिये। बी.एस.पी. की यह मांग है।
2.इसके साथ ही महाराष्ट्र राज्य के काफी इलाको में सूखे की मार झेल रहें लोगों व खासकर किसानों के प्रति राज्य सरकार को केवल औपचारिकता नहीं बल्कि पीडि़तों की जमीनी स्तर पर सही से मदद करके किसानों को फौरी राहत देने का प्रयास करना चाहिये।
3.इसी परिपेक्ष्य में यहाँ मैं यह भी कहना चाहूँगी कि देश में बी.एस.पी. संगठन को तैयार करने व सर्वसमाज में पार्टी के जनाधार को बढ़ाने के लिए अब पार्टी संगठन को तीन सेक्टरों में बांट दिया गया है।
*जिसके तहत सेक्टर नं.-1 में 10 राज्य आते है। जिनको बी.एस.पी. राज्यसभा सांसद श्री रामजी गौतम व श्री सुरेश राव ये दोनों केन्द्रीय सेक्टर प्रभारी मिलकर यहाँ पार्टी के सभी कार्य देख रहें हैं।
*सेक्टर नं.-2 में 9 राज्य आते है। जिनको पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद श्री राजाराम व पूर्व विधायक श्री अतरसिंह राव ये दोनों केन्द्रीय सेक्टर प्रभारी मिलकर यहाँ पार्टी के सभी कार्य देख रहें हैं।
*सेक्टर नं.-3 में उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड प्रदेश आते है जिनको लखनऊ पार्टी केन्द्रीय कैम्प कार्यालय 9 माॅल एवेन्यू द्वारा सीधा देखा जा रहा है।
4.ऐसे में लोगों के कुदरती मार पड़ने से खासकर सेक्टर नं.-1 व सेक्टर नं.-2 के इन चारों केन्द्रीय सेक्टर प्रभारियों से यह अपील की जाती है कि वे अपने-अपने सेक्टर के अन्तर्गत आने वाले सभी राज्यों में,
*जहाँ-जहाँ भारी वर्षा व तूफान आदि के कारण जबरदस्त जानी, माली, तबाई मची हुई है, वहाँ अपनी पार्टी के लोग भी अपनी सामर्थ के हिसाब से उनकी मदद जरुर करें।
*लेकिन इसके लिए इनको कोई भी अलग से धन इकट्ठा नहीं करना है। ताकि इसकी आड़ में कोई भी नाजायज फायदा ना उठा सके।
5.साथ ही जरुरत पड़ने पर ज्यादा प्रभावित प्रदेशों में, मैं बी.एस.पी. के राष्ट्रीय प्रभारी श्री ईशान आनन्द को भी भेज सकती हूँ। और इस मामले में खासकर सेक्टर नं.-3 के दोनों राज्यों में मेरी खुद भी पैनी नजर है। जहाँ मैं खुद भी ऐसे क्षेत्रों का दौरा कर सकती हूँ।
6.अन्त में मेरा केन्द्र सरकार से भी अनुरोध है कि वे देश के ज्यादा प्रभावित हो रहे राज्यों में, वहाँ कि सरकारों की समय से पूरी-पूरी मदद जरुर करें, जो यह उचित होगा।
1. आज मेरा पुनः पार्टी के लोगों से यही कहना है कि मेरे ख़ुद के अनुभव को मद्देनज़र रखते हुये यदि इनको राजनीति में कामयाब होना है और समाज के लिए कुछ करना है तो उन्हें मेरी तरह अपने भाई-बहिनों व नज़दीकी रिश्ते-नातों आदि के मोह से ऊपर उठकर अपनी पूरी ईमानदारी व निष्ठा से कार्य करना है,
* इसीलिए बी.एस.पी. के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी ने राजनीति में आने के बाद, फिर अपने सभी नज़दीकी रिश्ते-नातों आदि को राजनीतिक लाभ देने से हमेशा दूर रखा है। उन्हें केवल निःस्वार्थ भावना से पार्टी संगठन में कार्य करने की ही इजाज़त दी है। इतना ही नहीं बल्कि इन्होंने अपनी पूरी ज़िन्दगी, अपना ख़ुद का परिवार ना बनाकर, ’बहुजन समाज’ के हित व कल्याण के लिए ही समर्पित की है।
