प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी,आपका ध्यान राजस्थान राज्य की अत्यंत चिंताजनक एवं बदहाल सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। वर्तमान में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था लगभग “वेंटिलेटर” पर है, जहाँ आम जनता को बुनियादी उपचार भी समुचित रूप से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने के बजाय अपने निजी व्यवसायों को बढ़ाने में अधिक ध्यान दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त, एक निजी डायग्नॉस्टिक कंपनी को सरकारी अस्पतालों में लैब जांच का कार्य सौंपा गया है, जो कथित रूप से स्वास्थ्य मंत्री के करीबी व्यक्ति से जुड़ी हुई है। सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में निजी लैब द्वारा की जा रही कई गंभीर अनियमितताएँ सामने आ रही हैं ,बिना सैंपल जांच किए ही रिपोर्ट जारी की जा रही हैं,स्वस्थ व्यक्तियों को थायराइड एवं कैंसर जैसे गंभीर रोगों से ग्रसित बताया जा रहा है और इन घटनाओं से संबंधित समाचार प्रतिदिन समाचार पत्रों में प्रकाशित हो रहे हैं। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे-सीधे लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ है, जो आपराधिक श्रेणी में आता है। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp से यह प्रश्न है कि इस निजी लैब को संरक्षण क्यों दिया जा रहा है? गलत रिपोर्टों के कारण जिन मरीजों के जीवन पर खतरा उत्पन्न हो रहा है, उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? यह मामला केवल जांच का नहीं, बल्कि आपराधिक लापरवाही का है, और राजस्थान की जनता शासन से जवाब मांग रही है। जिस स्वास्थ्य मंत्री से पूरा राजस्थान अपेक्षा रखता है,उनके खुद के गृह जिले नागौर की स्वास्थ्य सेवाएँ भी अत्यंत दयनीय स्थिति में हैं,चिकित्सकों की कमी, खराब एवं बंद मशीनें तथा व्यापक अव्यवस्थाएँ यह दर्शाती हैं कि वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग की स्थिति अत्यंत कमजोर है। सरकारी अस्पतालों के हालत देखते हुए मैं यह कहना चाहता हूं कि राजस्थान को ऐसे नाकारा और गैर जिम्मेदार स्वास्थ्य मंत्री की कोई जरूरत नहीं है जिन्हें अपने महकमे में धरातल से जुड़ी कोई जानकारी तक नहीं है | प्रधानमंत्री जी को इस स्थिति पर त्वरित संज्ञान लेकर एक कड़ा संदेश गैर - जिम्मेदार मंत्रियों को देना चाहिए ताकि राजस्थान में स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण महकमे का जिम्मा संभाल रहे व्यक्ति को कड़ा सबक मिले और जनता को सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर लाभ मिल सकें | सरकार द्वारा लैब से जुड़ा कार्य निजी कंपनी को देने से वर्षों से अल्प वेतन पर कार्य कर रहे संविदा कार्मिकों / प्लेसमेंट कार्मिकों की आजीविका पर भी संकट आ गया | मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा को पुनः कहना चाहता हूं कि आपको विगत दस दिनो में राज्य के विभिन्न जिलों में प्राइवेट लैब को जांचों का कार्य देने से क्या स्थिति बनी ? उसकी उच्च स्तरीय समीक्षा करनी चाहिए क्योंकि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अपनी जवाबदेही के प्रति लापरवाह है और उन्हें इस महकमे से जुड़ी धरातल की कोई जानकारी भी नहीं है |
@PMOIndia@RajCMO
@BhajanlalBjp@RajCMO@KumariDiya@GajendraKhimsar@DrPremBairwa
माननीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग एक अति संवेदनशील विभाग है
जनता का जांचकार्य MNJY में गुणवत्तापूर्ण है
लेकिन सरकारी लैबों का जांच कार्य निजीकरण के बाद खराब हैं
जनता नाराज
युवा परेशान
सरकार पर अतिरिक्त भार
@RajCMO@BhajanlalBjp@KumariDiya@GajendraKhimsar
लैब टेक्नीशियन संवर्ग के साथियों के सुझाव एवं मांगे.....
ग्रेड पे 4200
पदनाम का कैबिनेट अनुमोदन
पैरामेडिकल की सीधी भर्ती मेरिट+बोनस
स्टॉपिंग पैटर्न
जांचों का निजीकरण बंद हो
एलाइड & हेल्थ केयर एक्ट की पालना.....