Indian Express ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर बड़ा खुलासा किया है।
सबका साथ-सबका विकास हो रहा है मुख्यमंत्री मोहन के राज में
#mohanyadav#Ujjain
क्रिकेटर आकाशदीप के तिलक का वीडियो...
कुछ बातें जिनपर चिंतन बहुत जरूरी है...इस लेख को जरूर पढ़िएगा..
"ये दुल्हन का भाई है, ये चाचा हैं, ये बड़का भईया हैं..."
एक समय था जब तिलक केवल शादी की रस्म नहीं, बल्कि दो परिवारों, दो गांवों और दो समाजों के मिलन का उत्सव हुआ करता था.. तिलकहरू के आते ही पूरे गांव में चहल-पहल बढ़ जाती थी..लोग उत्सुक रहते थे कि कौन आया है, किसका क्या रिश्ता है.. परिचय का वो सिलसिला अपने आप में एक सामाजिक उत्सव होता था..
आज भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज आकाशदीप का तिलक समारोह का वीडियो देखकर वही पुरानी यादें ताजा हो गईं, अच्छा लगा ये देखकर कि सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद भी वे अपनी मिट्टी, अपनी परंपराओं और अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं.
पहले के समय में तिलक ही वो अवसर होता था, जब दूल्हा और दुल्हन का परिवार पहली बार आमने-सामने बैठता था. उससे पहले रिश्ते की सारी बातचीत अगुआ और बुजुर्गों के भरोसे चलती थी. तिलक केवल एक रस्म नहीं, बल्कि विश्वास, अपनापन और सामाजिक रिश्तों का सार्वजनिक उत्सव था.
गांव में तिलक का मतलब होता था पूरे गांव का आयोजन. भोज की तैयारी कई दिन पहले शुरू हो जाती थी। कोई सब्जी काटने में जुटा होता, कोई बर्तन जुटाता, तो कोई पहसूल और छिलनी गांव भर से इकट्ठा करता. तिलकहरू के स्वागत में कोई कमी न रह जाए, इसके लिए पूरा गांव एक परिवार की तरह खड़ा रहता था. हर दुआर सजता था, हर चेहरे पर उत्साह होता था और हर दिल में मेहमानों के लिए सम्मान.
तिलकहरू केवल आते नहीं थे, रुकते भी थे. बातचीत होती थी, रिश्ते बनते थे, अपनापन बढ़ता था. यही तो भारतीय समाज की असली ताकत थी—रिश्तों को समय देना और उन्हें जीना.
लेकिन धीरे-धीरे हमारे पूर्वजों द्वारा रची गई इन सुंदर सामाजिक परंपराओं की जगह इंगेजमेंट, रिसेप्शन और दिखावे ने ले ली. आज के डेस्टिनेशन वेडिंग के दौर में तिलक जैसी परंपराएं तेजी से सिमटती जा रही हैं. सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन कहीं न कहीं वो सामूहिकता, वो अपनापन और वो सामाजिक जुड़ाव कमजोर हुआ है.
समय के साथ बदलाव स्वाभाविक है, लेकिन अपनी सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक परंपराओं को बचाए रखना भी उतना ही जरूरी है. तिलक केवल एक रस्म नहीं था, ये समाज को जोड़ने वाला एक जीवंत मंच था. आज के समय में हम सभी को एकजुट होकर अपनी सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी के लिए बचाना होगा. क्योंकि परंपराएं तभी जीवित रहती हैं, जब नई पीढ़ी उन्हें बोझ नहीं, अपनी पहचान समझकर अपनाती है. सोचिएगा जरूर
Happy Birthday @ShamsherSLive Sir 💐💐🎂🎂
May this special day bring you good health, happiness, prosperity, and continued success. Your guidance and leadership inspire us to learn, grow, and achieve our best every day.
Best Wishes 💐💐
जो व्यक्ति तनिक भी ईश्वर में आस्था रखता है, भगवान के दरबार में चोरी करते कलेजा काँप जाएगा। आज कोई बता रहा था कि तिरुपति मंदिर में हर दिन भारी भरकम चढ़ावे की गिनती में आम श्रद्धालुओं की सेवा ली जाती है। देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालु चुपचाप हुंडी की गिनती करते हैं और बिना कोई गड़बड़ किए चले जाते हैं। जो श्रद्धालु श्रमदान करना चाहते हैं, वे अनुरोध करते हैं तो उन्हें श्रीवारी सेवा के तहत अवसर दिया जाता है। इसे बहुत पुण्य का काम माना जाता है। श्रद्धालुओं की टोली, मंदिर प्रबंधन की निगरानी में 2-3 घंटे तक चढ़ावा गिनती है। मंदिर के लोग जानते हैं कि सच्चा श्रद्धालु कभी चोरी का पाप नहीं कर सकता।
तिरुपति में भी एक दो बार हुंडी की गिनती में चोरी की घटनाएँ सामने आ चुकीं हैं, जिसमें कर्मचारी पकड़ा गया, लेकिन आज तक कोई श्रद्धालु नहीं। अगर राम मंदिर में भी गणना कार्य में श्रद्धावान लोगों को लगाया जाए, तो भविष्य में कभी गड़बड़ी नहीं होगी। लेकिन, जब चरित्र की जगह चेहरा देखकर कृपापात्रों को सिस्टम में डाला जाएगा तो बार-बार गडबडझाला होगा।
#WATCH | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज दिल्ली के भारत मंडपम में NDA की बैठक में साथी NDA नेताओं के साथ झालमुरी का आनंद लिया।
(सोर्स: नरेंद्र मोदी/इंस्टाग्राम)
आज़ादी की कीमत इस माँ से पूछिए जिसका बेटा शहीद हो गया, जो राष्ट्रपति से लिपट कर रो रही है...
ऐसी सभी माँ और उनके जाँबाज बेटों को सलाम.. जय हिंद जय भारत 🇮🇳