"समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध,
जो तटस्थ है, समय लिखेगा उनके भी अपराध"
जंतर मंतर प्रोटेस्ट में हमारे बच्चों का ख़ून बह रहा है। जिस देश में सिंहासन पर अनपढ़ बैठे हों वहाँ शिक्षा व्यवस्था पर प्रश्न उठाने वालों के हालात इससे बेहतर तो हो ही नहीं सकते! हम तो बस चुप रहेंगे।
संगीता मिश्र की होली की कविताएं- 'सब नाच रहे मदमस्त हैं, महका-महका फागुन होली में' - happy holi 2024 sangeeta mishra poetry on holi ke geet and songs – News18 हिंदी https://t.co/wm0byBduvP