मुंबई कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल किया, इस वीडियो में मुंबई पुलिस का कॉन्स्टेबल आंदोलन कर छात्रों को
धमकी देते हुए कह रहा है यहां आंदोलन करते हुए दुबारा मत दिखना, अगर दुबारा दिखाई दिया तो 50 ग्राम ड्रग्स तुम्हारे बैग में डालकर फंसा दूंगा और जमानत भी नही होगा.
इस वीडियो पर MNS चीफ राज ठाकरे साहब ने संज्ञान लेते हुए हुआ सवाल उठाया, मुंबई पुलिस के पास ड्रग्स कहां से आया ?
सवाल है क्या पुलिस इसी तरह ड्रग्स मामले में युवाओं को फसाती है. नियम अनुसार ड्रग्स जब्त करने के बाद उसे नष्ट करने का नियम है.
'हम देखेंगे कि जब नाम रहेगा सिर्फ अल्लाह का और जब सब बुत (देवताओं और बुद्ध की मूर्तियां) उठावाए जाएंगे' गीत को सांप्रदायिता और मूर्ति तोड़ने वाली लाइनों से मुक्त करने की एक और कोशिश.
हम देखेंगे
हम देखेंगे, हम देखेंगे।
जब-जब धम्म की हानि होगी,
तब-तब करुणा जाग उठेगी।
तथागत की वाणी बनकर,
प्रज्ञा का प्रकाश बनकर,
मैत्री का संदेश बनकर,
करुणा की शक्ति बनकर।
गिरेंगे अन्याय के सिंहासन,
मिटेगा दंभ और अत्याचार।
हम देखेंगे, हम देखेंगे।
नहीं किसी एक नाम का जयघोष,
धम्म का ही सम्मान होगा।
धरती पर प्रतिष्ठित होगा
करुणा, समता और लोककल्याण।
हम देखेंगे, हम देखेंगे।
फिर धम्म की ध्वजा लहराएगी,
जो युगों से पथप्रदर्शक है।
फिर प्रज्ञा का दीप जलेगा,
फिर मैत्री का प्रकाश फैलेगा।
सत्य का वज्र अन्याय पर होगा,
विनय का नियम अहंकार पर।
अधर्म के सब दुर्ग गिरेंगे,
जन-जन स्वतंत्र मुस्काएगा।
तब बहुजन हिताय का राज होगा,
बहुजन सुखाय का युग आएगा।
फिर तथागत की करुणा बहेगी,
करुणा अन्याय को रोकेगी।
अज्ञान के बंधन टूटेंगे,
लोभ और द्वेष स्वयं मिटेंगे।
समता का सूर्य उदित होगा,
मानवता का मान बढ़ेगा।
फिर जन-जन के मुख से निकलेगा—
"अप्प दीपो भव" का मंत्र अमर।
सत्य का पथ सबका होगा,
धम्म ही जग का घोष बनेगा।
करुणा का कलश छलकेगा,
मैत्री का संदेश गूंजेगा।
हम देखेंगे, हम देखेंगे।
निश्चित ही हम देखेंगे।
रचनाकार - @dayalg343
राष्ट्रपति भवन में तथागत गौतम बुद्ध
नमो बुद्धाय, जय भीम.
मेघा प्रसाद -- टोल पर MP -MLA को छूट क्यों है ?
