चंद्रशेखर के चक्कर में पड़ोगे तो ऐसे ही थाने से लेकर समाज के बीच में भी शर्मसार होते रहोगे,
यह तस्वीर प्रयागराज वाली घटना के समय की है उसको हीरो मानकर कूद पड़े थे मैदान में फिर कान पड़कर माफी मांगे कितने तो जेल गए।
फुटप्रिंट का इतिहास: तथागत के फुटप्रिंट सबसे पुराने पाए जाते है जो बुद्धिस्ट देशों ने सहेजा है। भारत हो या इंडोनेशिया, आज का श्रीलंका हो या थाईलैंड ये सभी बुद्धिस्ट देश है।
@grok फैक्ट चेकिंग करके बताओ की संलग्न पोस्ट में हनुमान के फुटप्रिंट दावा फेक है ।
नीट का exam फिर से हो गया। एडमिशन भी हो जाएगा। लेकिन अनुसुचित जाति के संगठनों से एक प्रश्न है कि उन्होंने इस बात पर कितना ध्यान दिया कि;
"बहन कुमारी मायावती जी ने स्पेशल कम्पोनेंट प्लान अनुसुचित जाति के कल्याण के लिए रखे फंड से जो चार मेडिकल कॉलेज सहरानपुर, जालौन, अम्बेडकरनगर, कन्नौज में बनाये थे, उनमे एडमिशन बहनजी द्वारा दी गयी व्यवस्था से होंगे या फिर आर्टिकल 30 में विशेष आरक्षण प्राप्त साबरा अहमद व उनके यादव वकील द्वारा हाईकोर्ट से रद्द करवाए अनुसार होगा?"
1.इन चारों मेडकिल कॉलेज में 340 के लगभग शीट है।
2.बहनजी ने मुस्लिम के आर्टिकल 30 में मेडिकल, इंजीनियरिंग या किसी भी प्रकार के अल्पसंख्यक संस्थान में अल्पसंख्यक के लिए आरक्षित 50% शीट की तर्ज पर इन चारों संस्थान में 70% सीट एससी व 20 शीट एसटी के लिए लिए आरक्षित करी थी। जिसे हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया ओर राज्य सरकार ने स्वीकार करके 70% से सीधा 21% पर ला दिया। जब हम लोगो ने विरोध किया तब इस साल की छूट देकर सुप्रीम कोर्ट जाने की जानकारी दी।।
3.बहनजी के अनुसार एडमिशन पर =
एससी = 248 शीट
एसटी = 20 शीट
ओबीसी = 44 शीट
सामान्य = 20 शीट
4.साबरा अहमद व यादव वकील की पिटीशन पर निर्णय के बाद स्तिथी यह है कि;
एससी = 340 का 21% = 68 शीट
अथार्त नुकसान है;
248-68 = 180 शीट का है।
5.आप समझ सकते है कि मेडिकल की एक एक शीट कितनी कीमती होती है।।अनुसुचित जाति के 180 डॉक्टर कम बनेंगे।
इंहा ध्यान देने वाली बात है कि यह मेडिकल कॉलेज अनुसुचित जाति के कल्याण के लिए रखे फंड से बने थे। जिसमे एससी से अलग ओबीसी, एसटी, सामान्य तक को शीट दी गयी। इसलिए इसके लिए राज्य सरकार से कोई विशेष फंड नही allot हुआ जिससे साबरा अहमद या अन्य को दिक्कत होती।
6.अब बहनजी ने सत्ता में रहते एससी के लिए कार्य कर दिया। उन्हें बचाने की जिम्मेदारी एससी समाज व उनके संगठनों की है। एससी के अधिकतर सन्गठन ऐसे मामलों पर गायब मिलते है। इंहा तक कि;
"चन्द्रशेखर से लेकर चिराग पासवान व अन्य अम्बेडकर के नाम पर सभा/महासभा वाले दलित नेता तक इसपर कोई बयान देते नही दिखते"
7.अब नीट में एडमिशन होने वाला है। इन 4 संस्थान में किस प्रकार एडमिशन होंगे यह पूछने वाला कोई नही है?
