Osho Sanyasin! प्रेम प्रचारक,साधक! उपदेश को गंभीरता से ना ले अपितु उपदेश की गंभीरता को समझने का प्रयास करें। follow unfollow के झंझट से दूर #slapstickbaba#love
*जो बदला जा सके , उसे बदलिये.......*
*जो बदला ना जा सके, उसे स्वीकारिये......*
*जो स्वीकारा न जा सके, उससे दूर हो जाइये.....*
*लेकिन खुद को खुश रखिये.... क्योंकि वह भी एक बड़ी जिम्मेदारी है!*
लोग बुराई करें
और आप दुखी हो जाओ
लोग तारीफ करें
और आप सुखी हो जाओ,
मतलब...
आपके सुख-दुख का स्विच
लोगो के हाथ में है,
कोशिश करें यह
स्विच आपके हाथ में हो।
#ओशो
ज्ञान दूसरे का होता है,ध्यान अपना होता है।
ज्ञान पराए का होता है,ध्यान स्वयं का होता है।
अपने ज्ञान को ध्यान में बदल लो।
तो इसके पहले कि तुम्हारी अर्थी उठे,
तुम उसे जान लोगे जिसकी कोई अर्थी नहीं उठती है,और न कभी उठ सकती है।#ओशो
इस जगत् में सबसे ज्यादा अभागा व्यक्ति वही है
जो हो तो बीमार, लेकिन अपने को स्वस्थ मानता हो,
जो हो तो अज्ञानी लेकिन ज्ञानी मानता हो,
हो तो भोगी लेकिन त्यागी मानता हो,
क्योंकि जिसने अपने को अपने से विपरीत मान लिया उसके रूपान्तरण की सम्भावना ही समाप्त हो गई ।
#OshoDhara#OSHO
मैं प्रार्थना का यह अर्थ नहीं करता कि
तुम परमात्मा से कुछ कहो।
वह तो प्रार्थना का गलत अर्थ है।
प्रार्थना का ठीक अर्थ होता है:
तुम इतने मौन हो जाओ कि
परमात्मा कुछ कहे तो तुम सुन सको।
और उसी क्षण से तुम्हारे जीवन
में सार्थकता आ जाएगी--अपूर्व सार्थकता!
#OSHO#OshoDhara
एक बार तुम्हें यह खयाल में आ जाए कि मूलस्रोत ही अंतिम लक्ष्य है, प्रथम ही अंतिम है, बस उसी दिन से जीवन में एक धुन आ जाएगी। फिर जीवन में एक संगीत सुना जाएगा। भक्तों में वही मस्ती दिखायी पड़ती है। अगर भक्त में मस्ती न हो, तो भक्त ही नहीं
#Oshodhara#OSHO
प्रेमी मर जाते हैं, प्रेम नहीं मरता। तो प्रेमी तो रूप थे, प्रेम ही था जो रूपायित हुआ था। ज्ञानी-ज्ञाता खो जाता है, ज्ञान बचता है। प्रेमी-प्रेयसी खो जाती है, प्रेम बचता है। प्रेम ही अनेक-अनेक बार रूप लेता है प्रेमी के और प्रेयसी के, ज्ञाता के और ज्ञेय के।
#OshoDhara#OSHO
बंध क्या है ? अतृप्ति बंध है, क्योंकि अतृप्ति ही पुनर्जन्म का कारण है. अतृप्ति के कारण काम है, इसलिए काम बंध है. अतृप्ति के कारण क्रोध है, इसलिए क्रोध बंध है. अतृप्ति के कारण लोभ है, इसलिए लोभ बंध है. अतृप्ति के कारण ईर्ष्या,मोह है, इसलिए ईर्ष्या,मोह बंध है।।
@SiddharthAulia
प्रेम जलाएगा। प्रेम डुबाएगा। प्रेम मिटाएगा।
मिटो। डूबो। जलो। लेकिन प्रेम को मत छोड़
देना। प्रेम को निखारो। प्रेम में जो-जो अप्रेम जैसा है, उसे छोड़ो-और प्रेम को बचाओ।
तुम न भोगी बनो, न त्यागी।
दोनों का अतिक्रमण करो। व्यर्थ का
त्याग व सार्थक का भोग स्वतः हो जाता है।
#ओशो
यह वचन याद रखना-हंसो, खेलो और ध्यान करो। उदास चेहरा बनाकर,अकड़ कर,गुरु गंभीर होकर धार्मिक होकर मत बैठ जाना।इस तरह के मुर्दों से पृथ्वी भरी है।वैसे भी लोगउदास हैऔर तुम और उदासीन होकर बैठ गयेअबऔर उदासीयों को यह पृथ्वी नहीं सहसकती।अब पृथ्वी को नाचते हुए,गाते हुए ध्यानी चाहिए।
#OSHO
वे जो प्रेम का रहस्य जानते हैं वे जीवन का महानतम रहस्य जानते हैं। उनके लिए कोई दुख नही बुढ़ापा नहीं,मृत्यु नहीं। निश्चित शरीर बूढ़ा होगा शरीर मरेगा, लेकिन प्रेम यह सत्य तुम पर प्रगट करता है कि तुम शरीर नहीं हो। तुम शुद्ध चेतना हो, तुम्हारा कोई जन्म नहीं है, कोई मृत्यु नहीं है।