हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
~ दुष्यन्त कुमार
#जन्मदिवस
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इस जन्म में कई बार ऐसा लगा कि औरत होना गुनाह है, लेकिन यहीं गुनाह मैं फिर से करना चाहूंगी, एक शर्त के साथ कि खुदा को अगले
जन्म में भी मेरी हाथ में कलम देनी होगी।
#अमृता_प्रीतम#जयंती
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हर इंसान की प्रवृत्ति अलग अलग होती है
इसके बाद भी मैं क्यों चाहूँ कोई मेरे जैसा
ही सोचे, मेरे जैसा ही बोले, मेरी हर इच्छा
की पूर्ति करे......
हे ईश्वर! इतना भी खुदगर्ज मत बनाना मुझे।
#सुहानी