2. जिनसे प्रेरित होकर फिर मैंने भी उन्हीं के ही पदचिन्हों पर चलने का फैसला लिया और अपनी पूरी ज़िन्दगी ’बहुजन समाज’ के लिए समर्पित कर दी है।
* लेकिन मैं एक लड़की होने की वजह से फिर मजबूरी में मुझे अपने किसी ना किसी भाई-बहिन आदि को हमेशा अपने साथ रखना पड़ा है, जिसके तहत् ही मेरा छोटा भाई श्री आनन्द कुमार यह पिछले काफी वर्षों से मेरी सेवा में कार्यरत है।
3. और इनके विशेष आग्रह करने पर फिर इनके परिवार में से मुझे इनके बड़े बेटे श्री आकाश आनन्द को राजनीति में आगे करना पड़ा है।
* जिनकी शादी होने के बाद से अब श्री आकाश आनन्द का क़दम-क़दम पर ऐसा रवैया व गतिविधियाँ आदि रही हैं कि जिसकी वजह से अभी कुछ दिन पहले फिर से इनको पार्टी से अलग भी करना पड़ा है।
* अर्थात् अब वह अपने ससुर श्री अशोक सिद्धार्थ के जंजाल में पूरी तरह से फंस चुके हैं, जिसे अब पार्टी में वापिस लेना यह पार्टी के लिए बहुत बड़ा विश्वासघात ही होगा, जो मैं यह पार्टी विरोधी ग़लत कार्य कदापि नहीं कर सकती हूँ।
4. ऐसे में अब मैं श्री आनन्द कुमार के परिवार में से किसको पार्टी में आगे करूँ या ना करूँ, यह मेरे लिए पिछले कुछ समय से काफी दुविधा सी बनी हुई है, जिस पर विराम देते हुए अब मैंने हर पहलू पर काफी गम्भीरता से सोच-विचार करने के बाद यह फैसला लिया है कि इनके परिवार में से ऐसे किसी सदस्य को अब पार्टी में आगे किया जाये, जो आकाश के नक्शेकदम पर बिल्कुल भी ना चले।
5. और जहाँ तक आगे चलकर, इनकी बेटी की मदद लेने का सवाल है तो इनकी शादी होने के बाद, फिर इनका मामला भी यदि श्री आकाश आनन्द की तरह ही निकल गया तो यह भी पार्टी हित में सही नहीं होगा।
* ऐसी सम्भावना को भी ध्यान में रखकर अब पार्टी हित में यही उचित होगा कि श्री आकाश आनन्द व इनकी बहिन को भी अब पार्टी की कोई भी ज़िम्मेवारी देने से इन दोनों को एकदम दूर रखा जाये अर्थात् अब इनके इस फैसले में कोई भी फेरबदल नहीं किया जायेगा।
6. और अब इन दोनों के स्थान पर श्री आनन्द कुमार के परिवार में से केवल श्री ईशान आनन्द को ही, पार्टी में सम्मानजनक ज़िम्मेवारी देकर इनको आगे किया जायेगा, जिसका श्री आकाश आनन्द व इनकी बहिन की तरह कभी भी कोई चक्कर नहीं रहेगा। अभी तक ऐसा ही लग रहा है। आगे तो कुछ भी नहीं कहा जा सकता है
7. फिर भी यदि इन्होंने पार्टी विरोधी ऐसा कोई भी गम्भीर कृत्य किया तो फिर इनको भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जायेगा, लेकिन तब ऐसी स्थिति में श्री आनन्द कुमार के परिवार में से अन्य किसी भी सदस्य को पार्टी की कोई भी छोटी-बड़ी ज़िम्मेवारी नहीं दी जायेगी।
