🚨 UPI User Alert! 15 अक्टूबर से लागू हो रहे हैं नए UPI MDR नियम। क्या आपकी जेब से भी कटेंगे पैसे? पूरी बात इस रील में समझें!👉 शेयर करें अपने सभी व्यापारी दोस्तों के साथ।👉 ऐसे ही अपडेट्स के लिए फॉलो करना न भूलें!
#upimdrcharges#HappyBdayPMModi
India mein koi 5 minutes number Google kar le to doodh ka doodh paani ka paani ho jaye.
RBI surplus to Govt : ₹2.87 Lakh Crores (US$30 Bn)
Total listed bank profits : ₹4.11 Lakh Crores (US$42 Bn)
NPCI - which runs UPI pre tax ‘surplus’ : ₹ 1,888 crores (US$200 Mn)
To nuksaan kis ka ho raha hai UPI se aur kaunsi subsidy de rahi hai Govt UPI pe jo chubh rahi hai?
Cost of running ATMs and cash logistics in India is ₹30,500 crores (US$ 3.0 Bn). If you want to optimise shut ATMs and promote UPI instead.
Any levy on UPI is just tax collection. UPI is the one scientific achievement of India everyone acknowledges par ab tax ki bali chadhegi.
@rohanrgupta Rohan ji aap to intelligent ho kam kam check to kr lete...ye news 12 june ki hai and @Cockroachisback ne school thik kro start kiya hai 15 aug se so esme cjp wale kese galt hue...ha ..@INCIndia ko aap bol skte ho
सरकारी स्कूल के हालात दिखाने पहुचे पत्रकार 👉@kj_srivatsan जी को प्रिंसिपल मैडम ने कह दिया कि आप बत्तामीजी कर रहे हो😳 तो आगे से पत्रकारो को भी ध्यान रखना चाहिए कि जो क्षेत्र मीडिया के लिए प्रतिबंधित है वहा जाने से बचे अन्यथा कुछ ओर भी आरोपो का सामना करना पड सकता है
जयपुर
स्कूलों में कोई भी नहीं जाए...इसके पीछे का एक कारण ये भी है। शिक्षकों का एक छोटा वर्ग आदेश के बाद खुश है।
खैर सरकार ने 12500 करोड़ का बजट तो पास कर दिया। लेकिन, चिंता है कि कहीं इस तरह से ही ये बजट स्कूलों में बस इस तरह खर्च ना हो।
बाकी इस तरह से भ्रष्टाचार की जांच तो अनंत काल तक चलने का रिवाज पुराना रहा है।
@madandilawar@RajCMO
CAG की रिपोर्ट ने भाजपा सरकार की एक और शर्मनाक हकीकत विधानसभा के सामने उजागर कर दी है। बच्चों, बालिकाओं और महिलाओं के लिए चल रही 37 में से 21 योजनाओं में जमीन पर एक रुपया तक खर्च नहीं हुआ। 1 करोड़ से ज्यादा बच्चों, छात्राओं और महिलाओं के लिए 3 हजार करोड़ रुपए का बजट जारी हुआ, लेकिन खर्च शून्य रहा।
कालीबाई भील स्कूटी योजना में 21.61 करोड़, माँ बाड़ी केंद्रों के निर्माण में 6 करोड़, राइट टू एजुकेशन में निजी स्कूल फीस भरपाई के 55.31 करोड़ रुपए तक खर्च नहीं हुए। कॉलेज छात्राओं और महिलाओं की सभी 9 योजनाओं में तो एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ, चाहे लाड़ली सुरक्षा योजना हो या परित्यक्ता महिला पेंशन योजना। इन सबका सीधा नुकसान बच्चों और महिलाओं को हो रहा है, पर भाजपा सरकार को इसकी कोई परवाह नहीं है।
भाजपा सरकार कांग्रेस सरकार द्वारा चलाई गईं इन जनहित की योजनाओं को अनौपचारिक रूप से बंद करने के रास्ते पर है। सत्ता में आते समय जिन योजनाओं को खुलेआम बंद करने की हिम्मत नहीं दिखाई, दुखद आश्चर्य है कि उन योजनाओं के लिए बजट घोषणा करने के बावजूद बजट खर्च क्यों नहीं किया जा रहा है। यह लापरवाही नहीं, बच्चों, बेटियों और महिलाओं के साथ धोखा है।