मजेदार बात यह है कि;
"अधिकतर अपने घर मौज मस्ती करते हुए मुझे कहते है कि आप क्यो नही रिट दाखिल करते। जबकिं यह मामला मेने ही वायरल किया, जिसके कारण राज्य सरकार को डबल बैंच से आदेश पर रोक लगवाकर 1 साल की छूट दिलवाई गयी व असीम अरुण ने बताया कि इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा रहे है। नही तो मामला ही सामने नही आ पाता। अब;
"घर बेचकर इसी काम मे लगा दूँ क्या। मतलब मेने इतना बड़ा नुकसान बताया तो यह मेरी ही जिम्मेदारी है कि इसे में ही देखूं"
अब राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट गए या नही। अगर गए तो निर्णय तक किस प्रकार एडमिशन होंगे, इसकी किसी को जानकारी नही है, क्योंकि हाईकोर्ट की डबल बैंच ने केवल पिछले सत्र में एक साल की छूट दी थी। सुप्रीम कोर्ट से stay हुआ या नही। किसे पता?
विकास कुमार जाटव
नीट का exam फिर से हो गया। एडमिशन भी हो जाएगा। लेकिन अनुसुचित जाति के संगठनों से एक प्रश्न है कि उन्होंने इस बात पर कितना ध्यान दिया कि;
"बहन कुमारी मायावती जी ने स्पेशल कम्पोनेंट प्लान अनुसुचित जाति के कल्याण के लिए रखे फंड से जो चार मेडिकल कॉलेज सहरानपुर, जालौन, अम्बेडकरनगर, कन्नौज में बनाये थे, उनमे एडमिशन बहनजी द्वारा दी गयी व्यवस्था से होंगे या फिर आर्टिकल 30 में विशेष आरक्षण प्राप्त साबरा अहमद व उनके यादव वकील द्वारा हाईकोर्ट से रद्द करवाए अनुसार होगा?"
1.इन चारों मेडकिल कॉलेज में 340 के लगभग शीट है।
2.बहनजी ने मुस्लिम के आर्टिकल 30 में मेडिकल, इंजीनियरिंग या किसी भी प्रकार के अल्पसंख्यक संस्थान में अल्पसंख्यक के लिए आरक्षित 50% शीट की तर्ज पर इन चारों संस्थान में 70% सीट एससी व 20 शीट एसटी के लिए लिए आरक्षित करी थी। जिसे हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया ओर राज्य सरकार ने स्वीकार करके 70% से सीधा 21% पर ला दिया। जब हम लोगो ने विरोध किया तब इस साल की छूट देकर सुप्रीम कोर्ट जाने की जानकारी दी।।
3.बहनजी के अनुसार एडमिशन पर =
एससी = 248 शीट
एसटी = 20 शीट
ओबीसी = 44 शीट
सामान्य = 20 शीट
4.साबरा अहमद व यादव वकील की पिटीशन पर निर्णय के बाद स्तिथी यह है कि;
एससी = 340 का 21% = 68 शीट
अथार्त नुकसान है;
248-68 = 180 शीट का है।
5.आप समझ सकते है कि मेडिकल की एक एक शीट कितनी कीमती होती है।।अनुसुचित जाति के 180 डॉक्टर कम बनेंगे।
इंहा ध्यान देने वाली बात है कि यह मेडिकल कॉलेज अनुसुचित जाति के कल्याण के लिए रखे फंड से बने थे। जिसमे एससी से अलग ओबीसी, एसटी, सामान्य तक को शीट दी गयी। इसलिए इसके लिए राज्य सरकार से कोई विशेष फंड नही allot हुआ जिससे साबरा अहमद या अन्य को दिक्कत होती।
6.अब बहनजी ने सत्ता में रहते एससी के लिए कार्य कर दिया। उन्हें बचाने की जिम्मेदारी एससी समाज व उनके संगठनों की है। एससी के अधिकतर सन्गठन ऐसे मामलों पर गायब मिलते है। इंहा तक कि;
"चन्द्रशेखर से लेकर चिराग पासवान व अन्य अम्बेडकर के नाम पर सभा/महासभा वाले दलित नेता तक इसपर कोई बयान देते नही दिखते"
7.अब नीट में एडमिशन होने वाला है। इन 4 संस्थान में किस प्रकार एडमिशन होंगे यह पूछने वाला कोई नही है?
