अगर यहां भी कॉलेजियम सिस्टम होता तो भागीरथ मीणा के 5 बच्चे नहीं बल्कि भागीरथ मिश्रा की 5वीं पीढ़ी सिफारिश से जज की शपथ ले रही होती।
शुक्र है कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की तरह निचले न्यायालय में कॉलेजियम सिस्टम नहीं है जहां हर जाति वर्ग के लोग परीक्षा पास कर काबिलियत से जज बन सकते हैं।
केंद्र की ग्रुप A की नौकरियों में 74.48% पदों पर तुम्हारे काका बाबा ही काबिज है।
कोलेजियम प्रणाली से तुम्हारे एक ही परिवार की 5-5 पीढ़ी जज बनकर बैठी हैं।
फ़िर भी अगर टूटर पे डॉलर ठीक नहीं मिल रहे तो बता दीजिएगा, SC ST OBC वाले तुम्हारे जैसो को भूखा नहीं मरने देंगे। 🙋
4 फरवरी 2026 की एक अधिसूचना से पता चला है विधानसभा से हाईकोर्ट व सचिवालय आते हैं तो बीच में यानी विधानसभा के सामने एक सर्किल आता है उस सर्किल का नाम संविधान निर्माता डॉ भीमराव अम्बेडकर जी के नाम से जाना जाता है परंतु हाल ही में इस सर्किल का नाम बदल कर लो पोलो सर्किल कर दिया जो शोभा तक नहीं देता।
डॉ भीमराव अंबेडकर सर्किल का नाम पोलो सर्किल रखा गया है जिससे लाखों करोड़ों लोगों की भावना को ठेस पहुंची है।
सरकार @BhajanlalBjp@RajCMO से आग्रह है पोलो ओलों सर्किल नाम रखने का कोई औचित्य नहीं है अतः नाम बदलकर डॉ भीमराव अम्बेडकर जी के नाम से ही रखा जाएं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरुद्ध अब ज़मीन पर बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू हो गये हैं 👇
मैं नहीं जानता यह #UGCAct लागू होगा या नहीं, पर एक बात तो यह है कि यह बिल एससी, एसटी व ओबीसी समाज को एकजुट करने में मील का पत्थर होगा
#We_support_UGC_Act
सुप्रीम कोर्ट द्वारा #UGC के नए प्रावधान पर रोक लगाए जाने के विरोध में गोरखपुर विश्वविद्यालय में ज़ोरदार प्रदर्शन शुरू हो गया है।
विश्वविद्यालय परिसर में बड़ी संख्या में SC, ST और OBC समाज से जुड़े छात्र सड़कों पर उतर आए हैं और अपने अधिकारों की आवाज़ बुलंद कर रहे हैं।
यह आंदोलन केवल एक फ़ैसले के विरोध का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है।