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मत करो साहब मत करो,
काले अंग्रेजों की पोल मत खोलो, नहीं तो भूरे अंग्रेजों को बुरा लग जाएगा।
2000 रुपए IPS साहब ले रहे हैं तो चुपचाप दे दो,
आवाज उठाओगे तो सस्पेंशन, बर्खास्तगी, जेल नसीब होगी।
@Uppolice , देखिए ये आपके सिपाही आप लोगों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं,
सबक सिखाओ।
प्राइवेट हॉस्पिटलों में इलाज के नाम पर कैसे लूट मची है, इसका अंदाज़ा इस एक इंजेक्शन से लगाया जा सकता है।
एक मरीज को लगाया जाने वाला इंजेक्शन अंदर से देखा गया तो उस पर MRP करीब ₹1300 लिखी थी,
लेकिन उसी इंजेक्शन के ऊपर दूसरा बॉक्स चढ़ाकर ₹5100 तक वसूले जा रहे थे,
यानी मरीज की मजबूरी का फायदा उठाकर कई गुना ज्यादा पैसे लिए जा रहे हैं,
परिवार इलाज बचाने में लगा रहता है और दूसरी तरफ कुछ प्राइवेट अस्पताल बिल बढ़ाने में,
स्वास्थ्य सेवा के नाम पर चल रही ऐसी मनमानी पर सवाल उठना बेहद जरूरी है।
🚨 BRAKING NEWS :
25 रुपये में एक्सरे, 50 रुपये में अल्ट्रासाउंड” से नेताजी परेशान हैं।
कह रहे हैं—ख़ान सर पढ़ाएँ, इलाज क्यों करें?
असल दिक्कत सेवा से नहीं, सस्ते इलाज से है… क्योंकि जनता को राहत मिलेगी तो कुछ लोगों का कारोबार बंद होगा। 🔥
सब लोग कई दिन से AC के बारे में उल्टी सीधी पोस्ट कर रहे हैं , इसलिए मैने सालों के अनुभव से AC के बारे में ये पोस्ट लिख रहा हूं ,
क्योंकि मेरा स्पेशलाइजेशन RAC में हैं !
जब हम एसी खरीदने जाते हैं तो दुकानदार और टेक्नीशियन अक्सर हमें ऐसी बातों में उलझा देते हैं कि हमें समझ ही नहीं आता कि सही क्या है !
सबसे पहले तो ये समझ नहीं आता कि AC कितने Ton का लेना हैं , और दुकानदार कमाने के लिए गलत AC चिपका देता हैं !
लेकिन इसे आप इस आसान गणित से समझ सकते हैं:
सबसे पहले अपने कमरे का Volume निकालते हैं , जिसमें AC लगवाना है,
Volume = Lenght × Width × Hight
मान लेते हैं लंबाई 20 फीट , चौड़ाई 12 फीट और ऊंचाई 10 फीट हैं ,
तब Volume = 20×12×10= 2400 Cubic Feet
अब इससे BTU निकालेंगे , उसके लिए हमें Volume में 5 से गुणा करना पड़ेगा !
BTU= Volume × 5
इसलिए BTU = 2400×5
BTU = 12000
अब BTU से Ton में बदलना सीखेंगे ;
12000 BTU = 1 Ton होता हैं !
इसलिए Ton = BTU ÷ 12000
इसलिए हमारा Ton = 12000÷12000
यानि कि Ton = 1
इसलिए हमें इस लंबाई चौड़ाई के कमरे में 1 Ton का AC पर्याप्त होगा !
अगर इतना नहीं करना तो एक सामान्य तरीका भी है , अगर आपका कमरा 100 स्क्वायर फीट से कम का है तो 1 Ton,
अगर 100 से 150 स्क्वायर फीट के बीच में हैं तो 1.5 Ton ,
अगर 150 से 200 स्क्वायर फीट के बीच में हैं तो 2 Ton तक का AC लेना चाहिए !
लेकिन आपका रूम छत पर है डायरेक्ट सनलाइट आती हैं तो आधा टन बढ़ा कर भी ले सकते हैं !
सावधानियों की बात करें तो एसी लगवाते समय हमेशा ध्यान रखें कि आउटडोर यूनिट ऐसी जगह हो जहाँ हवा का वेंटिलेशन अच्छा हो !
अगर बाहर वाली मशीन ही गर्म हवा में घिरी रहेगी, तो वह कमरे को ठंडा करने में बहुत ज्यादा बिजली खाएगी !