मजेदार बात यह है कि;
"अधिकतर अपने घर मौज मस्ती करते हुए मुझे कहते है कि आप क्यो नही रिट दाखिल करते। जबकिं यह मामला मेने ही वायरल किया, जिसके कारण राज्य सरकार को डबल बैंच से आदेश पर रोक लगवाकर 1 साल की छूट दिलवाई गयी व असीम अरुण ने बताया कि इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा रहे है। नही तो मामला ही सामने नही आ पाता। अब;
"घर बेचकर इसी काम मे लगा दूँ क्या। मतलब मेने इतना बड़ा नुकसान बताया तो यह मेरी ही जिम्मेदारी है कि इसे में ही देखूं"
अब राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट गए या नही। अगर गए तो निर्णय तक किस प्रकार एडमिशन होंगे, इसकी किसी को जानकारी नही है"
विकास कुमार जाटव
तेलंगाना में तहसीलदार का वेतन तकरीबन 80,000 और 1,00,000 रुपए के बीच है.
तेलंगाना के तहसीलदार टी.सुचरिता के घर से ACB की रेड में 5,00,00,000 रुपए कैश मिला है.
ACB को इस महिला तहसीलदार के गांव में 3 एकड़ जमीन और हैदराबाद में तीन आलीशान प्लॉट के कागजात मिले है.
नेताओं के अलावा मुझे प्रशासनिक अधिकारियों से भी सख्त नफ़रत है. बिना पैसा लिए कोई काम नही करते. लेखपाल और तहसीलदार सबसे मलाईदार पद माना जाता है. भ्रष्टाचार करने के लिए लाखों बच्चे इस नौकरी की तैयारी कर रहे हैं.
जब तक भ्रस्टाचारियों को फांसी पर चढ़ाया नही जाता तब तक सरकारी नौकरी के लिए कोचिंग मार्केट गर्म रहेगा. जिस दिन भ्रस्टाचारियों को सूली पर लटकाने का सिलसिला शुरू हुआ, उस दिन कोई आईपीएस आईएएस लेखपाल या तहसीलदार नही बनना चाहेगा.
इसलिए में इन्हें नौशिखिया लड़को का ग्रुप कहता हूं।
एक बेचारा Air Force का कर्मचारी इसे खाना देने आया, इसे क्या जरूरत थी इसे बताने की। सरकार विरोधी आंदोलन है। जिसमे सरकारी कर्मचारी को दूर रहना चाहिए।।
यह अपने को अत्यंत बुद्धिमान समझकर उसका मुँह छुपाकर सोच रहे है कि किसी को इसकी आइडेंटिटी पता नही लगेगी। जबकिं वँहा आईबी से लेकर लोकल एलआईयू हर आंदोलन के समय मौजूद रहती है जो वीडीओ तक बनाती है। जो दो मिनट में इसे पहचान लेगी।
इसमे दो पक्ष है;
1.इन्हें पता है लेकिन सरकार से सांठगांठ है इसलिए पता है कुछ नही होगा।
2.दूसरा जानबूझकर की गयी मूर्खता है।।
बहुजन समाज पार्टी के अम्बेडकरनगर में काफी बड़ी रैली हुई। यह जिला स्तर की रैली थी, लेकिन इतनी भारी भीड़ थी कि सड़के जाम हो गयी।। अब इससे नींद उड़ना लाजमी था। सपा व अन्य ने भाई चन्द्रशेखर के पदाधिकारियो को पुश किया जिससे वो दो दिन से;
"मंच पर ब्राह्मण द्वारा शंख बजाने पर हाय हाय कर रहे है"
अरे भाई। मान्यवर कांशीराम साहब कहते थे कि;
"हम लेने वाला नही बल्कि देने वाला समाज बनाएंगे"
यह केवल एक नारा नही बल्कि पुरी परिभाषा को प्रदर्शित कर रहा है। जिसमे;
"ब्राह्मण नेता अब चाहे कॉग्रेस हो या भाजपा का वो हाथ जोड़कर जय भीम आपके मंच से वोट लेने के उद्देश्य से कह सकता है। बसपा वोट के लिए मंच से ब्राह्मण से शँख काहे नही बजवा सकती"
प्रश्न : क्या बसपा दलित नेता स्वयं बजा रहे है?