* बल्कि इसके स्थान पर, तब फिर पार्टी में ही कार्यरत दलित वर्ग के किसी भी एक मिशनरी व वफादार कार्यकर्ता को ही आगे कर दिया जायेगा। इसलिए देश व जनहित के ज़रूरी मुद्दों के साथ-साथ इस ख़ास मुद्दे को भी लेकर अब दिनांक 23 सितम्बर की बी.एस.पी. की अत्यन्त ज़रूरी ऑल-इण्डिया की बैठक बुलाई गई है ताकि फिर पार्टी के लोग अपनी पार्टी के कार्यों में पूरे जी-जान से जुट जायें।
8. अन्त में अब मैं यही कहना चाहती हूँ कि ख़ासकर परिवार को लेकर पार्टी व मूवमेन्ट के हित में मैंने यह फैसला मान्यवर श्री कांशीराम जी से प्रेरित होकर तथा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर जी के भी लिखे गये एक पत्र से प्रभावित होकर लिया है, जिस पत्र का सारांश इस प्रकार से है:
9. बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने, दिनांक 23 फरवरी सन् 1956 को 26 अलीपुर रोड, सिविल लाइन्स, नई दिल्ली से बम्बई में अपने पुत्र श्री यशवन्त बी. अम्बेडकर को पत्र में लिखा है कि,
* मुझे तम्हें सूचित करना है कि श्री उपशम के कई पत्राचार मिले हैं कि तुम उन्हें बौद्ध भूषण प्रिन्टिंग प्रेस के एकाउण्टेन्ट व कैशियर के रूप में उनकी ड्यूटी नहीं करने दे रहे हो।
* तुम्हें ऐसा लगता है कि ऐसा करके तुम प्रेस को अपने कब्जे में ले लोगे। मैं तुम्हें आगाह कर रहा हूँ कि प्रेस पब्लिक प्रापर्टी है, ना तुम्हारा है और ना मेरा, और एक पब्लिक अकाउण्ट में किसी भी प्रकार की अनियमितता की अनुमति देना संभव नहीं है।
* तुम्हारा आचरण उचित नहीं रहा है...अगर तुमने मेरी अन्तिम व फाइनल निर्देश की परवाह नहीं कि तो फिर मैं तुम्हें प्रेस से निकाल-बाहर करूंगा और इस चेतावनी के नहीं मानने पर फिर मैं आपके विरुद्ध अभियोजन (मुक़दमा) (prosecute) भी करूंगा।
10. संक्षेप में अब मैं अपने ख़ुद के बारे में भी यही कहना चाहती हूँ कि समस्त ’बहुजन समाज’ ही मेरा असली परिवार है तथा सत्ता की मास्टर चाबी के ज़रिये ही उन्हें ’शोषित से शासक वर्ग’ बनाकर उनका हित व कल्याण सुनिश्ति करना ही मेरा मिशनरी लक्ष्य व मेरी प्रतिज्ञा भी है, जिसके लिए मैं अपने भाई-बहिनों आदि के ख़िलाफ भी किसी भी हद तक जा सकती हूँ, जैसाकि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने उदाहरण पेश किया, यही मेरा भी संकल्प है।
@BJP4Haryana बारिश में हरियाणा का कुरुक्षेत्र तालाब बन जाता है क्यो सालों थारा शर्म नही , कब तक दोगली राजनीति करते रहोगे। करनाल का बस स्टैंड बारिश में पानी पानी हो जाता है bjp के इतने सालों के राज के बाद भी यही हाल है ,शर्म करो दोगलो
गांधी जी की वकालत दक्षिण अफ्रीका में फेल हो चुकी थी.
गोपाल कृष्ण गोखले के बुलावे पर गांधी जी 1915 में बॉम्बे (मुंबई) आए.
ब्रिटिश काल में राजा, वाइसराय और अन्य VVIP लोगों का आगमन Apollo Bunder यानी आज के गेटवे ऑफ इंडिया पर होता था.
