इरफान से मिलना मुझे हमेशा याद रहेगा. मैं उसके बारे में बहुत कुछ तो नहीं जा पाया लेकिन जो जाना शायद वो भी बहुत था. वो एक छोटे से कमरे में रहता है. जिसमें छत नहीं है. तिरपाल है जो बारिश में उड़ जाता है. घर में पानी भरने लगता. वो पिता के साथ इसी कमरे के बाहर बर्फ बेचता है. कोई ख़ास कमाई नहीं होती. पढ़ा-लिखा नहीं है. लेकिन बोलने का शौक़ है. यूट्यूब और गूगल ही उसकी जिज्ञासा को शांत करने का टूल है. वो गूगल से सवाल पूछता. गूगल जवाब देता. यूट्यूब पर कवियों को सुनता है. उनकी रचनाओं को याद कर लेता. उसकी 2 बहने हैं. जिनकी शादी अभी होनी है. कहता है भैया लड़के वाले दहेज मांगते हैं. बताइए कैसे दे दें. इरफान ने ख़ुद शादी नहीं की. तमाम परेशानियों से जूझ रहा है. फिर भी मुस्कुराता है. उसकी मुस्कान मानो सत्ताधीशों पर तंज कस रही. वो आंदोलनों में जाता है. श्रमिकों के मुद्दे उठाता है. बेबाक़ी के अपनी बात रखता है. और कहता है ज़िंदा है तो ज़िंदगी की जीत पर यक़ीन कर. इरफान उम्मीद की बात करता है. उसके स्लम के लोग नशे से जूझ रहे हैं. कई परिवारों के बच्चे नशे की भेंट चढ़ गए. कैमरे की अपनी सीमाएं हैं. लेकिन आंखों ने जो देखा वो हमेशा के लिए रह जाएगा.
दिल करे तो रिपोर्ट देखिएगा-
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