उत्तर : नही। बसपा वैसे भी "मानवतावादी" सिद्धान्त पर चलती है। जिसमे दूसरे की भावनाओ की कद्र करती है। इसलिए दुसरो को बजाने देते है। उनकी भावनाओं की कद्र कर रहे हैं । क्या बसपा को वोटो के लिए इसे नही करना चाहिए?
जबकिं चन्द्रशेखर स्वयं मुस्लिम टोपी पहनकर व झंडी लेकर निकल पड़ते है।
अब चन्देशखर की पार्टी न तो राज्य स्तर पर रजिस्टर्ड है क्योंकि वोट कंही 200, कंही 500 मिले थे। लेकिन उनका पूरे दिन में एकमात्र टारगेट;
"बसपा, बसपा और केवल बसपा रहती है"
बसपा ने जितना अचीव किया, वो भाई चन्द्रशेखर का है। उन्हें इससे बढ़कर सपा व कोंग्रेस, भाजपा पर हमले करना चाहिए।
विकास कुमार जाटव
यूपी की राजधानी लखनऊ के एक कोचिंग सेन्टर में आज दोपहर बाद हुई अग्निकाण्ड में अनेक लोगों की मौत तथा और भी कई लोगों के घायल हो जाने की घटना अति-दुखद। इस प्रकार की जानलेवा घटनायें दिल को दहलाने वाली होती हैं तथा कितने ही परिवार की उम्मीदों को बिखेर देती हैं। ऐसी दुखद घटनाओं की रोकथाम के लिये सबको मिलकर सही से काम करने की ज़रूरत है। सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप से काम नहीं चलेगा।
बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा आमचुनाव की तैयारियों के मद्देनज़र जब से अपरकास्ट समाज और उसमें से ख़ासकर ब्राह्मण समाज को, उनके बी.एस.पी. में जुड़ने को ध्यान में रखकर, पार्टी का उम्मीदवार बनाना शुरू कर दिया है, तब से सभी विरोधी पार्टियों में व ख़ासकर समाजवादी पार्टी में उनकी नींद उड़ा देने वाली बेचैनी देखने को मिल रही है, जो कि सन् 2007 की तरह ब्राह्मण समाज के योगदान से बी.एस.पी को पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने जैसा ही इस बार के आगामी चुनाव परिणाम के रिपीट होने की संभावना के तहत् स्वाभाविक ही प्रतीत होता है।
वैसे भी यह सर्वविदित है कि यूपी जैसे विशाल आबादी वाले प्रदेश में अपरकास्ट में से ख़ासकर ’ब्राह्मण समाज का हित बी.एस.पी. में ही सुरक्षित है’, जिस अपनी इस ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के सिद्धान्त, नीयत व नीति को बहुजन समाज पार्टी ने पहले पार्टी स्तर पर अमल करके और फिर सरकार बनने पर भी उन्हें भरपूर आदर-सम्मान के साथ-साथ उन्हें हर स्तर पर पूरी-पूरी भागीदारी देकर यह साबित भी कर दिया है, जबकि दूसरी पार्टियों की सरकारों में इस वर्ग के लोग पिछले काफी समय से अपने आपको काफी उपेक्षित, असुरक्षित व ठगा हुआ भी महसूस कर रहे हैं।
