कुछ लोगों की हॉबी बागवानी होती है। कुछ की किताबें पढ़ना। कुछ की सैर-सपाटा करना। कुछ फिटनेस को हॉबी बनाते हैं तो कुछ लोगों को खाना पकाने का शौक होता है। पर कुछ ऐसे लोग भी हैं जिनकी हॉबी है रिजीम चेंज।
महान अर्थशास्त्री जयां द्रेज जी के साथ दिल्ली पुलिस और मीडिया की बदसलुकी शर्मनाक|
भारत में तानाशाही सरकार लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी को खत्म करने में लगी है|
देश के लिए कितनी शर्म की बात है कि -
दिल्ली पुलिस और पत्रकार इस आदमी से पूछ रही है कौन हो भाई कहां से आये हो क्या काम है और आदमी मुस्करा रहा है।
ये बेल्जियम मूल के महान भारतीय अर्थशास्त्री समाजविद् ज्यां द्रेज है जिन्होने नरेगा जैसी योजना और RTI जैसा अधिकार दिलवाया गरीबों के लिए तमाम योजनाएं बनाई।
लेकिन 5kg राशन देने वाले योगी मोदी सबको याद है।
सरकार के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए सरकार से अनुमति लेनी होगी|
संविधान तो नागरिकों को शांतिपूर्ण आंदोलन का मौलिक अधिकार देता है फिर सरकार नागरिकों का अधिकार छिनने में क्यों लगी है?
प्रधानमंत्री जी ने 25 साल में एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस की है?अपने 25 साल का हिसाब देने के लिए|
गोदी मीडिया सरकारी भौंपू बन चुका है जो सरकार से सवाल करने की बजाय विपक्ष से सवाल करता है|
अपने 25 साल के कार्यकाल का आकलन पीएम मोदी ने 25 सेकेंड में कर दिया|
25 साल का हिसाब इस से मत लगाइए कि मैं कहाँ पहुँचा.. आंकलन इस से कीजिए कि मेरा देश कहाँ पहुँचा?
1मिनट के लिए राजनीति भूल जाइए।
देश में अभी भी बहुत कुछ होना बाक़ी है लेकिन जो हासिल हुआ है वो भी मिसाल है।
अर्थव्यवस्था.. Digital भारत… GST… सड़कों का जाल… हर घर जल.. उज्जवल… आयुष्मान… Article370, triple तलाक़, नारी शक्ति वंदन अधिनियम..Space sector..दुनिया में भारत की साख..
पसंद-नापसंद अपनी जगह है लेकिन भारत में हुए बड़े बदलाव को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता…
ये अपने आप को पत्रकार कहता है?
ये तो सत्ता का चाटुकार बना फिर रहा है|इसे तो मोदियाबिंद है फिर भी विभिन्न न्यूज़ चैनल वाले इसे वरिष्ठ पत्रकार के रूप में बुलाते|
सत्ता तो सत्ता के प्रवक्ता के नाम से बुलाना चाहिए|
मैं भारत का एक नागरिक होने के नाते @ECISVEEP से यह पूछना चाहता हूँ कि पिछले डेढ़ साल में निर्वाचन नामावली में अवैध रूप से कितने नाम जोड़े और हटाये गए|
जब तक लोकतंत्र में पारदर्शिता नहीं होगी तब तक चुनाव प्रणाली संदिग्ध है|
चुनाव में पारदर्शिता लोकतंत्र का आधार स्तम्भ है|
वर्ल्ड प्रेस इंडेक्स में भारत ऐसे ही 157 नम्बर पर पहुंचा है,उम्मीद है ऐसे ही चलता रहा तो यह रैंक अगले साल 160 होगी|
बीजेपी कवर करने वाली इस पत्तलकार को भी बीजेपी से व्हाट्एप्प आया होगा|
दुकानदार 100 का सामान के पैसे बढ़ाकर 110 की देगा जिसका भार ग्राहक (खरीददार) पर पड़ेगा|दुकानदार को पॉइंट नम्बर 34 बढ़ने की जरुरत ही नहीं है|
ये पत्रकार भांग खाकर पत्रकारिता करते है क्या?
इन पत्रकारों को मालूम सब है कि पैसा खरीददार की जेब से जायेगा लेकिन सरकार की भक्ति में लीन है|
ये व्यक्ति पत्रकारों के खिलाफ भीड़ को “लिचिंग” के लिये भड़का रहा है.
एक पॉलिटिकल पार्टी की राजनीतिक यात्रा में हिस्सा लेकर अपनी पत्रकारिता बेच देने वाला शख़्स पत्रकारिता सिखाने में लगा हुआ है.
@umashankarsingh लोकेश शर्मा 1 साल पहले भी ये अॉडियों कई बार मीडिया में दिखा चुका|इसके पास क्या है जो नया दिखा रहा है?इसको टिकट नहीं मिली इसलिए सचिन पायलट का गुणगान कर रहा है|राजस्थान गद्दारों की भूमि नहीं है|मानेसर पर क्यों नहीं बोलता ये लोकेश शर्मा?
थी लाल डायरी वाले राजेंद्र गुढ़ा तीसरे नम्बर पर रहे थे|
अशोक गहलोत के साथ सरकारी कर्मचारी हमेशा साथ रहे है|
ये सचिन पायलट का प्रवक्ता बन रहा है इसे पत्रकारिता करनी है नहीं|
ये व्यक्ति हर महिने सचिन पायलट को मुख्यमंत्री और प्रदेशाध्यक्ष बनाता फिरता है|
इसे खुद को राजस्थान का 'R' मालूम नहीं वह मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर जाकर अशोक गहलोत के खिलाफ माहौल बनाता है|
पूरे शेखावाटी में गहलोत के नाम पर वोट पड़ता है|
उदयपुरवाटी में अशोक गहलोत ने दो सभा की+
“मुझे तीन बार सोनिया गांधी ने मुख्यमंत्री बनाया।अब नए लोगों को मौक़ा मिलना चाहिए।मुझे पार्टी को मज़बूत करना है।अब राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए काम करूँगा”, अगर ऐसा कोई वक्तव्य अशोक गहलोत जी देते तो शायद ज़रूर गांधी परिवार उनका कुछ भला करता…