दीवार ओ दर में सिमटा इक लम्स काँपता है
भूले से कोई दस्तक दे कर चला गया है
सब्र ओ शकेब बाक़ी ताब ओ तवाँ सलामत
दिल मिस्ल-ए-ऊद जल जल ख़ुशबू बिखेरता है
हम ख़ाक हो चुके थे अपनी ही हिद्दतों में
मिट्टी है राख फिर से पैकर नया बना है
इक ज़ख़्म ज़ख़्म चेहरा टुकड़ों में हाथ आया
और हम समझ रहे थे आईना जुड़ गया है
सहरा-ए-नीम-शम में बे-आस रेतों पर
दिन भर के किश्त ओ ख़ूँ का मारा तड़प रहा है
दहश्त-ज़दा ज़मीं पर वहशत भरे मकाँ ये
इस शहर-ए-बे-अमाँ का आख़िर कोई ख़ुदा है
मिल जाए आबलों को दाद-ए-मुसाफ़िरत अब
अब दर्द-ए-बे-नवाई कुछ हद से भी सिवा है
हम पर तो खुल चुका भी दर बंद हर बला का
क्या जानिए अजल को अब इंतिज़ार क्या है
गुल-चीनियों का हम से ‘बिल्क़ीस’ हाल पूछो
अंगुश्त-ए-आरज़ू में काँटा उतर गया है
ज़फ़ीर-उल-हसन बिलक़ीस
Mama,
I last saw you and Papa together more than 35 years ago. Since the day Papa left, I have watched you face everything life threw at you with never-ending courage and dignity. Only Priyanka and I really know what you have been through, and how difficult your life after Papa truly was.
I am happy, and so proud, that your story - “Belonging: A Journey of Love” - will finally be read by the millions of people who love you. I know how hard it was for someone as private as you to tell the world your beautiful story.
Today, on his birthday, I can see Papa smiling and looking down proudly at his beautiful Sonia.
Love,
Rahul
अंकिता भंडारी के परिवार से 2 दिन पहले मिला। चार साल बीत चुके हैं, लेकिन आज भी वो न्याय का इंतज़ार कर रहे हैं - अपनी बच्ची के ख़िलाफ़ एक ऐसे अपराध के लिए जिसकी कोई माफी नहीं।
सिर्फ 19 साल की अंकिता वनंतरा रिज़ॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थीं जहां एक "VIP" मेहमान की शर्मनाक मांग का विरोध करने पर चीला नहर में डुबो कर उनकी हत्या कर दी गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने हिंसा और डुबोने के सबूतों की पुष्टि भी की।
मगर, रिज़ॉर्ट में अंकिता के रूम को किसी भी तरह की जांच होने से पहले ध्वस्त कर दिया गया जो खुद में संदेहपूर्ण है।
इस दुखद मामले में सबसे शर्मनाक बात है कि राज्य सरकार खुद आज तक उस "VIP" को संरक्षण दे रही है। क्यों? क्योंकि वह BJP-RSS का बड़ा नेता है।
यही BJP की विकृत मानसिकता है बलात्कारियों और अपराधियों को बचाना, उनका राजनीतिक संरक्षण करना, यहां तक कि बलात्कार के दोषियों का फूल-मालाओं से स्वागत करना। दुनिया में सबसे घिनौने इंसान वो होते हैं जो बलात्कारियों की रक्षा करते हैं और BJP में ऐसे लोगों की भरमार है।
भारत तब तक आगे नहीं बढ़ सकता, जब तक महिलाओं को पुरुषों के इस्तेमाल की वस्तु समझने वाली यह अमानवीय मानसिकता खत्म नहीं होती। भारत तभी आगे बढ़ेगा, जब भारत की महिलाएं आगे बढ़ेंगी - सम्मान, सुरक्षा, समानता और न्याय के साथ।
हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खरगे जी की सभा के बाद मंच का “शुद्धिकरण” सिर्फ़ एक व्यक्ति का अपमान नहीं - यह उस संविधान का अपमान है जिसने छुआछूत को अपराध घोषित किया।
और यह कोई इकलौती घटना नहीं है। यह BJP-RSS की सालों से पाली-पोसी मनुवादी सोच का नतीजा है - वो घिनौनी सोच जो आज भी इंसान का दर्जा उसके जन्म से तय करती है, समानता और मानवता से नहीं।
किसी के निर्देश पर चलना नहीं स्वीकार मुझको
नहीं है पद चिह्न का आधार भी दरकार मुझको
ले निराला मार्ग उस पर सींच जल कांटे उगाता
और उनको रौंदता हर कदम मैं आगे बढ़ाता
शूल से है प्यार मुझको, फूल पर कैसे चलूं मैं?
हरिशंकर परसाई
#पुण्यतिथि
इसी स्याही से हम इंक़लाब लिख देंगे..
झारखंड के छात्र अभी भी साथ मिलकर लड़ रहे हैं एक बेहतर कल लिखने के लिए
जो लोग कभी छात्रों के मुद्दे और जीवन के बारे में जाने की कोशिश नहीं कर पाए उनको स्याही का काम कैसे पता होगा
Ek chiz gandhi family se Jo shike h aap jitna jinka accha karoge utna vo apke virodhi rahenge Jo sabse zyada use krnge vha ye khus psychology yhi definition h
जब लोग पूछते हैं कि आप क्यों शिक्षक होने पर ऐसा गुमान करते हैं ? तो नेहा @neha_aisa की इस तक़रीर को सुनिए. हमें शिक्षक होने पर गुमान होता है क्यों ये प्रोफेशन हमने मौका देता है कि हम इस देश समाज को नेहा जैसे युवा तैयार कर दे सकें. हफ़्तों के अनशन और सरकारी दमन के बावजूद इस बहादुर लड़की को पता है कि इतिहास किसे कैसे दर्ज करेगा.
मोर पॉवर टू यू कॉमरेड ✊