Congratulations to the Indian Women’s Cricket Team on a remarkable performance today. The skill, the composure, the way they played for each other, that’s what made it special to watch.
And to every young girl across India who tuned in, what you saw today is what’s possible when you trust your team and back yourself. Keep going, champions, we’re all rooting for you in the matches ahead.
यूपी की राजधानी लखनऊ के पड़ोसी ज़िला हरदोई में एक सरकारी अधिकारी शाहाबाद के एसडीएम श्री सुशील मिश्रा पर सरकारी निरीक्षण के दौरान दबंगों द्वारा ईंट व पत्थर आदि से किया गया जानलेवा हमला तथा उसमें उनके घायल होकर इलाज के लिये अस्पताल में भर्ती होने की ख़बर है, जो दुर्भाग्यपूर्ण ही नहीं बल्कि अति-चिन्ताजनक भी है। ऐसी घटनाओं की रोकथाम ज़रूरी है ताकि सरकारी कार्यों में कथित भ्रष्टाचार के साथ-साथ प्रदेश को अराजक तत्वों से बचाया जा सके। सरकार व्यापक जनहित के मद्देनज़र, इस ओर ज़रूर समुचित ध्यान दे।
ममता बनर्जी की केवल एक हार से उनकी पार्टी का बंटाधार हो गया है। सीधा कुल 28 सांसदों में से 20 सांसदों ने अलग दल बनाकर मान्यता के लिए लोकसभा अध्यक्ष को अर्जी दी है। बाकी 1 या 2 को छोड़कर अन्य भी लाइन में है। इसके साथ ही 20 सांसदों ने एनडीए में शामिल होने की घोषणा कर दी है।
इससे नरेंद्र मोदी सरकार पर;
1.चंद्रबाबू नायडू का प्रेशर खत्म हुआ।
2.नीतीश कुमार का जो बचा खुचा प्रेशर था वो भी खत्म।
वर्ष 2024 के चुनाव में मेंने एक लेख लिखा था जो फेसबुक ही नही बल्कि ट्विट्टर व्हाट्सएप्प पर काफी ज्यादा वायरल हुआ था, जिसमे मेने बताया था कि सपा मुस्लिम को आश्वासन दे रही है कि बस एक दो साल में सरकार गिर जाएगी, फिर हम बना लेंगे, जबकिं नरेंद्र मोदी सरकार पूरे पाँच साल चलेगी। क्यों चलेगी। पूरा ब्यौरा दिया था। जिसमे ममता व केजरीवाल के सांसदों का भी जिक्र था। नरेंद्र मोदी के स्वतंत्र रूप से जो 32 कम सांसद है। उनकी पूर्ति आराम से कर लेंगे और धीरे धीरे कर भी ली। इस पूर्ति से;
1.ममता बनर्जी की पार्टी के 20 सासंद पूरे कर रहे है।
2.केजरीवाल की पार्टी के सांसद राज्यसभा में पूर्ति कर रहे है।
दोनो ही पार्टियो को;
"बंगाल व नई दिल्ली में मुस्लिम ने 90% से ऊपर वोट दिया"
अब इस वोट का मजा भाजपा लेगी। इनडायरेक्ट ही सही लेकिन लेगी।
अब;
1.ममता बनर्जी की एक हार से पार्टी खत्म होने के कगार पर कुछ समय बाद दिखेगी।
2.केजरीवाल की पार्टी भी एक तरह से नई दिल्ली में खत्म है। जिस दिन आप पार्टी में भागवत मान ने अलग गुट बना दिया, पंजाब में भी खत्म हो जाएगी।
अब हम इस स्तिथी में बसपा की तरफ ध्यान लाते है।
बहनजी 2012 से लगातार हार रही है। हर चुनाव हार रही है। 1 शीट तक पर आ गयी। लोकसभा में शून्य हो गई। लेकिन;
"पार्टी अभी भी मजबूती के साथ खड़ी है। नींव मजबूत है। टूटने की नौबत कभी नही आई। एक बार भी 2012 के बाद किसी ने बसपा के टूटने की आवाज तक नही सुनी"
कारण?
"बहनजी की योग्यता। कुशलता। अनुभव। व जब देखा कि इस समय हालात पक्ष में नही है। चुप रहो। लेकिन अपना कैडर, नींव बचाकर रखो"
इसलिए;.."