जहाज से आम लोगों को Pallard Pier में उतारा जाता था. लेकिन गांधी जी को विशेष तौर पर Apollo Bunder पर उतरने की इजाजत दी गयी.
गांधी जी के स्वागत में पूरी कांग्रेस पार्टी खड़ी थी. इसके अलावा पारसी उद्योगपति JB Petit, गुजराती उद्योगपति NM Gokaldas और अंग्रेजी अखबार के एडिटर BG Horiniman आए थे.
जहां दक्षिण अफ्रीका में छोटा सा आंदोलन करना मुश्किल था वहीं भारत मे पांच के भीतर गांधी जी राजनीति में स्थापित हो गए.
बाद में घनश्यामदास बिड़ला और जमनालाल बजाज ने गांधी जी को गरीबों की तरह जीवन यापन करने पर भारी आर्थिक सहायता की. गरीबी जीने के लिए भी रुपया लगता था.
गांधी जी बहुत महान थे. उनको याद कर मेरे आंसू आ जाते हैं.
Image : From Gandhi Movie (1982)
1. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अगले छह महीने में (अर्थात विधानसभा आमचुनाव तक) एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की घोषणा हालाँकि विलम्ब से उठाया गया सही किन्तु चुनावी क़दम ज़्यादा लगता है, फिर भी वे नियुक्तियाँ पेपरलीक व भ्रष्टाचार आदि के अभिशाप से मुक्त समय से पूरा हो जायें तो यह सही होगा ताकि यह चुनावी छलावा ना साबित हों, जबकि इसके साथ ही एससी, एसटी व ओबीसी समाज के आरक्षित पदों के बैकलाग पर भर्तियों के बारे में भी सरकारी घोषणा की लोगों को उत्सुकता से प्रतीक्षा है।
2. इतना ही नहीं बल्कि यहाँ 69,000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण के नियमों को लेकर इन वर्गों के 6,800 अभ्यार्थी अपनी नियुक्ति के लिये भूखे-प्यासे लगातार आन्दोलनरत हैं, उनके बारे में भी सरकार को पूरी सहानुभूतिपूर्वक ज़रूर सोचना चाहिये, क्योंकि उन्हें वास्तविक राहत सरकार ही दे सकती है।
3. इसके साथ ही, बी.एस.पी. यूपी सहित पूरे देश भर में स्कूली शिक्षा की बदहाल व्यवस्था को समुचित तौर पर बेहतर बनाने की माँग लगातार करती रहती है, किन्तु संभवतः ’जेन-जी’ व ’जेन-अल्फा’ के दबाव में जो थोड़ी अनचाही हलचल सरकारी स्तर पर देखने को मिल रही है वह मामूली ही सही परन्तु स्कूली शिक्षा में सुधार करने की सही नीयत से हो तो यह उचित होगा और इस क्रम में यहाँ लगभग 30 हज़ार जो सरकारी स्कूल बंद कर दिये गये हैं उन्हें दोबारा अच्छे तरीके से सक्रिय करने की व्यवस्था सरकार अविलम्ब करे तो यह भी जनहित में होगा।
4. इसके अलावा, बुजुर्ग महिलाओं को बसों में निशुल्क यात्रा आदि की व्यवस्था से कहीं अधिक महिलाओं को हर क्षेत्र में शोषण, अत्याचार, उत्पीड़न आदि से बचाने के साथ ही महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान व आत्मनिर्भरता के बारे में भी सरकारों को सही नीयत व नीति से कार्य करने की ज़रूरत है।
1. जैसाकि सर्वविदित है कि समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख द्वारा अपनी पुरानी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल व उस पार्टी के नेता केन्द्रीय मंत्री के बारे में यह सार्वजनिक बयान देना कि ’हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया है’, यह कहना पूर्णतः अमर्यादित, अशोभनीय व अति-शर्मनाक है तथा इस प्रकार की अहंकारी व अलोकतांत्रिक बयानबाज़ी के लिये उन्हें उस पार्टी से व उनके नेता से ही नहीं बल्कि स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह जी के परिवार का अपमान करने हेतु पूरे जाट समाज से भी अविलम्ब माफी माँगनी चाहिये तो यह उचित होगा।