पाइप की लंबाई जितनी हो सके कम रखें, क्योंकि पाइप जितना लंबा होगा, कूलिंग उतनी ही घटती जाएगी !
हमेशा कॉपर कॉइल वाला ही AC लें, क्योंकि एल्युमीनियम कॉइल सस्ते तो होते हैं लेकिन उनमें लीकेज की समस्या बहुत आती है और उन्हें रिपेयर करना नामुमकिन होता है !
टेक्नीशियन का सबसे बड़ा खेल होता है गैस लीकेज का !
जब भी आपका एसी कम कूलिंग करता है, टेक्नीशियन आकर सबसे पहले यही कहेगा कि गैस खत्म हो गई है ,
लेकिन एसी की गैस कभी खत्म नहीं होती जब तक कि कोई छेद न हो , वे अक्सर बिना लीकेज ठीक किए सिर्फ गैस भर देते हैं, जो कुछ दिन बाद फिर निकल जाती है !
हमेशा उनसे कहें कि पहले साबुन के झाग से लीकेज चेक कराएं और उसे वेल्डिंग करवाएं, तभी गैस डलवाए !
एक और तरीका है कैपेसिटर या सेंसर खराब बताना ,कई बार सिर्फ गंदगी की वजह से मशीन ट्रिप करती है,
लेकिन टेक्नीशियन पार्ट्स बदलने के नाम पर ₹1000-₹2000 का चूना लगा देते हैं !
सर्विसिंग के समय ध्यान दें कि वे सिर्फ ऊपर से पानी न छिड़कें, बल्कि इंडोर यूनिट की जालियों और फिन्स को अच्छे से जेट पंप से साफ करें !
कई बार वे जानबूझकर पाइप को गलत मोड़ देते हैं ताकि बाद में दिक्कत आए और आप उन्हें फिर बुलाएं !
हमेशा कंपनी के ऑथराइज्ड टेक्नीशियन से ही काम कराएं और पुराने निकले हुए पार्ट्स को कभी भी टेक्नीशियन को न ले जाने दें !
जब नया AC इंस्टॉल करवाए तो ध्यान दे कि Gas डालने से पहले कम से कम आधा घंटा तक कंप्रेशर को वैक्यूम किया जाए ,
क्योंकि टेक्नीशियन जल्दबाजी के चक्कर में नहीं करते हैं , इसलिए कूलिंग की समस्या आ जाती हैं !
अगर आप इन बारीकियों को समझेंगे, तो कोई भी मैकेनिक आपको बेवकूफ नहीं बना पाएगा !
केदारनाथ यात्रा के पहले ही दिन जो हुआ वो नहीं होना चाहिए था, गुजरात से आए श्रद्धालु दिलीप भाई माली की हार्ट अटैक से मौत हो गई। बेटा हेमंत माली डीएम रुद्रप्रयाग विशाल मिश्रा से पिता की डेडबॉडी ले जाने के लिए हेली सर्विस की गुहार लगाता रहा, लेकिन डीएम ने DGCA की NOC नहीं होने का हवाला दिया और ख़ुद हेलीकॉप्टर में बैठकर निकल गए।
डीएम रुद्रप्रयाग का ये रवैया बेहद गैरजिम्मेदाराना था और अमानवीय भी। सुबह हेलीपैड पर आई डेडबॉडी को दोपहर 12.30 बजे हेली नसीब हुआ। यदि DGCA की NOC नहीं थी तो डीएम अपनी टीम के साथ हेलीकॉप्टर से कैसे उड़े। क्या सरकार ने अधिकारियों और नागरिकों के लिए अलग अलग नियम बनाए है ?
@pmo@pushkardhami@RamMNK@AmitShah
थाने में वीडियो-फोटो बनाना अपराध नहीं, नागरिक का अधिकार है: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट में एक सुनवाई के दौरान न्याय की वह तस्वीर उभरी, जो पूरे देश में पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों की मिसाल बन गई है।
माननीय जस्टिस निरजर एस. देसाई की अदालत में जब पुलिस पक्ष की महिला अधिवक्ता ने तर्क दिया कि थाने के अंदर आम नागरिक वीडियो रिकॉर्डिंग या फोटोग्राफी नहीं कर सकते, तो न्यायाधीश ने सख्त स्वर में पूछा – “बताइए, किस कानून की धारा के तहत वीडियोग्राफी प्रतिबंधित है?”
