कबीर प्रकट दिवस 2026 के अवसर पर भारत और नेपाल के 14 सतलोक आश्रमों में तीन दिवसीय महासमागम संपन्न हुआ। आयोजकों के अनुसार 267 दहेज-मुक्त विवाह, 1,692 यूनिट रक्तदान, 1,660 देहदान संकल्प तथा अनेक सेवा कार्य आयोजित किए गए। संत रामपाल जी महाराज ने मानव एकता, सत्य ज्ञान और सामाजिक सुधार का संदेश दिया: https://t.co/VM1VFkpqWK
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ज्येष्ठ पूर्णिमा, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की ब्रह्म मुहूर्त की वह घड़ी जब कबीर परमेश्वर सतलोक से सशरीर चलकर लहरतारा तालाब के कमल पर शिशु रूप में प्रकट हुए। उसी पावन घड़ी की स्मृति में संत रामपाल जी महाराज की उपस्थिति में
Sant Rampal Ji Maharaj
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गरीब, साहिब पुरुष कबीर कूँ, जन्म लिया नहीं कोय।
शब्द स्वरूपी रूप है, घट घट बोलै सोय।।
ज्येष्ठ पूर्णिमा, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की ब्रह्म मुहूर्त की वह घड़ी जब कबीर परमेश्वर सतलोक से सशरीर चलकर लहरतारा तालाब के कमल पर शिशु रूप में प्रकट हुए।
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क्या वेद बता सकते हैं भगवान कौन है?
जी हाँ, और जवाब है कबीर साहेब!
ऋग्वेद मण्डल 9, सूक्त 93, मंत्र 2 प्रमाणित करता है कि पूर्ण परमात्मा कभी माता के गर्भ से जन्म नहीं लेता, वह शिशु रूप में प्रकट होता है। वही कबीर साहेब हैं।
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जिनका नहीं जन्म का कोई प्रमाण, वह है कबीर भगवान
आज से लगभग 600 वर्ष पहले, काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर परमेश्वर कबीर जी का सशरीर प्राकट्य हुआ था। इसके जीवंत साक्ष्य आज भी लहरतारा तालाब, काशी में विद्यमान हैं। संत रा