इतना ही नहीं बल्कि ’ब्राह्मण समाज द्वारा सामाजिक भाईचारा के आधार पर बी.एस.पी. से जुड़ने की इनकी तैयारियों को ध्यान में रखकर इन्हें पार्टी उम्मीदवार बनाने की प्रक्रिया जारी है तथा इन्हें बी.एस.पी. की आयरन लेडी नेतृत्व पर पूरा यह यक़ीन भी है कि बी.एस.पी. की सरकार बनने पर उन्हें पहले की तरह ही हर स्तर पर भरपूर आदर-सम्मान ज़रूर दिया जायेगा, जो कि इनकी वास्तविक चिन्ता व दूसरी पार्टियों से मुँह मोड़ने का कारण है।
इसके साथ ही, अपरकास्ट में से क्षत्रिय, वैश्य आदि व अन्य समाज के लोगों को भी उनकी बी.एस.पी. से जुड़ने की तैयारी अर्थात् ’जिसकी जितनी तैयारी उसकी उतनी भागीदारी’ के आधार पर चुनाव में उम्मीदवार भी ज़रूर बनाया जायेगा, जिसकी तैयारी हर स्तर पर लगातार जारी है।
बी.एस.पी., दूसरी पार्टियों की तरह कुछ लोगों को ’लॉलीपाप’ थमाने की संकीर्ण व स्वार्थ की राजनीति नहीं करती है बल्कि पूरे समाज के हित व कल्याण की चिन्ता करना अपना संवैधानिक कर्तव्य समझती है और इसीलिये बी.एस.पी. की नीति व कार्यक्रम जनहित व जनकल्याण तथा अपराध नियंत्रण व क़ानून व्यवस्था के मामले में भी देश व जनहित में बेहतरीन होते हैं।
इस वकील का नाम हैं निरंजन कुमार , जो अभी रौशन आनंद सर का केस देख रहा हैं ,
कल इसने बयान दिया था कि खान सर का ISI और अलकायदा से संबंध हैं !
2022 में इंटर्नशिप करने वाली एक Law की स्टूडेंट का बलात्कार करने की कोशिश में ये जेल जा चुका हैं ,
अपने चैंबर में लड़की का हाथ पकड़ कर शारीरिक संबंध बनाने की मांग की थी , मना करने पर कहा था कि इसे गुरु दक्षिणा समझ लो,
और ये सारा कारनामा इसने अपने चैंबर में किया था , लड़की ने जैसे तैसे भाग कर अपनी जान बचाई थी !
लड़की चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट थी , उसने हिम्मत दिखाए हुए FIR दर्ज करवाया था !
लॉ कॉलेज के छात्रों ने उस समय पटना में काफी हंगामा भी किया , लेकिन ऊंची पहुंच होने के कारण इसे जमानत मिल गई थी !
UP- बरेली में कुछ स्टूडेंट ट्रेन से हरिद्वार जा रहे थे. किसी ने गलती से डस्टबिन पर कुल्ला कर दिया. GRP के सिपाही हरिओम ने इस गलती पर जेल का डर दिखाकर छात्रों से एक हजार रूपये की न्यौछावर वसूल ली.
छात्रों ने आपस में चंदा करके रिश्वत अदा की
#BSP
आजतक कोई दलित पिछड़ा मुस्लिम आदिवासी नहीं मिला जिसने कहा हो उसे पांच लाख बहन जी से मिलने के माँगें गए !
अगर कोई मिला तो बताओ किस दलित पिछड़े आदिवासी में दम है जो पांच लाख दे सके ?
यदि जवाब नहीं तो वे कौन थे जिसने इसका दावा किया ? अगर जवाब हां तो सबूत सहित सिद्ध कर दो ?