"चुनाव कोई से भी हो। डर बसपा का रहता है क्योंकि पता है कि हाथी कभी भी उठकर जंगल में तहस नहस मचा सकता है"
जबकिं;
"ममता बनर्जी व केजरीवाल को उधोगपतियों ने भर भरकर बॉन्ड के माध्यम से पैसा दिया। इतना दिया कि बसपा के चुनाव खर्च से कई गुणा ज्यादा ममता व केजरीवाल को मिला। फिर भी एक हार से ही दोनो का अस्तित्व संकट में आ गया"
जबकिं हम 5 से 6 चुनाव 2012 के बाद हार चुके है। हर हार के बाद भी अस्तित्व बरकरार रखा। आप राजनीति को जितना आसान समझते है, उससे कई गुणा ज्यादा टेढ़ी है। आजकल के नौशिखिया एससी युवा जो अभी अभी निक्कर से पेंट में आये है, वो सोचते है कि कुर्ता पजामा पहना बाहर निकले, भारत की जनता उनके सत्कार के लिए खड़ी है। सन्गठन चलाना कोई आसान काम नही है और उसमे भी अस्तित्व बचाकर रखना।
समझे?
विकास कुमार जाटव
इसपर नजर रखना। यह "जय भीम" कहकर आपका मूर्ख बना सकता है। क्योंकि इसका उदय किसी विचार से नही बल्कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के युवाओ पर टिपण्णी से हुआ है।
भाजपा को केंद्र में लाने का श्रेय अन्ना हजारे के आंदोलन को जाता है जिससे केवल नेता निकले, जँहा एससी/एसटी कोई विषय नही रखते थे। अन्ना हजारे का सबसे बड़ा नुकसान बहुजन मूवमेंट को हुआ था। जिसे एससी भांप नही सके।।जैसे;
1.नरेंद्र मोदी की सरकार इसी आंदोलन के कारण बनी।
2.जिसका नुकसान एससी पार्टियो को हुआ। बसपा का नई दिल्ली में वोट 14% से 1% से कम पर आ गया जबकि नई दिल्ली में 20% एससी है। अकेले जाटव नई दिल्ली में 8% है। यह वोटर्स कँहा गया? केजरीवाल के पास। केजरीवाल ने एससी का सबसे बड़ा नुकसान किया।
कोंग्रेस तक ने अपने पैनल को इस पर नजर रखने के लिए कहा है क्योंकि उसे भी पता है कि यह केजरीवाल इन पार्टी की कोई नई मुहिम है जिससे हाशिये पर पहुच सके अपने सँगठन के प्रति सहानुभूति मोड़ सके।
यह किसी अन्य की कठपुतलिया है, व विशेष तौर से यह बन्दा केजरीवाल एंड कम्पनी की छत्रछाया में काफी दिन रहा है। जिनका रिकॉर्ड एससी विरोधी रहा है जैसे राज्यसभा में एक भी एससी को नही भेजना।।
इसलिए पैनी नजर रखिए।
विकास कुमार जाटव
देश में न्यायप्रिय, धर्मनिर्पेक्ष एवं लोक कल्याणकारी महान शासक के रूप में प्रसिद्ध अहिल्याबाई होलकर जी की जयन्ती पर शत्-शत् नमन एवं अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित।
भारतीय इतिहास की महान शासक अहिल्याबाई होलकर जी ने अपने आदर्शों, सेवा-भाव और जनहितकारी कार्यों से समाज को नई दिशा प्रदान की। उनका जीवन नारी शक्ति, सुशासन, सामाजिक समरसता एवं जनसेवा का प्रेरणा स्त्रोत है। आज उनकी जयन्ती के पावन अवसर पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि एवं उनके अनुयायियों को शुभकामनाए।
जैसाकि सर्वविदित है कि अपने भारत देश की दुनिया भर में अच्छी एवं अनोखी मानवतावादी पहचान ख़ासकर परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के अनूपम संविधान को लेकर ज़्यादा है, जो पूरी तरह से धर्मनिरपेक्षता (सेक्युलरिज़्म) के सिद्धान्त पर आधारित है अर्थात् यहाँ रहने वाले विभिन्न धर्मों के मानने वाले सभी लोगों को एक-समान आदर-सम्मान देना है तथा देश का मिज़ाज भी अधिकतर ऐसे ही उच्च मानवीय गुणों पर आधारित सभी धर्मों के मानने वालों को उनके जान, माल व मज़हब की आज़ादी एवं सुरक्षा आदि सुनिश्चित करता है और इसके निर्धारित व बताये हुये रास्तों पर चलना सभी सरकारों की ही नहीं बल्कि सभी नागरिकों की भी परम व प्रमुख ज़िम्मेदारी है।
