@ShrutiShaarma पाकिस्तान से पहलगांव आए तो उन्होंने धर्म पुछा _तब उन्हें आतंकवादी कहा गया
और जब अपने ही देश में एक ही धर्म के होकर
जाती पूछ कर सर टकला और महिला के मुत्र छिड़के जाते है , महिला के पैर को उसके नाक से रगड़वाते है , यह उससे बड़े भी आतंकवादी है , देश के अंदर के आतंकवाद है
#काशी_हिंदू_विश्वविद्यालय
सीटें खाली होने के वावजूद नही दिया जा रहा है नामांकन।
छात्र ने आरोप लगाया कि वह दलित है और सामान्य रैंक 2 लाया है, Main डिसिप्लिन की 03 सीटें खाली है इस छात्र को नामांकन से वंचित कर दिया गया है।
*डिस्ट्रैक्ट होना--- मतलब ध्यान भटकना*
वीडियो को देखिए फिर पोस्ट पढ़िए..
*#प्रोपेगेंडा, #माइंड_मैनिपुलेशन, डाइवर्जन_टैक्टिक्स* ये सब 'डिस्ट्रैक्शन' के ही नाम है।।
आज से कई दशक पहले केवल मल्टीनेशनल कंपनिया ही डिस्ट्रैक्शन मार्केटिंग का इस्तेमाल करती थी अपना उत्पाद बेचने के लिए..
और उसके लिए उनके पास एकमात्र टीवी ही माध्यम था जहां चैनल को पैसे देकर वो अपना डिस्ट्रैक्ट करने वाला एड देते थे।
_भारत की राजनीति में डिस्ट्रैक्शन मार्केटिंग का उदय तो 80 के दशक में हो गया था लेकिन इसका मास इस्तेमाल 2013-14 से शुरू हुआ जब हर हाथ मोबाइल और फ्री डाटा पहुंचा।।_
*फिर तो जैसे प्रोपेगेंडा या कहे कि माइंड मैनिपुलेशन की बाढ़ ही आ गई...*
_मोबाइल में मौजूद सोशल मीडिया और वाट्सअप ग्रुप सत्ता और पूंजी के कंट्रोल से डिस्ट्रैक्शन मार्केटिंग के वार रूम बन गए.._
*जिसका इस्तेमाल सत्ता हासिल करने के लिए किया गया।*
_उसके बाद तो टीवी न्यूज भी पूरी तरह से मल्टीनेशनल कंपनियों के हाथों में आ गए और न्यूज की जगह प्रोपेगेंडा ने ले ली.._
*राजनीति और कॉरपोरेट्स के गठजोड़ ने तकनीक का इस्तेमाल कर 140 करोड़ की आबादी में ज्यादातर का माइंड मैनिपुलेशन कर दिया...*
_आप सोच कर देखिए कि क्या आप वही देख और सोच नहीं रहे जो आपका फोन और टीवी आपसे करवा रहा है।_
कितने लोग है आपके शहर कस्बे या गांव में जो डिस्ट्रैक्ट होने से खुद को बचा पा रहे है?
*अंधभक्त होने का मतलब है कि उसका माइंड मैनिपुलेट किया जा चुका है।*
_हर इंसान भावनाओं (जज्बात) से चलता है, भावनाएं कमजोर और मजबूत हो सकती है.. सामान्यत भावनाएं कमजोर ही होती है, और डिस्ट्रैक्शन मार्केटिंग करने वाले उसी को पकड़ते है।_
*कितना खतरनाक है ये ह्यूमन राइट्स और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अंदाजा भी नहीं लगा सकते।*
_बात आज राजनीति या कोई पार्टी की बची नहीं है। तकनीक का इस्तेमाल तो अब हर कोई करेगा ही लोगों को डिस्ट्रैक्ट करने के लिए.. अब तो AI भी आ चुका है।_
तकनीक के इस दौर में अब आम जन खुद को डिस्ट्रैक्ट होने से कैसे बचाएगा ये सबसे बड़ा सवाल है।
*और इतनी समझ (की इस खेल को समझ सके) जब तक लोगों को नहीं आएगी तब तक ये देश इसकी सत्ता पॉवर सब पूंजीपति कॉरपोरेट्स के हाथों में ही खेलेगी।।*
अडानी को खुश करने के लिए सिंगरौली के किसानों की दुश्मन बनी मोहन सरकार 👇
अडानी की कंपनी के लिए किसानों से जमीनें छीन ली गई, ना उन्हें सही विस्थापन मिला ना अपनी जमीन का सही दाम! नौकरी का वादा भी पूरा नहीं किया और हक मांगने पर लाठियां बरसा दी गई!
#FarmersProtest