अरविंद केजरीवाल को सभी जगह से फंडिंग मिली। अन्ना आंदोलन में भी और बाद में भी। केजरीवाल ने पार्टी बना ली।।
केजरीवाल की पार्टी चुनाव लड़ने की घोषणा करती है। सबसे बड़ा प्रश्न की;
"चुनाव बिना पैसे के नही लड़ा जा सकता। पैसा कँहा से आएगा"
केजरीवाल ने घोषणा करी की उनसे मिलने के लिए "20000 की फीस देनी पड़ेगी" जिसमे डिनर भी मिलेगा। यह 2014 में था। इन 12 साल में 20000 कई क्रय शक्ति कई गुणा बढ़ गई है। वर्तमान में 60 से 1 लाख इसे मानकर चलिए। एक व्यक्ति पर आम आदमी पार्टी का डिनर खर्च 625 रुपया ओर मिला 20000 रुपया।
केजरीवाल को;
1.विदेशों स फंडिंग हुई।
2.उधोगपतियों ने शुरू से फंडिंग करी।
3.बाकी शराब घोटाला व अन्य घोटाले के आरोप है।।
बसपा को;
1.विदेशों से छोड़ो देश से फंडिंग नही हुई।
2.उधोगपति अनुसुचित जाति की पार्टी होने के कारण एक रुपया नही देते।
3.बसपा पर कोई घोटाले का आरोप नही है। चीनी मिल का चर्चा होती है लेकिन सबूत नही दे पाए न केस दर्ज हुआ।।
लेकिन मूर्खो को ;
1.केजरीवाल की "डिनर डिप्लोमेसी" दिख रही है और इस मामले में बुद्धिजीवी बनकर कह रहे थे कि चुनाव लड़ने के लिए पैसा चाहिए ही।
2.बसपा व बहनजी को भी चुनाव खर्च पूरा करना है।।बहनजी ने कह रखा है कि पार्टी पदाधिकारी से अलग जो कूपन से पैसा इकट्ठा करके 5 लाख रुपया पार्टी फंड में जमा करेगा, उससे ही मिलेगी। यह अपराध हो गया। उन्हें लगता है कि बसपा के पास आसमान से पैसा आता है लेकिन सपा-आरजेडी-ममता-केजरीवाल-वामदलों पर आसमान से नही आता इसलिए उन्हें उधोगपतियों से लेना पड़ता है।
जिसे लगता है कि बिना पैसा चुनाव हो सकता है। पार्षद का चुनाव लड़कर दिखा दे। दिन में तारे दिख जाएंगे। अजीब तब है जब;
"नौशिखिया व अपरिपक्व युवाओ का एक ग्रुप" जिनकी पार्टी राजकीय स्तर पर रजिस्टर्ड तक नही हुई अथार्त राज्य की पार्टी का दर्जा तक नही है। उंसके नौशिखिया व अभी अभी निकर से पेंट में आये कह रहे है कि वो "स्तब्ध" है यह देखकर। मुझे लगता है कि ज्यादा स्तब्ध मत होकर अपने साथ कुछ गलत मत कर लेना"
विकास कुमार जाटव
चुनाव जीतने के लिए "वोट" से ज्यादा जरूरी "पैसा" है। नोटबन्दी के कारण बसपा आज तक उबर नही पाई।
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मीडिया वाले भी अजीब है। 40 साल बाद स्ट्रिंग कर रहे है। अरे भाई हमने 40 साल पहले खुलकर कहा है कि;
"एक नोट, एक वोट चाहिये।
हम खुलेआम कहते आये है। 40 साल बाद नींद काहे खुल रही है।
हम घोटाले नही करते। हम गरीब जनता से पैसे लेते है। हम कूपन देते है। पदाधिकारी व उस व्यक्ति की जिम्मेदारी है जो बहनजी से मिलता है, बहनजी जानती है टिके रहने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी "पैसा" है।