इतना ही नहीं बल्कि यह भी सर्वविदित ही है कि यही वह सुरक्षा कवच है जिसके सहारे विदेशों में भारत-विरोधी प्रोपागण्डा आदि का देश हमेशा बख़ूबी सामना करता है, किन्तु केन्द्र व सभी राज्य सरकारों का यह दायित्व/ज़िम्मेदारी बनती है कि वे ऐसा कुछ भी ना करें और ना ही वैसे कुछ होने दें जिससे देश व ख़ासकर भारत सरकार से इसके बारे अप्रिय सवाल-जवाब हो।
इस क्रम में ख़ासकर पश्चिम बंगाल में चुनाव उपरान्त जारी हिंसा की सर्वत्र हो रही चर्चाओं में भी विशेषकर मा. हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद सरकारों को इसके प्रति सतर्क व अराजकता के विरुद्ध सख़्त हो जाना चाहिये, ताकि किसी भी सरकार के ऊपर संकीर्ण राजनीति, धार्मिक भेदभाव, जातीय द्वेष व पक्षपात आदि का दोष लगे, यह अति-चिन्ता की बात ज़रूर होनी चाहिये।
इसके साथ ही, व्यापक जनहित व जनसुरक्षा के मद्देनज़र स्थापित नियम-क़ानूनों के अनुपालन या तत्सम्बंधी नये क़ानून आदि बनता है तो उसका अनुपालन सभी धर्मों के लोगों पर एक समान रूप में होना चाहिये अर्थात् संविधान व क़ाूनन की मान-मर्यादाओं को बरकरार रखने के लिये ज़रूरी है कि क़ानूनों का इस्तेमाल धार्मिक व जातीय भेदभाव/पक्षपात व द्वेष के बिना हो, ताकि सरकारें सर्वसमाज व सर्वधर्म हितैषी हों और लोगों को लगे भी तथा जिससे सरकारों की संवैधानिक गुडविल प्रभावित ना हो तो यह उचित होगा।
वैसे भी देश के ख़ासकर सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक हालात इतने कठिन व ज्वलन्त समस्यायें इतने अधिक दुखद/कष्टदायी हो गये हैं कि सभी सरकारों को उन विशेष मुद्दों पर अपना ध्यान पूरी तरह से केन्द्रित करना चाहिये, ना कि विध्वंसकारी इमेज आदि के माध्यम से लोेगों का ध्यान उस पर से बाँटने का प्रयास करना चाहिये, क्योंकि इससे देश की राष्ट्रीय समस्याओं का समाधान नहीं होगा बल्कि क्राइसिस के हालात को और बढ़ायेेगा, जो देश व जनहितैषी कतई भी नहीं होगा, यही अपील।
अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में ज़बरदस्त आंधी-तूफान से हुई जान-माल की भारी तबाही से प्रभावित लोगों/परिवारों की मदद के लिए राज्य सरकार को अपनी पूरी उदारता बरतते हुये हर प्रकार से उनके सहयोग के लिये आगे आना चाहिये ताकि वे लोग अपने उजड़े/बिखरे हुये पारिवारिक जीवन को समेट कर दोबारा से अपनी ज़िन्दगी शुरू कर सकें।
इसके साथ ही, ख़ासकर पेट्रोलियम पदार्थों आदि, इन आवश्यक वस्तुओं के मूल्य में अनवरत वृद्धि को जारी रखते हुये केन्द्र सरकार द्वारा पेट्रोल व डीज़ल आदि की क़ीमत में तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि करोड़ों ग़रीबों व मेहनतकश परिवारों, खेती-किसानी आदि के साथ-साथ मिडिल क्लास के जीवन को भी बुरी तरह से प्रभावित करेगा, अर्थात् इस महंगाई का सीधा असर इन सबके परिवार के पालन-पोषण पर पड़ेगा।
इसीलिये सरकार को महंगाई व जीवन दुष्कर करने वाली इस प्रकार की नियमित वृद्धि को कम करने के लिए ज़रूरी सार्थक क़दम उठाने चाहिये, यही समय की माँग है।
3. जबकि जग-जाहिर तौर पर तिलक, तराजू आदि की बात बीएसपी ने कभी नहीं कही और ना ही बाबरी मस्जिद के स्थान पर कभी शौचालय बनाने की भी बात कही है। ये सब घृणित आरोप विरोधियों नेे केवल बीएसपी को नुकसान पहुँचाने के लिए इन्हें जबरन हमारी पार्टी से जोड़ दिया है, जो अति-निन्दनीय। 3/4
माननीय प्रधानमंत्री जी की हालिया अपील ऐसे समय आई है जब देश की अर्थव्यवस्था पहले से ही दबाव में है। पिछले तीन महीनों में हमारा विदेशी मुद्रा भंडार लगभग $38 अरब घटकर मात्र $690 अरब रह गया है। रुपया डॉलर के मुक़ाबले ₹95 पार कर चुका है, और व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है। ये केवल आँकड़े नहीं हैं, ये करोड़ों परिवारों की रोज़मर्रा की चिंता हैं।