गडकरी -- वो छूट पहले से है
मेघा -- तो आप बंद करिए
गडकरी -- मैं क्यों बंद करूं..? MP -MLA लोकतंत्र का हिस्सा है
मतलब लोकतंत्र का हिस्सा केवल MP -MLA है जनता नहीं ...🤔
@raviparmarIN न्यायालय के तारीख पर तारीख देने के व्यवहार को अगर भारत सरकार के माननीय प्रधानमंत्री जी और माननीय राष्ट्रपति जी चाहें तो बदलाव कर सकते परन्तु क्यों करेंगे इन बडे लोगों के लिए 24 घंटे भी कोर्ट खुल सकते मरना तो गरीब किसान मजदूर का है जो 70 % आबादी न्यायालय से दुखी है।
@raviparmarIN ये जज लोग बहुत ही धनी परिवार से आता है , उसे गरीबी की दर्द क्या मालूम ! व्यक्ति किस तरह से SC पहुंचा है इससे क्या लेना देना। यही कारण है कि आक्रोश फूट था है जनता का। ये जज लोग भगवान जैसी सुविधाओं का लाभ उठाते हुआ मस्त है।
सिर्फ पैर टूटा था... ICU में भर्ती कर बना दिया ₹22 लाख का बिल, ओर फिर जान भी चली गई,😡😡
रांची के राज हॉस्पिटल में एक मरीज को एडमिट कराया गया था क्योंकि उसका पैर फ्रैक्चर हुआ था,
भर्ती करने के बाद मरीज की 2–3 दिन तक ड्रेसिंग नहीं की गई, जिसके कारण शरीर में इंफेक्शन फैल गया,
ऊपर से इलाज के नाम पर करीब ₹22 लाख लिए गए और बाद में डॉक्टरों ने कहा कि मरीज को बचाया नहीं जा सकता,
सच कहूं तो आजकल कुछ प्राइवेट हॉस्पिटलों में गजब की लूट मची हुई है।
हिंदू धर्म एक ऐसा मकान है, जिसमें बाहर जाने का दरवाजा है. अंदर आने का नहीं. और उससे भी बड़ी समस्या है मांस-मछली के प्रति अपमान का भाव. इससे धर्म कमजोर होता है. ज्यादातर हिंदू मांस-मछली-अंडा खाते हैं.
जिन्ना का परिवार हिंदू वैश्य जाति था. मछली बेचने के कारण उनको धर्म और बनिया जाति से निकाल दिया गया. बिजनेस बड़ा था. छोड़ नहीं सकते थे. मजबूरी में मुसलमान बन गए. वापसी की कोशिश की तो लोग माने नहीं.
भारत के ज्यादातर ईसाई और मुसलमान फिर से हिंदू बनना चाहते हैं. हिंदू धर्म उदारता तो दिखाए. अंदर आने का दरवाजा खोले. विदेशी धर्म में कोई नहीं रहना चाहेगा.
पुलिस वाले आते है..जूस पी लेते हैं..कभी पैसा देते हैं कभी नहीं भी देते हैं...चले जाते हैं..!
पैसा मांगों तो दुकान हटवा देंगे ये कहकर
धमकाते हैं..!
इसके अलावा ट्रैफिक वाले गाड़ियां पकड़ते हैं..इशारा करके मेरे यहां पैसा भिजवा देते हैं फिर बात में मुझसे ले लेते हैं..!
@dgpup साहब ...!
यूपी के आजमगढ़ निवासी इस युवा दुकानदार को सुनिए....👇👇👇
आपकी हाईटेक पुलिस और ट्रैफिक पुलिस के वसूली और मुफ्तखोरी के कारनामे युवा बता रहा है.. ये कुछ लोग समूचे विभाग की भद्द पिटवाने में लगे हैं..!
इन्हें चिन्हित करके कार्यवाही की जाए...भ्रष्टाचार दीमक की तरह दिन ब दिन बढ़ रहा हैं..इनका इलाज बेहद जरूरी है...!
Dangal is one of the most woke propaganda films ever made. Showing a junior-level female amateur wrestler defeating male Pehlwans in the akhada is a straight mockery of the strength of those male Pehlwans who spend years honing their skills.
In reality, even international female wrestlers who have won gold medals cannot defeat junior male wrestlers.
Yet, in the name of women empowerment, they made a mockery of local Haryana Pehlwans.
It would have been fine if it were a fictional film, but they sold it as a biopic.
Haryana Pehlwans deserve respect. They are chads who built strength and skills naturally.
If not for the performance-enhancing drugs used by Westerners and other East Asian countries, they would have brought way more medals to India.
Sadly, even the anti-doping organizations belong to Westerners and East Asians.
Why does women empowerment always lead to showing men as weak by faking stuff?