"पैसा न होने" के कारण ही एकाएक बसपा का ग्राफ गिरा। "नोटबन्दी" करी ही गयी थी 2017 के उत्तर प्रदेश चुनाव को ध्यान मव रखकर। बसपा जैसी पार्टियां 2017 में इसलिए धराशाई हुई क्योंकि "नोटबन्दी" में उसे सबसे बड़ा झटका लगा था। इसलिए नोटबन्दी का सबसे ज्यादा विरोध बहनजी ने किया था। नोटबन्दी का कारण यह था कि सपा, बसपा, आरजेडी से लेकर कई पार्टियां चुनाव न लड़ सके। सपा, वग़ैरह ने तब भी उधोगपतियों से मैनेज कर लिया। लेकिन धराशाई वो भी हुई। बसपा नही कर पाई। बसपा ने 104 करोड़ रुपया गाजियाबाद के एक्सिस बैंक की शाखा में दिसम्बर 2016 में जमा किया। जिससे घबराकर उस एकाउंट पर ED व इनकम टैक्स की नजर पड़ी व होल्ड लगा दिया गया और एक माह बाद अथार्त जनवरी 2017 में चुनाव प्रचार पर फर्क पड़ा। बिना पैसे के बसपा 2017 चुनाव लड़ी, आज तक उबर नही पाई है।।
इन 10, 100, 200 के कूपन गरीब शोषित एससी समाज मे बाँटकर चुनावी खर्च पूरा किया जाए। हमे सपा या आरजेडी, ममता केजरीवाल और इंहा तक कि वामदलों को मिलने वाले उधोगपतियों के चंदे नही मिलते है।
केजरीवाल ने शुरू में हम लोगो की तरह डिनर डिप्लोमेसी अपनाई। एक व्यक्ति एक व्यक्ति से 20000 इसलिए लिए जिससे वो केजरीवाल से मुलाकात कर सके। तब तक सही चला। फिर उन्होंने इसे छोड़कर शराब व अन्य तरिके अपनाए, पूरी पार्टी का बंटाधार हो गया।
हम आज भी उसी पर कायम है;
"एक नोट, एक वोट"
जो पदाधिकारी से अलग 5 लाख के कूपन बाँटकर पार्टी फंड में जमा करेगा, बहनजी उससे मिलेगी। पार्टी पर फंड होगा, चुनाव लड़ा जाएगा, जितने सत्ता में पहुचने पर हम उसी सबसे गरीब, जिसने साहयोग दिया, उसे गरीबी से मुक्त करवाने, उसे अपने मानव अधिकार होने का एहसास दिलवाने के कार्य करेंगे। हम गरीब शोषित की आंखों से आँसू पोछेंगे।
विकास कुमार जाटव
@Mayawati@AnandAkash_BSP@bspindia
आज बताया जा रहा है कि कॉकरोच जनता पार्टी लखनऊ में आंदोलन कर रही हैं और आंदोलन ईको गार्डन में किया जा रहा हैं जो बसपा के शासनकाल में परम आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी ने बनवाया था।
ये भी पार्क उन्ही पार्कों में से एक पार्क हैं जिसको लेकर जो ग़ैर दलित थे वो कांग्रेस भाजपा और समाजवादी पार्टी जैसी पार्टियों के बहकावे में आकर विरोध करते नज़र आ रहे थे और पत्थरों में पैसे की बर्बादी, फ़िज़ूल का खर्चा बताकर खुन्नस निकाल रहे थे।
लेकिन आज उसी पार्क में आराम से बैठकर पेड़ों की छाव में अपनी आवाज और अपने आंदोलन के लिए आवाज़ उठा सकते हैं वरना आपके पास इकट्ठा होने के लिए कोई जगह नहीं बचती जहाँ आप अपने आंदोलन को सफल बनाने भारी हुजूम दिखा सकते।
बहन कुमारी मायावती जी ने विशाल/ख़ूबसूरत पार्क सिर्फ़ एक वर्ग के लिए ही नहीं बनवाए थे बल्कि सर्व समाज के लोगों के लिए बनवाए थे और आज वही पार्क सर्व समाज के छात्रों के लिए काम आ रहे हैं वरना क्या ये लोग धार्मिक स्थलों पर जाकर आंदोलन करते?
देश में न्यायप्रिय, धर्मनिर्पेक्ष एवं लोक कल्याणकारी महान शासक के रूप में प्रसिद्ध अहिल्याबाई होलकर जी की जयन्ती पर शत्-शत् नमन एवं अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित।
भारतीय इतिहास की महान शासक अहिल्याबाई होलकर जी ने अपने आदर्शों, सेवा-भाव और जनहितकारी कार्यों से समाज को नई दिशा प्रदान की। उनका जीवन नारी शक्ति, सुशासन, सामाजिक समरसता एवं जनसेवा का प्रेरणा स्त्रोत है। आज उनकी जयन्ती के पावन अवसर पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि एवं उनके अनुयायियों को शुभकामनाए।