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"यूपी के यशस्वी मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी के राज में हर वर्ग को न्याय मिल रहा है। जेल की सुरक्षा में तैनात 'वार्डर संवर्ग' क�� भी नागरिक पुलिस के समान डाइट अलाउंस मिलने की घोषणा के लागू होने का इंतज़ार है। वर्दीधारी भाई-बहनों का मनोबल बढ़ाएं महाराज जी! @CMOfficeUP @PrisonsUp
आदरणीय मुख्यमंत्री@myogiadityanath जी
आपके नेतृत्व में यूपी पुलिस का मान बढ़ा है। जेल वार्डर संवर्ग की भी आपसे बड़ी आशाएं हैं। विनम्र निवेदन है कि वर्ष 2018 की घोषणा के अनुरूप जेल कर्मियों को भी नागरिक पुलिस के समान 'पौष्टिक आहार भत्ता' प्रदान कर हमें अनुग्रहित करें। @CMOfficeUP
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी,
वर्ष 2018 में आपने कारागार विभाग के जेल वार्डर्स के लिए 'पौष्टिक आहार भत्ता' की घोषणा की थी।
आज 8 वर्ष बीत जाने के बाद भी उस आदेश की प्रतीक्षा कर रहे है।
इस 26 जनवरी पर कृपया 2018 में किए गए अपने वादे को पूरा कर जेल कर्मियों को न्यायद���
ग्वालियर की CSP हिना खान याद है ना
जिन्होंने ग्वालियर में हाल ही में दंगा होने से बचा लिया था।
वह सिर्फ एक शानदार पुलिस ऑफिसर नहीं बल्कि दरिया दिल इंसान है जो राह चलते नंगे ���ैर गरीब बच्चों को चप्पल दिलाने के लिए शोरूम ले गई।
तस्वीर 2021 की है लेकिन कहते हैं ना कि अच्छा काम हमेशा लोग याद करते हैं इसलिए तीन दिन से यह तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब घूम रही है
और उन्हें यह विश्वास होगा कि उनके बलिदान को भी राष्ट्र द्वारा सम्मान और मान्यता दी जाती है।
भवदीय,
[समस्त जेल वार्डर]
[उत्तर प्रदेश कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं]
समान शहीद का दर्जा और राजकीय सम्मान प्राप्त हो सके। साथ ही, उनके परिवारों को भी समान वित्तीय और सामाजिक सहायता सुनिश्चित की जाए।
आपके इस सकारात्���क कदम से कारागार विभाग के कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा
यह उनके मनोबल को प्रभावित करता है और उन्हें हतोत्साहित करता ह��।
अतः, मेरा आपसे विनम्र निवेदन है कि इस गंभीर विषय पर संज्ञान लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करें, ताकि भविष्य में ड्यूटी के दौरान या उसके बाद अपनी जान गँवाने वाले कारागार विभाग के कर्मियों को भी पुलिस विभाग के
इस तरह की घटनाएँ हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या कारागार कर्मियों का जीवन और उनका बलिदान कम महत्वपूर्ण है?
यह असमानता न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि कारागार विभाग के कर्मचारियों को यह महसूस कराती है कि उनका बलिदान पुलिस विभाग के कर्मियों के बलिदान से कम महत्वपूर्ण है।
लखनऊ कारागार में ड्यूटी के दौरान बंदियों द्वारा किए गए हिंसक हमले में जेल वार्डर श्री कृष्ण चंद्र पांडेय शहीद हो गए। उनका यह बलिदान कर्��व्यनिष्ठा का सर्वोच्च उदाहरण था, फिर भी उन्हें वह राजकीय सम्मान नहीं मिला जो पुलिस विभाग के शहीद को मिलता है।
उनके निधन को सामान्य मृत्यु की तरह देखा जाता है, और सार्वजनिक या राजकीय स्तर पर कोई औपचारिक सम्मान समारोह आयोजित नहीं होता। यह न केवल उनके बलिदान का अपमान है, बल्कि उनके परिवारों के मनोबल को भी तोड़ता है।
हाल ही में, इस विसंगति का एक हृदय विदारक उदाहरण सामने आया है।
यह सम्मान उस जवान के बलिदान को मान्यता देता है और उनके परिवार को ढांढस देता है।
इसके विपरीत, कारागार विभाग के किसी कर्मचारी की ड्यूटी के दौरान या बाद में आकस्मिक मृत्यु होने पर, उन्हें वह सम्मान और श्रद्धांजलि नहीं मिल पाती जिसके वे हकदा�� हैं।
यह अत्यंत खेद का विषय है कि जब पुलिस विभाग का कोई जवान अपनी ड्यूटी के दौरान या ड्यूटी के बाद भी आकस्म���क दुर्घटना,बीमारी के कारण शहीद होता है,तो उसे राजकीय सम्मान के साथ श्रद्धांजलि दी जाती है,उनके पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटा जाता है,और उनके परिवार को हर संभव सहायता दी जाती h
चाहता हूँ, जो न सिर्फ ड्यूटी के दौरान बल्कि अपने पूरे सेवाकाल में एक अत्यंत जोखिम भरे और तनावपूर्ण माहौल में काम करते हैं। ये कर्मचारी, जिनमें जेल वार्डर, उप कारापाल, और कारापाल जैसे पद शामिल हैं, अपनी जान जोखिम में डालकर समाज और देश की सुरक्षा में अपना योगदान देते हैं।
सेवा में,
महानिदेशक महोदय,
कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएँ,
उत्तर प्रदेश, लखनऊ।
विषय: ड्यूटी के दौरान शहीद हुए कारागार विभाग के कर्मियों को पुलिस विभाग के समान सम्मान एवं श्रद्धांजलि प्रदान करने हेतु
महोदय,
मैं आपका ध्यान कारागार विभाग के उन वीर कर्मचारियों के प्रति आकर्षित करना
इतनी प्यारी लड़की सिर्फ दहेज की वजह से मार दी गई.. और मारने वाला उसका पति किसी मलाल में नहीं है।
हेकड़ी के साथ पूरे टशन में कहता है
" पति-पत्नी के बीच लड़ाई होना सामान्य बात है. इतना ही नहीं, उसने कहा कि मुझे इस घटना का कोई पछतावा नहीं है. मैंने उसे नहीं मारा. पति-पत्नी के बीच झगड़े होते रहते हैं, यह बहुत सामान्य बात है"
निक्की की मां रो-रो कर कह रही है "मेरी लाडो चली गई.अब उसे वापस कौन लाएगा, वो हर काम कर लेती थी, हर काम में अच्छी थी"
निक्की के पति को और उसके ससुराल वालों को ऐसी सजा देनी चाहिए कि मिसाल बन जाए
क्या मस्त फिगर है....मेरे साथ ���लेगी....क्या साइज़ है...
उन्नाव के गंगा घाट कोतवाली के पास आकाश हर रोज खड़ा होकर लड़कियों पर ऐसे ही भद्दी भद्दी अश्लील फब्तियां कसता था।
और फिर इस बहादुर बेटी ने बीच सड़क आकाश को जमकर पीटा। लोग तमाशा देखते रहे वीडियो बनाते रहे लेकिन कोई इस बेटी का साथ देने नहीं आया।
थोड़ी देर के बाद पुलिस आई और आकाश को लॉक अप में बंद कर दिया