2. वैसे देश की राजनीति में सपा का चाल, चरित्र व चेहरा अपने विरोधी पार्टियों के लिये ही नहीं बल्कि अपने सहयोगियों के लिये भी हमेशा से राजनीतिक संकीर्णता व जातिवादी द्वेष आदि से ग्रसित ज़्यादातर अप्रिय और अविश्वसनीय ही रहा है, जिस कारण इसका राजनीतिक एवं चुनावी लाभ भी अक्सर मौक़ों पर भाजपा ही उठाती रही है और सेक्युलर ताक़तें कमज़ोर होती रहीं हैं।
3. इस पार्टी के इसी प्रकार के अति-अहंकारी स्वाभाव के कारण पहले सन् 1993 में, यू.पी. में श्री मुलायम सिंह यादव के साथ सपा व बसपा का बना गठबन्धन जल्दी ही टूट गया, जिसके फलस्वरूप दिनांक 2 जून 1995 को मेरी हत्या करने के षडयन्त्र के तहत् मेरे विरुद्ध कुख्यात लखनऊ स्टेट गेस्ट हाऊस काण्ड हुआ।
और फिर आगे चलकर इनके बेटे श्री अखिलेश यादव द्वारा, इनके पिता की तरह पुरानी ग़लतियों को फिर से ना दोहराने का आश्वासन देते हुये, लोकसभा का चुनावी गठबन्धन हुआ जो चुनाव का नतीजा इनके अनुरुप ना आने की वजह से कुछ समय के बाद ही बी.एस.पी. के प्रति इनके अहंकारी व स्वार्थी आदि रवैये के कारण फिर यह गठबन्धन भी टूट गया, क्योंकि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के कारवाँ वाली पार्टी बी.एस.पी. व उसकी नेतृत्व ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की सर्वसमाज हितैषी अम्बेडकरवादी नीतियों व सिद्धान्तों से कदापि विमुख नहीं हो सकती है।
4. अब संक्षेप में यही कहना है कि यह पार्टी (सपा) गठबन्धन के मामले में केवल अपना काम निकालना जानती है और अपना काम निकलते ही फिर यह पार्टी गिरगिट की तरह अपना रंग बदल लेती है तथा दूसरी पार्टी के बारे में अनाप-शनाप भाषा का भी ख़ूब इस्तेमाल करती रहती है, जो कि यह सपा का पुराना रवैया है। ऐसे में सर्वसमाज के लोग सपा की संकीर्ण व जातिवादी राजनीति से ज़रूर सावधान रहें।
5. इसके साथ ही, यह बात भी जग-ज़ाहिर है कि सपा मुखिया श्री अखिलेश यादव अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए अपने PDA में से P को कभी पिछड़ा वर्ग, तो कभी P को पण्डितों का हितकारी बता देते हैं, जबकि इनके बारे में सच्चाई तो यह है कि वे पिछड़े वर्गों में अपनी ख़ुद की जाति के अलावा बाकी पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों तथा अपरकास्ट समाज में से ख़ासकर ब्राह्मण समाज के भी क़तई हितैषी नहीं रहे हैं।
6. इतना ही नहीं बल्कि इस पार्टी (सपा) की सभी रही सरकारों में दलितों, पिछड़ों, अक़लियतों, अपरकास्ट समाज में से विशेषकर ब्राह्मण समाज का भी काफी शोषण व उत्पीड़न आदि किया गया है तथा ना ही इनके हितों में कोई भी सकारात्मक क़दम उठाये गये हैं, बल्कि इनकी सरकार में वास्तव में केवल गुण्डों, बदमाशों, माफियाओं व अन्य अराजक तत्वों का ही भला हुआ है और साथ ही इनकी सरकार में दिन-छिपने के बाद हमारी बहिन-बेटियाँ भी घर से बाहर नहीं निकल सकती थीं। ऐसे में सर्वसमाज के लोग यू.पी. आगामी विधानसभा आमचुनाव में इस पार्टी (सपा) को सत्ता में क़तई भी ना आन दें, जो यह उनके हित में होगा।
CJP Impact!