The film had many more flaws btw. The scorecards of the match were manipulated for drama, Mahavir Phogat was never locked in a storage room by a petty coach during the finale, and the film implies Geeta & Babita were lonely pioneers. False. The Indian women's team had already won many times. Legends like Alka Tomar won World Championship bronze in 2006, and multiple Indian women won gold alongside Geeta in 2010 itself.
इंग्लैंड वाले जब 1200 AD में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे तब भारत के लोग पेड़ के नीचे पढ़ाई करते थे.
1193 में नालंदा महाविहारा को बख्तियार खिलजी ने जला दिया. यहां रखी करोडों किताबें महीनों तक चलती रहीं.
1602 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के कैंपस में इंग्लैंड वालों ने दुनिया की सबसे बड़ी लाइब्रेरी बनाई गयी. यहां करोड़ों किताबे रखी हैं.
16वीं सदी में भारत का मुगल बादशाह शाहजहां 4 करोड़ रुपए की लागत से ताजमहल यूनिवर्सिटी नही, बल्कि संगेमरमर के पत्थरों से कब्रिस्तान बना रहा है.
आज अगर इसी प्रकार का ताजमहल बनाना हो तो 1,00,000 करोड़ रुपए की लागत आएगी.
भारत में यूनिवर्सिटी स्कूल कॉलेज अस्पताल और न्यायपालिका अंग्रेजों ने बनाया. आज हम उन्ही को गाली और कुछ नही करने वाले अपने जाति धर्म के राजा और बादशाह का महिमा मंडन करते हैं.
आज भारत में एक पुरुष को बर्बाद करने के लिए किसी सबूत की नहीं, सिर्फ एक आरोप की जरूरत होती है। वैवाहिक विवाद शुरू होते ही 498A लगाया जाता है, और अगर उससे भी दबाव न बने तो IPC 377 जैसी गंभीर धाराएँ जोड़ दी जाती हैं।
इसके बाद कानून अपना काम कम और सामाजिक विनाश ज्यादा करता है। FIR दर्ज होते ही पुरुष अपराधी घोषित कर दिया जाता है, परिवार टूटने लगता है, नौकरी और प्रतिष्ठा खतरे में आ जाती है, और समाज बिना ट्रायल के ही फैसला सुना देता है।
सबसे भयावह बात यह है कि यदि वर्षों बाद आरोप झूठे या बढ़ा-चढ़ाकर लगाए गए साबित भी हो जाएँ, तब तक एक पुरुष अपनी मानसिक शांति, सामाजिक सम्मान, आर्थिक स्थिरता और कई बार जीने की इच्छा तक खो चुका होता है।
आज कानून की आड़ में सुरक्षा कम और दुरुपयोग अधिक दिखाई दे रहा है, जहाँ आरोप लगाने वाले से शायद ही कभी जवाबदेही पूछी जाती है, लेकिन आरोपी पुरुष को अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए पूरी जिंदगी झोंकनी पड़ती है।
If you want any legal guidance, please contact us:👇
🌐 https://t.co/IE2io2nmnK
📞 Call / WhatsApp: +91 7428 418 261
#MensRights #FalseCases #498A #IPC377 #LegalTerrorism #JusticeForMen #FalseAllegations #MisuseOfLaw #FakeCases
Not every battle is fought in court. Some are fought within.
SIF JHARKHAND SUNDAY WEEKLY weekly meetings help men & their families face both with clarity, courage, guidance and support.
Strength grows when shared.
#mensrights#EqualityForAll@JharkhandPolice@SIFJharkhand
'मंदिर या मस्जिद, तेज आवाज में कहीं भी नहीं बजेंगे लाउडस्पीकर', CM शुभेंदु का सख्त आदेश
पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित बीजेपी सरकार ने शपथ लेते ही मंदिरों-मस्जिदों पर लगे स्पीकर्स के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. राज्य सरकार ने लाउड स्पीकर के नियम सख़्ती से जारी करने का निर्देश दिया है.
पूरी खबर https://t.co/0fB9iW4RM2
#WestBengal #ShubhenduAdhikari #LoudspeakerRule #Temple #Mosque