ॐ श्री गंगाई नाथाय नमः
दस, बीस, तीस की दिख गई मौत, और कहीं गलती से विचार आ गया, तू कौनसा अमर है, जाना तो तेरे को भी पड़ेगा, हम सब जानते हैं ना, मरना पड़ेगा, बचने का कोई उपाय है क्या ? फिर डरते क्यों हो? तो माया ने मौत को ऐसा डरावना बना दिया, कि कोई उसे स्वीकार करता नहीं और किसी को वो छोड़ती नहीं, समझे।
तो आपका विचार आ गया कि इस तरह से जाऊंगा तो बहुत घबरा जाओगे, फिर प्रार्थना करोगे, आंख बंद करके, यहां (आज्ञा चक्र) देखोगे कि प्रभु आप तो दयालु हो मैं तो बेवकूफ था, ये गलतियां हो गई, अबकी अबकी माफ़ कर दो, आंख बंद करके सिवाय उसके, ईश्वर के और कोई ध्यान नहीं, जैसे अर्जुन को चिड़िया दिखी थी उसके, ज्योंहि पलक झपकते के ही यहां दिख जाएगा सहस्त्रार में बैठा है वो तो, आज्ञा चक्र पे था, दिख गया तो ये जन्म आखिरी जन्म है। ईश्वर प्रत्यक्षानुभूति और साक्षात्कार का विषय है, हमारे दर्शन में। स्वामी विवेकानन्द ने साफ कहा है।
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ॐ श्री गंगाई नाथाय नमः
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1.स्थूल शरीर--- 💯
"यह वह शरीर है जिसे हम अपनी आँखों से देख सकते हैं और छू सकते हैं। यह पंचमहाभूतों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) से मिलकर बना है।
यह भौतिक संसार में हमारे सभी कर्मों और अनुभवों का माध्यम है। जागृत अवस्था में इसी शरीर की प्रधानता होती है।" ✨✨
2. सूक्ष्म शरीर ---💯
"यह स्थूल शरीर से सूक्ष्म होता है और इसे सामान्य आँखों से नहीं देखा जा सकता।
घटक:-इसमें 19 तत्व शामिल होते हैं:
5 ज्ञानेन्द्रियाँ (कान, त्वचा, आँख, जीभ, नाक)
5 कर्मेन्द्रियाँ (वाणी, हाथ, पैर, मलत्याग अंग, जनन अंग)
5 प्राण (प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान)
4 आंतरिक मन (मन, बुद्धि, अहंकार
और चित्त)
"यह शरीर सपनों की अवस्था में और मृत्यु के बाद भी सक्रिय रहता है। पुनर्जन्म के समय यही शरीर आत्मा के साथ आगे बढ़ता है।"✨✨
3. कारण शरीर ---💯
यह तीनों शरीरों में सबसे सूक्ष्मतम और मूल शरीर है। इसे 'कारण' इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह स्थूल और सूक्ष्म शरीरों का कारण है।"✨✨
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प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं एक बार जरूर ट्राई करें। सृष्टि पर एकमात्र तस्वीर जिसे साधक का ध्यान लगता है वह है गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग।
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जिसे सद्गुरु मिल जाए, उसे मंज़िल ढूँढने की ज़रूरत नहीं रहती—उसे केवल गुरु के बताए मार्ग पर चलते रहना होता है।
बाबा फरीद ने गुरु को आत्मा का मार्गदर्शक बताया। गुरु सियाग सिद्ध योग भी साधक को यही प्रेरणा देता है कि गुरु से प्राप्त मंत्र का श्रद्धा और नियमित साधना के साथ अभ्यास किया जाए। जब भीतर का शोर शांत होता है, तभी आत्मा सत्य की अनुभूति की ओर बढ़ती है।
गुरु की पहचान चमत्कार से नहीं, बल्कि उस परिवर्तन से होती है जो वे साधक के भीतर जगा देते हैं।
"गुरु पर विश्वास, मंत्र का अभ्यास और ईश्वर का अनुभव—यही साधना का सार है।" 🙏
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#JoinGuruPurnimaWithGSSY In Gurudev Siyag's siddhayoga the first five stages Yama, Niyama, Asana, Pranyama & Pratyahara happen automatically. Only the three progressively deeper stages of meditation take time
#JoinGuruPurnimaWithGSSY All other relationships r lost when the body decays, but Gurudev Siyag's siddhayoga helps u build a relationship with your Eternal Self thru mental chanting & meditation which lasts forever