राजस्थान के जोधावास, थानागाजी स्थित स्कूल में मरम्मत कार्य शुरू हो गया है। यह वही स्कूल है जहाँ हम पिछले हफ़्ते गए थे।
क्लासरूम्स की मरम्मत की जा रही है, जर्जर भवन को ज़मींदोज़ कर दिया गया है। वाशरूम और प्लेग्राउंड भी जल्द तैयार हो जाएगा।
इसी के लिए तो हम लड़ रहे है। स्कूल ठीक हो, बच्चे अच्छे से पढ़ सके। किसी भी समझदार और देशभक्त व्यक्ति को इसमें दिक्कत नहीं हो सकती।
@DMDCAlwar - Thank you for working on this. Requesting you to also inspect other dilapidated schools in your area.
@Cockroachisback@abhijeet_dipke@deepakbaliyan90@mukallrounder@ApoorvJaipur@ramjakhar_9
A 30-year-old Dalit cab driver, Ankit Kumar, has alleged that Rapido suspended his account for “99 years and 11 months” after he asked four passengers to leave his vehicle over alleged casteist remarks in Lucknow. Kumar said the passengers repeatedly used caste-based slʉrs and that the suspension has affected his livelihood. Rapido’s response was not immediately available.
Caste Slur Row
👉🏽 Kumar, a mechanical engineering diploma holder, said he repeatedly asked the passengers to stop making derogatory comments before stopping near Telibagh market and asking them to leave. A video of the confrontation later surfaced online, after which he said he received abusive and threⱥtening messages.
Livelihood Affected
👉🏽 Kumar alleged that Rapido suspended his account after the passengers complained without seeking his version. As the sole earning member of his family, he said the suspension has placed his livelihood at risk.
⚡⚡How can companies better balance accountability with fairness?
Footage: Benarasiyaa/X
[Dalit cab driver, Lucknow, Rapido, caste slʉrs, caste discrimination, cab driver suspension, Uttar Pradesh, Ankit Kumar, ride-hailing app, casteist remarks, The Logical Indian]
#Dalit #CasteDiscrimination #Lucknow #TheLogicalIndian
1. उत्तराखण्ड स्टेट के हल्द्वानी में अभी हाल ही में, कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे के हुये प्रोग्राम के बाद उनके मंच का दलित होने की वजह से शुद्धीकरण किया गया है। यह जानकारी कल संसद के ज़रिये भी देश को मिली है। यह मामला अति-निन्दनीय व चिन्तनीय है तथा वहाँ कि सरकार बिना कोई देरी किये हुये ऐसे जातिवादी एवं सामन्ती तत्वों के विरुद्ध सख़्त क़ानूनों के तहत् उचित कार्रवाई करके उन्हें जेल भेजे।
2. साथ ही, इस घटना आदि के सम्बंध में आर.एस.एस. के मुखिया को भी संज्ञान लेकर ज़रुर गंभीरता से सोचना चाहिये जो कि दलितों के आर्थिक तौर पर थोड़ा मज़बूत हुये लोगों को आरक्षण से वंचित करने की बात कर रहें हैं।
3. इसके इलावा, अभी हाल ही में महाराष्ट्र के नान्देड़ में शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख श्री सुखबीर सिंह बादल पर किये गये हमले की घटना भी अति-दुःखद व चिन्तनीय है। केन्द्र व महाराष्ट्र की सरकार इस घटना को पूरी गम्भीरता से लेते हुये दोषियों के विरुद्ध सख़्त क़ानूनी कार्रवाई करे।