मैं मानता हूँ कि मौजूदा हालात में अर्थव्यवस्था चलाना आसान काम नहीं है, और दुनिया भी एक कठिन दौर से गुज़र रही है।
ऐसे समय में सरकार का ध्यान मांग बढ़ाने पर होना चाहिए, मांग घटाने पर नहीं। दुनिया का आर्थिक इतिहास हमें एक सीधी बात सिखाता है कि जब आर्थिक गति धीमी हो, तब लोगों से कम खर्च करने को कहना समाधान नहीं होता, समाधान यह है कि टैक्स में राहत देकर, छोटे व्यापारियों को सहारा देकर, मध्यम वर्ग पर बोझ कम कर आम परिवारों के हाथ में थोड़ा ज़्यादा पैसा छोड़ा जाए।
मुझे दुख इस बात का है कि हर बार किफ़ायत की ज़िम्मेदारी उसी ईमानदार करदाता पर आ जाती है जिसने कोविड के समय भी सबसे ज़्यादा सहा। उसने उस वक़्त भी पूरे भरोसे से अपनी भूमिका निभाई थी, तब भी उसके लिए राहत सीमित थी, और आज फिर उसी को बलि का बकरा बनाया जा रहा है और वो भी बिना ये बताए कि सरकार अपनी ओर से उसके लिए क्या करने जा रही है।
केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को रेवडियां बांटने वाली नीतियों पर तुरंत रोक लगानी होगी ताकि सरकारी खजाने पर बोझ कम हो सके। अगर सरकारें fiscal dicipline और productive capital creation पर ध्यान नहीं देंगी, तो थोड़े समय का राजनीतिक लाभ देश को लंबी आर्थिक कीमत चुकाने पर मजबूर करेगा।
देश को अपील नहीं, एक स्पष्ट रास्ता चाहिए। लोग जानना चाहते हैं विकास कैसे लौटेगा, नौकरियाँ कैसे बढ़ेंगी, और किसानों, छोटे व्यापारियों व मध्यम वर्ग को असली राहत कब मिलेगी।
सिर्फ़ नागरिकों से त्याग माँगना शासन नहीं होता। जवाबदेही, दूरदृष्टि और आर्थिक संतुलन यही असली राष्ट्रहित है।
NEET-UG 2026 का रद्द होना सिर्फ एक परीक्षा का रद्द होना नहीं है, यह उन लाखों परिवारों के भरोसे की बात है, जिन्होंने अपने बच्चों के लिए सपने देखे, मेहनत से पढ़ाया और यह माना कि अगर बच्चा ईमानदारी से पढ़ेगा, तो व्यवस्था भी उसके साथ ईमानदारी से पेश आएगी।
मैं जानता हूँ कि देश भर में एक साथ परीक्षा कराना आसान काम नहीं है। लेकिन हमारे युवाओं को इतना अधिकार तो है कि उनकी मेहनत का सम्मान हो, और उनका भविष्य किसी की लापरवाही की भेंट न चढ़े।
जब पेपर लीक एक के बाद एक दोहराए जाएँ, और छात्र सड़कों पर न्याय माँगने को मजबूर हों तो यह सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं रह जाती, यह हमारे साझा भरोसे की चूक बन जाती है।
हमारे परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा हथियार बताया था। उस हथियार को कमजोर करने वालों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
सरकार और एजेंसियों को जवाब देना होगा कि आखिर हर बार युवाओं का भविष्य ही क्यों दांव पर लगाया जाता है?
देश के सभी छात्रों के साथ हमारी पूरी संवेदना और एकजुटता है। न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना अब सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है।
#NEET
वीरांगना फूलन देवी को राजनीति में मान्यवर श्री कांशीराम जी लेकर आए थे. बाद में वे समाजवादी पार्टी में शामिल हो गईं और सांसद बनीं. लेकिन जैसे ही समाजवादी पार्टी से उनका मोह भंग हुआ और उन्होंने अपनी खुद की पार्टी बनाई तो उसके 28 दिन बाद उनकी हत्या हो गई. उनकी हत्या में किसकी साजिश थी? और किससे किसकी मिलीभगत थी? जनता जनार्दन इसे भली भाँति जानती है.
हाजी सरफराज जी का बीएसपी में वापसी हुआ अब कद्दावर नेता कहने वाले कहाँ गायब हो गये.. अब शोर नहीं करेंगे कि बीएसपी के कद्दावर नेता हाजी जी की वापसी हो गई...या जब बाहर हुये थे तभी करना था?
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