परमपूज्य गुरु महाराज स्वामी श्री परमहंस अड़गड़ानंद जी महाराज के तकरीबन 75 वर्षों पश्चात अपनी पावन जन्मभूमि ओसियां आगमन पर आयोजित भव्य कथा समारोह में सम्मिलित होने का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ।
इस पावन अवसर पर गुरुदेव का स्नेहिल आशीर्वाद, आध्यात्मिक ऊर्जा और मार्गदर्शन जीवन पथ को और अधिक सकारात्मक दिशा देने वाला रहा।
अजमेर में "मीरा दर्शन यात्रा" का पोस्टर विमोचन
श्री क्षत्रिय युवक संघ के आनुषंगिक संगठन श्री क्षात्र पुरुषार्थ फाउंडेशन द्वारा आगामी 25 से 27 जुलाई तक आयोजित होने वाली मीरा दर्शन यात्रा को लेकर आज अजमेर स्थित
मेजर शैतान सिंह छात्रावास में यात्रा का पोस्टर विमोचन किया गया। 1/2
मेड़ता में "मीरा दर्शन यात्रा" का पोस्टर विमोचन
श्री क्षत्रिय युवक संघ के आनुषंगिक संगठन श्री क्षात्र पुरुषार्थ फाउंडेशन द्वारा आगामी 25 से 27 जुलाई तक आयोजित होने वाली मीरा दर्शन यात्रा को लेकर आज मेड़ता स्थित चतुर्भुज नाथ मंदिर एवं 1/4
@shri_kys@Shri_PF@rewantpatoda
गाय के बारे में मुझे कोई दो लाइन पूछे तो मैं उनको बताना चाहता इस संसार में लोगों को बहुत बड़ा भ्रम है की गाय को हम पाल रहे हैं परंतु सत्य तो इसके बिलकुल विपरीत हैऔर वह सत्य यह है कि इस संसार को गाय माता पाल रही है जैसे एक मां सारे कष्ट को सहते हुए अपने छोटे बच्चे को पालती है
जीवन में कोई भी भलाई व्यर्थ *नहीं जाती, यह किसी*
*ना किसी रूप में लौटकर जरूर* **आती है..वर्तमान का सबसे बड़ा परमार्थ गोसेवा है,,,,!** Pratap Singh Chandhan ✍️✍️
*देगराय मंदिर के पास 25000 पौधो की वाटिका लगाई जा रही है अभी चारो तरफ जाली का कार्य चल रहा है उसके बाद गढ़े करके एक साथ एक दिन में 25000 पौधे लगाए जाएंगे और वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया जायेगा।22 सितम्बर 2024 को सभी लोग ज्यादा से ज्यादा 11 बजे पधार कर इस मुहिम को मजबूत करे
चूल्हा मिट्ठी का , मिट्ठी रणभूमि की , रणभूमि ठाकुर की , युद्ध देश का , देश सबका ,तलवार की मुठिया ठाकुर कि , सर कटा ठाकुर का , माँ की कोख सुनी हुई ठाकुर कि , पत्नी विधवा हुई ठाकुर की , बच्चे अनाथ हुए ठाकुर के ………
जय-जय राजस्थान
बाबा साहेब ने दलितों को आरक्षण दिलाने में महत्ती भूमिका अदा की तो आज वो घर घर पूजे जाते है। ठीक ऐसे ही भारत के पूर्व प्रधानमंत्री वी.पी.सिंह जी ने मंडल कमीशन के आधार पर समाज के पिछड़े वर्ग को ‘OBC’ आरक्षण रूपी संजीवनी दी।
पर उन्हे पूजा जाना तो दूर उनकी जयंती तक याद नहीं आती।
क्या कारण है इसका, सिर्फ यही कि वो ठाकुर थे ?
या इस देश में सिर्फ ठाकुरों के गुनाहों को ही गिनाया जायेगा उनके गुणों को नहीं। इस देश के लिए हर प्रकार से अचिंत्य बलिदान देने वाली कौम के प्रति इस प्रकार का उपेक्षित भाव जब नज़र आता है तो बड़ी पीड़ा होती हैं।
इतनी सेलेक्टिव एप्रोच, इतना दोगलापन शायद दुनिया के किसी और देश में नहीं होता होगा।