1.जैसाकि विदित है कि दिनांक 10 अगस्त 2019 को दिल्ली के तुग़लकाबाद में संतगुरु श्री रविदास जी के पवित्र गुरुघर को बुलडोज़र और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ढहा दिया गया था। इसके विरोध में देशभर की संगत जब लोकतांत्रिक ढंग से सड़कों पर उतरी तो तब उन्हें लाठीचार्ज, आँसूगैस, गिरफ्तारियाँ और मुकदमों आदि का सामना करना पड़ा। काफी लोगों को जेल भी जाना पड़ा।
2.इतना ही नहीं गुरुघर की भूमि भी छीन ली गई और आज भी संगत को लोहे के अस्थायी टीन शेड में अपने गुरुजी को माथा टेकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यह स्थिति करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करने वाली है और आज भी समाज की स्मृति में अंकित है।
3.अब पंजाब चुनाव नज़दीक आते ही वही भाजपा संतगुरु श्री रविदास जी के नाम पर कलश यात्रा निकालकर गुरुजी के बेगमपुर शहर के लक्ष्य से समाज को भटाकने का प्रयास कर रही है। दूसरी ओर पंजाब के धलेता गाँव में गुरुघर की दीवार गिराए जाने पर जब संगत और बसपा ने आवाज़ उठाई तो गिरफ्तारियाँ की गईं। अन्त में फिर आम आदमी पार्टी की सरकार को झुकना पड़ा और गुरुघर का पुननिर्माण कराना पड़ा।
4.ऐसे में समाज भाजपा और आम आदमी पार्टी की राजनीति से सतर्क रहें। पराधीनता का अन्त एवं बेगमपुरा का संकल्प संतगुरु श्री रविदास जी सम्मान यात्रा जो तुग़लकाबाद से धलेता गाँव तक पहुँच रही है, जिसमें समूह संगत सादर आमंत्रित हैं। और संतगुरु श्री रविदास जी बेगमपुरा के आदर्श, सम्मान, समानता और न्याय के संदेश को जन-जन तक पहुँचाए तथा गुरुघरों की गरिमा, धार्मिक अधिकारों और संतगुरु श्री रविदास जी के सपनों के अनुरूप पराधीनता मुक्त समाज के निर्माण के संकल्प को मज़बूत बनायें।
1.देश में ’बहुजन समाज’ में से ख़ासकर एससी, एसटी व ओबीसी वर्गों के लिये आरक्षण ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ अर्थात् हमेशा से इनके आत्म-सम्मान की ज़िन्दगी से जुड़ा अति-महत्वपूर्ण व अत्यन्त संवेदनशील मामला है और जाति के आधार पर सदियों से यहाँ तोड़े, सताये व पछाड़े गये एससी व एसटी समाज के लिये तो यह अत्यन्त ज़रूरी मामला भी विशेषकर तब बन जाता है जब जातिवादी द्वेष, शोषण, प्रताड़ना, अन्याय-अत्याचार कम होने का नाम ना ले, और इसीलिये इसमें क्रीमी लेयर की बात करना अनुचित ही नहीं बल्कि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के मानवतावादी संविधान के पवित्र उद्देश्यों के भी विरुद्ध है, हालाँकि किसी को भी इसकी अनदेखी नहीं करनी चाहिये बल्कि सभी को देश व जनहित के मद्देनज़र अपनी पूूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ इस पर अमल भी ज़रूर करना चाहिये।
2.जबकि इस बारे में आरएसएस प्रमुख का अभी हाल में फिर से यह कहना कि, ’आरक्षण का जानबूझकर राजनीतिकरण किया गया है जिससे समाज में कड़वाहट भरी है तथा आरक्षण के लाभार्तियों को स्वेच्छा से इसका लाभ छोड़ देना चाहिये’, वास्तव में यह इनकी ऐसी जातिवादी सोच है जिससे संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति तो हो सकती है, किन्तु इससे संवैधानिक उद्देश्यों की अवहेलना होती है, क्योंकि आरक्षण मूलतः सदियों से जातिवादी व्यवस्था के शिकार करोड़ों शोषित-पीड़ित, उपेक्षित व तिरस्कृत लोगों को मानवीय आधार पर समता व समानता का संवैधानिक व कानूनी अधिकार देना है, और जिसे आर्थिक उन्नति से कतई भी नहीं आँका जा सकता है, क्योंकि जातिवाद का दंश जीवन के हर पहलू में उन्हें डसता ही रहता है और जो क्रम अभी भी हर स्तर पर लगातार जारी है, यह आरएसएस से ज़्यादा भला कौन जानता है?
