पब्लिक-पुलिस का आपसी समन्वय आमजन और पुलिस के मध्य सद्भावना और सहयोग को बढ़ाता है, इससे पुलिस पर और अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनने के लिए नैतिक दबाव बनता है आमजन को इस तरह की पहल करनी चाहिए।
#पब्लिक_पुलिस
पुलिस की खाकी वर्दी के नीचे छिपा दर्द:
जयपुर में 5 सालों में 34 आत्महत्याएँ
जब हम “पुलिस” शब्द सुनते हैं, तो अक्सर हमारे मन में एक सख्त, बेदर्द, डंडा लिए खड़ी तस्वीर उभरती है। लेकिन आज जयपुर की खबर ने उस तस्वीर को चीरकर रख दिया है।
विधानसभा में गृह विभाग की रिपोर्ट ने जो आँकड़ा सामने रखा है, वह दिल दहला देने वाला है — पिछले पाँच वर्षों में राजस्थान पुलिस के 34 जवानों ने अपनी जान खुद ले ली। कांस्टेबल से लेकर एएसआई तक। ये वो लोग हैं जो रात-दिन सड़कों पर ड्यूटी करते हैं, चोर-डकैतों से लड़ते हैं, आतंक के साए में खड़े रहते हैं और आम जनता की सुरक्षा की दीवार बनकर खड़े रहते हैं। लेकिन जब उनकी अपनी दीवार टूटती है, तो कोई उनके लिए दीवार नहीं बन पाता। क्यों?
रिपोर्ट साफ़ कहती है — जरूरत के समय छुट्टी न मिलना, पारिवारिक विवाद और मानसिक तनाव।
कल्पना कीजिए — कोई जवान अपनी बीमार माँ के पास जाना चाहता है, लेकिन “मैनपावर की कमी” का हवाला देकर उसे ड्यूटी पर रहने को कहा जाता है। कोई अपनी बेटी की शादी में शामिल होना चाहता है, लेकिन “ऑर्डर” आ जाता है। कोई रात भर ड्यूटी करके थका-हारा घर लौटता है, तो घर में भी कलह और आर्थिक तंगी का बोझ। नींद नहीं आती। शांति नहीं मिलती। और धीरे-धीरे वो जवान, जो दूसरों की सुरक्षा के लिए अपनी जान हथेली पर रखकर घूमता है, खुद अपनी जान से हार मान लेता है।
ये आंकड़े सिर्फ़ संख्या नहीं हैं। ये 34 परिवार हैं।
34 माताएं हैं जिनकी गोद सूनी हो गई।
34 पत्नियाँ है जिनका सुहाग उजड़ गया।
34 बच्चे हैं जो अब “पापा” कहकर किसी को पुकार नहीं सकेंगे।
पुलिस महकमा आज भी 24×7 काम करता है। त्योहार हो, छुट्टियां हो, बीमारी हो, शादी हो — जवान को ड्यूटी पर ही रहना है। मानसिक स्वास्थ्य की बात तो शायद ही कभी गंभीरता से की जाती हो। काउंसलिंग? बहुत दूर की बात। समय पर छुट्टी? लगभग असंभव। सम्मान और सुविधाएं? कागजों तक सीमित।
यह खबर सिर्फ़ जयपुर या राजस्थान की नहीं है।
ये पूरे देश की पुलिस व्यवस्था की चीख है। जब तक हम अपने उन जवानों को, जो हमें बचाते हैं, खुद बचाने की व्यवस्था नहीं करेंगे, तब तक ये सिलसिला जारी रहेगा।सरकार, पुलिस प्रशासन और हम सबको सोचना होगा —
क्या हम उसी खाकी वर्दी वाले को, जो हमारे लिए अपनी नींद और परिवार कुर्बान कर देता है, उसकी नींद और परिवार बचाने के लिए कुछ कर रहे हैं? जवान मर रहा है, और हम चुपचाप “ब्रेकिंग न्यूज़” कहकर अगली खबर पर चले जाते हैं।
इस चुप्पी को तोड़ने का वक्त आ गया है।
हर उस जवान के नाम,
जो ड्यूटी पर तो हमेशा तैयार रहता है,
लेकिन जब खुद की मदद की ज़रूरत पड़ती है,
तो अकेला छोड़ दिया जाता है।
उनकी खाकी वर्दी पर लगे खून के धब्बे अब सिर्फ़ आतंकियों के नहीं,
हमारी उदासीनता के भी हैं।
@jaipur_police@DCPNORTH_JAIPUR
राजस्थान पुलिस के कर्मचारियों को राहत मिलनी ही चाहिए, 20-22 घंटे की ड्यूटी मानवता के खिलाफ़ हैं।
8-8 घंटे के तीन रोस्टर बने और New Employmnet law के अनुसार अन्य कर्मचारियों की तरह छुट्टी और अन्य सुविधाएं मिले।
जरूरत पड़े भर्ती निकले, लाखों युवा बेरोजगार हैं।
रेड कारपेट देखकर जोधपुर ग्रामीण पुलिस श्रीमान SP साहिबा ने अपने कदम रोक लिए साइड से गई और चौकी को साइड में कर दिया जमीन पर खड़े होकर सलामी ली
अंग्रेजी व्यवस्था दूर तो होगी लेकिन थोड़ा वक्त लगेगा बदलाव में....
@PoliceRajasthan@JdprRuralPolice
#Dausa#महवा: पुलिस थाने में पुलिसकर्मियों द्वारा कल मनाई जाएगी होली
आमतौर पर धूलंडी के दूसरे दिन मनाई जाती पुलिस की होली, लेकिन उपखंड क्षेत्र में आज धूलंडी मनाने के चलते कल मनाएंगे पुलिसकर्मी होली, पुलिसकर्मी आज कानून व्यवस्था को लेकर निभा रहे अपना फर्ज
#RajasthanWithFirstIndia @DausaPolice
होली की हार्दिक शुभकामनाएं 🎉
राजस्थान सरकार ने होली पर पुलिस कर्मचारियों को दी खुशियों की सौगात
मेस भत्ता 2.50 ₹/डाइट बढ़ाया
पुलिस कार्मिक मेस भत्ता वृद्धि से खुश होकर झूम उठे
✍🏻 @Reetasingh29