मछलियों को लगता था
कि जैसे वे तड़पती हैं पानी के लिए
पानी भी उनके लिए तड़पता होगा
लेकिन जब खींचा जाता है जाल
तो पानी मछलियों को छोड़कर
जाल से निकल भागता है
—नरेश सक्सेना
#किताबउत्सव#मुम्बई#साथजुड़ेंसाथपढ़ें
कभी न कभी अलग रास्ते पर निकलना पड़ता है
अन्तर्द्वंद के भंवर से , तमाम चौराहों से
रात के अंधियारों से , माया के भ्रम से
निकलना पड़ता है
स्वयं से लड़ने में , स्वयं की खोज में
स्वयं के वजूद के लिए
स्वयं को सिद्ध करने के लिए
निकलना पड़ता है , सबसे दूर निकलना पड़ता है।
#penguin
हमेशा ज़िंदगी की हर
कमी को जीते रहते हैं,
जिसे हम जी नहीं पाए
उसी को जीते रहते हैं.
किसी के साथ हैं रस्में
किसी के साथ हैं क़समें,
किसी के साथ जीना है
किसी को जीते रहते हैं.
- आलोक , @AalokTweet
नदी क्या रुक जाएगी, जो तुम लाठी से रोकोगे ?
महीधर से अडिग हैं हम, हमें क्या तुम टोकोगे?
करोगे पानी की बौछार ठिठुरती रात में जब तुम
वही पानी बने ज्वाला तो, बताओ! कैसे रोकोगे?
मनी भंडारी ✍🏻
#Uttrakhand#paperleak#currption#pahad#struggle
'भ्रष्टाचार की रुग्णता' की आग़ोश में सब आ रहे हैं,
धन-माल की लालसा में एक-दूजे का हिस्सा खा रहे हैं।
जनहित में सोचा जिसने भी, उस पर यहां धिक्कार होता,
चक्षुविहीन है निज स्वार्थ में, जो जयकारे उसके गा रहे हैं।
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मनी भंडारी ✍🏻
#currption#uttrakhnad