3.इतना ही नहीं बल्कि केन्द्र में अभी तक रही सभी सरकारें भी इस कड़वी ज़मीनी वास्तविकता को भलीभाँति जानती और समझती भी हैं और इसीलिये अगर वर्तमान सरकार अपने वाजिब तर्कों के आधार पर इसकी प्रभावी व समुचित पैरवी करके एससी व एसटी समाज को क्रीमी लेयर से दूर रखने हेतु अपना पक्ष अदालत से मनवा लेती है तो यह पूर्णतः उचित व संवैधानिक होगा। वैसे अक्सर यही देखा गया है कि सरकारों के लचर रवैये व अच्छी कानूनी पैरवी के अभाव में ही अदालतें ’सामाजिक परिवर्तन’(Social Transformation) आदि के मामलों में सही से न्याय नहीं कर पाती हैं।
4.इस बारे में आरएसएस से भी यही कहना है कि वह परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के मानवतावादी एवं कल्याणकारी संविधान को पूरा-पूरा आदर-सम्मान देते हुये आरक्षण को लेकर राजनीति करना छोड़ दे और साथ ही आरक्षण में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की वकालत बंद करके देश में ’समतामूलक समाज व्यवस्था’ (Equalitarian Social order) की स्थापना के संवैधानिक दायित्व/उद्देश्यों की पूर्ति में पूरी तरह से सहयोग करे तो यह बेहतर होगा, यही वक्त की ज़रूरत व समय की माँग भी है।
1. गुजरात राज्य के ज़िला गिर सोमनाथ के ऊना में सन् 2016 में हुये दलितों पर जघन्य अन्याय-अत्याचार काण्ड के लगभग सभी अभियुक्तों को मार्च में स्थानीय कोर्ट द्वारा बरी करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देकर न्याय पाने के लिये पीड़ित दलित परिवारों को वित्तीय आदि का भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी विचलित करने वाली कड़वी सच्चाई से ख़ासकर ’बहुजन समाज’ के लोगों में भारी चिन्ता व्याप्त है।
2. इसको लेकर मेरी चिन्ता का विशेष कारण यह भी है कि इस काण्ड के पीड़ितों से मिलने मैं खु़द भी वहाँ गयी थी और वहाँ सच्चाई का पूरा पता करने के बाद राज्य सरकार से सभी दोषियों के विरुद्ध सख़्त कार्रवाई करने की माँग की थी, किन्तु देश भर में इसके ख़िलाफ रोष व आक्रोश आदि होने के बावजूद 40 में से 35 आरोपी के मार्च महीने में बरी हो जाने की ख़बर कुछ और नहीं बल्कि दलितों के प्रति सरकारी द्वेष, उनके हित व सुरक्षा के प्रति लापरवाही व उदासीनता आदि का ही परिणाम ज़्यादा लगता है।
3. वैसे अभी भी मौक़ा है जब गुजरात सरकार अपनी इस ग़लती में सुधार करते हुये इस मामले की हाईकोर्ट में उचित पैरवी करके सभी दोषियों को सख़्त सज़ा दिलवाये ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके और दूसरों को सबक।
4. साथ ही, राज्य सरकार पीड़ित परिवार वालों के संतोष के मुताबिक वकील सरकारी ख़र्च पर उसी तरह मुहैया कराये, जिस प्रकार बी.एस.पी. की यूपी में मेरी रही सरकार ने ग़रीबों के लिये फ्री में क़ानूनी सहायता का क़ानूनी प्रावधान किया था।