यह सवाल केवल एक वकील से नहीं, बल्कि पूरे पुलिस तंत्र से था। मामला हिरासत में यातना से जुड़ा था। पुलिस ने अपने बचाव में कहा कि शिकायतकर्ता लोग घटना की वीडियो बना रहे थे। जस्टिस देसाई ने इस दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए तीखे सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि अगर पुलिस अपना कानूनी काम कर रही है तो वीडियो से उसे क्या आपत्ति हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के 80 प्रतिशत CCTV कैमरे काम नहीं कर रहे हैं, फिर नागरिकों को रिकॉर्डिंग करने से कैसे रोका जा सकता है।
जब सरकारी वकील ने बार-बार CCTV का हवाला दिया, तो कोर्ट ने साफ कहा कि यह तर्क तभी दिया जा सकता है जब 100 प्रतिशत CCTV कार्यरत हों। लेकिन हकीकत यह है कि 80 प्रतिशत कैमरे खराब पड़े हैं।
भरी अदालत में न्यायाधीश ने स्पष्ट घोषणा की कि थाने में वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी करना कोई अपराध नहीं है। कोई भी पुलिसकर्मी या सरकारी कर्मचारी आम नागरिक को सबूत के रूप में वीडियो बनाने या फोटो खींचने से नहीं रोक सकता। थाना सार्वजनिक स्थान है।
यह बयान न केवल उस मामले में निर्णायक साबित हुआ, बल्कि पूरे देश के लिए एक मजबूत संदेश बन गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस क्लिप को देखकर लाखों नागरिकों ने न्यायाधीश की तार्किक और साहसिक बहस की सराहना की।
यह फैसला इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पुलिस जवाबदेही मजबूत होगी और हिरासत में मारपीट या दुरुपयोग के खिलाफ ठोस सबूत आसानी से तैयार किए जा सकेंगे। साथ ही नागरिकों के अधिकारों को भी मजबूती मिली है। थाना किसी प्रतिबंधित स्थान की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए Official Secrets Act भी यहां लागू नहीं होता।
थाने या किसी सरकारी कार्यालय में शांतिपूर्वक, बिना ड्यूटी में बाधा डाले रिकॉर्डिंग करना कानूनी है। लेकिन हमेशा सावधानी बरतें – शांत रहें, आक्रामक न हों और यदि जरूरी हो तो दूसरे व्यक्ति की मदद लें।
यह सुनवाई सिर्फ एक मुकदमे की नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सशक्तिकरण की बड़ी जीत है। जस्टिस निरजर एस. देसाई ने एक बार फिर साबित किया कि अदालत आम आदमी की आवाज और संवैधानिक मूल्यों की रक्षक है।
जागरूक रहिए। सजग रहिए। जब हर नागरिक अपने अधिकारों को जानता और इस्तेमाल करता है, तभी लोकतंत्र सही मायने में मजबूत होता है।
~ साभार: @NCIBHQ
करदाताओं के पैसे से सरकार जब तक 02 करोड़ घर बनाकर मुफ्त में बांटती है तब तक 10 करोड़ बेघर पैदा हो जाते हैं।
‘हम दो-हमारे दो’ नहीं तो ‘हम दो-हमारे तीन’ सही लेकिन चौथा बच्चा पैदा करने वालों की नागरिकता खत्म करने और 10 वर्ष की सजा देने के लिए कानून बनाना अतिआवश्यक है @narendramodi
@khuchrep Iske alawa inke dawar bill ke naam par matr ek slip thma di jati hai
इसके अलावा बुक सेलर द्वारा बिल के नाम पर मात्र एक स्लिप पकड़ा दी जाती हैं।
~एक समय था जब हमें सरकारी स्कूल में किताबे मिलती थी।
~उस दिन की खुशी, वो नई किताबें, उनमें कवर चढ़ाना,
~आजकल तो ये सिर्फ धंधा बन चुका है,
~ऐसा क्या प्रिंट होता है इनमें जो किताबें 500 रुपए की होती हैं?
~सरकार इन पर लगाम क्यों नहीं लगाती हैं?
विदेश में जाकर नौकरी करने वाले सभी लोगों से एफिडेविट तो लिया ही जाए, भारत में रह कर अच्छा जीवन यापन कर रहे नवयुवकों पर भी यह कानून लागू होना चाहिए कि वह हर महीने अपनी आय का एक निश्चित हिस्सा अपने मां-बाप को भी सामान्य जीवन यापन करने के लिए दें।