दिल्ली विश्वविद्यालय के पिछले 10 साल से अध्यक्ष जाट और गुर्जर ही बने हैं
अब कुछ लोग वैसे ही फुक रहे हैं
जलते रहो DU में गुर्जर और जाटों की ही चलेगी
#DUSU_Election2026
राजस्थान के जाटों को वहम है कि DU में हमारी चलती है।
लगता है जोशलिन के चुनाव को ढंग से नहीं देखा...गलतफहमी दूर कर लो !!
वह तो हरियाणा है और दिल्ली के आसपास के मजबूत युवा है जो थोड़ा बहुत नाक रखते हैं !
तुम लोग ताकतवर होते तो हनुमान बेनीवाल ने आज खुद की सरकार बना ली होती
तुम हल्ला ज्यादा करते हो काम कम करते हैं !
Are जिसने खुद की जेब से पैसा लगाया है वो लिखवाएगा ही और चालान भी होगा तो वो अपनी ही जेब से भरेगा तुम लेबर क्लास से नहीं मांगेगा अब तुम कैब में सफर करते हो इसमें दूसरे की क्या गलती???
मोदी जी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनायें,,, चारों तरफ घी के दिए जलाये जा रहे हैं,,
नेताओं में होड़ लग रखी है राम रूपी भगवान को खुश करने की!
महिला प्रदेशाध्यक्ष रखी राठौर जी,,, कभी अपने किसी परिवारजन ,,,,बेटा - बेटी या पति के जन्मदिन पर भी इतने दीपक जलाये थे?
हां भाई, कहाँ है वो जाट और गुर्जर जो बोलते हैं…
दिल्ली जाटों की है… दिल्ली गुर्जरों की है…
BC, तुम्हारी दिल्ली में तुम्हारे आदमियों को बिना कारण नौकरियों से सस्पेंड किया जा रहा है,
कहे की “तुम्हारी दिल्ली है!”
भाई, हवाबाज़ी करो, पर वहम में मत रहो।
अब दिल्ली तुम्हारी नहीं, पुरबियों और बनियों की है!
उपमुख्यमंत्री प्रवेश वर्मा जी (@p_sahibsingh) जाटों के छोरे बिना कारण सस्पेंड किए जा रहे हैं।
शर्म आ रही है कि ना?
UPI की नींव 2007 में डॉ. मनमोहन सिंह जी की UPA सरकार में रखी गई थी।
⦿ 2007: Payments Law enact हुआ
⦿ 2008: NPCI DBT rollout हुआ
⦿ 2013: NPCI के माध्यम से 7 करोड़ गैस सिलेंडर के पेमेंट हुए
⦿ 2014: यह व्यवस्था 200 जिलों तक पहुंच चुकी थी
यानी नींव हमने रखी, इमारत भी हमने बनाई।
लेकिन मोदी सरकार ने इस पूरी व्यवस्था पर अपनी पुताई कर, इसे अमेरिकी कंपनियों के हाथों में दे दिया।
2026 में मोदी सरकार ने गरीबों पर वार करके अमेरिकी कंपनियों के लिए इस कारोबार का रास्ता खोल दिया।
: AICC सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स चेयरपर्सन @SupriyaShrinate जी
📍 दिल्ली
भाजपा दूसरों की कमाई से कमाने के चक्कर में UPI से भुगतान करने पर भी पैसे वसूलने का काम करनेवाली है। ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी क्या ऐसे बनेगी।
पेमेंट गेटवे से भी पैसा ऐंठनेवाली भाजपा ‘चुंगीजीवी’ बन गई है।
Bhai Chandra sahab ke ₹22,000 crores maaf nahi karte to India mein UPI agle 20 saal tak free chal jaata by government’s number of ₹8,000 crores subsidy.
Also NPCI - which runs UPI has ₹6,119 hard cash on its balance sheet and pre tax operating profit of ₹1,900 crores. NPCI apne cash pe and profits par zindagi bhar UPI free chala sakti hai. Government ka kuchh lena dena hi nahi hai. Government earned ₹1,000 crores tax from NPCI last year.
मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर फ़ीस लगाने का रास्ता खोल दिया है।
अब ₹2,000 से ऊपर के merchant UPI लेन-देन पर MDR लगाया जा सकता है। इन ट्रांजैक्शंस की संख्या भले ही सिर्फ़ 5% हो, लेकिन UPI के कुल transaction value का करीब 65% इन्हीं में है।
सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई फ़ीस नहीं ली जाएगी। लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फ़ीस आखिर आएगी कहां से? कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से।
अमेरिकी payment कंपनियां लंबे समय से भारत की zero-MDR नीति का विरोध करती रही हैं। अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है।
US Trade Deal की तरह ही, Compromised PM मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने surrender कर रहे हैं।
नरेंद्र मोदी ने पहले लोगों से कहा- UPI transaction करो, लेकिन अब उसी पर टैक्स लगा रहे हैं।
• पिछले साल 2025-26 में टोटल UPI ट्रांजेक्शन था- ₹314 लाख करोड़
• जिसका 66% मतलब ₹207 लाख करोड़ ₹2000 वाले transaction से ज़्यादा था
दरअसल, मोदी को वसूली की आदत है- वो जैसे ही लोगों को खर्च करते हुए देखते हैं, वसूली करने पहुंच जाते हैं।
ये दिखाता है कि इनकी नीयत में ही खोट है। इन्हें जनता की कोई चिंता नहीं है।
: AICC सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म चेयरपर्सन @SupriyaShrinate जी
आम राजपूत समाज के युवाओं को हनुमान जी का न्योता : राजा महाराजाओं की चाकरी बंद करके अलग राजनीती की शुरुआत करो, साथ मिलकर राजनीती करेंगे..... @hanumanbeniwal
मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी,
राजस्थान की डबल इंजन सरकार के लिए दुर्भाग्यपूर्ण विषय यह हैं कि प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण भर्ती संस्थाओं में से एक RPSC को लंबे समय से स्थायी नेतृत्व नहीं मिल पाया है। इससे भी गंभीर चिंता यह हैं कि जब RPSC की कार्यप्रणाली और साक्षात्कार प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों द्वारा लगातार गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
यदि किसी संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली पर जातिगत या सामाजिक पूर्वाग्रह के आरोप लग रहे हैं, तो सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराकर प्रदेश के युवाओं का भरोसा कायम करे। किसी भी अभ्यर्थी की योग्यता, प्रतिभा और बौद्धिक क्षमता का मूल्यांकन उसकी जाति, धर्म अथवा सामाजिक पहचान के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी योग्यता के आधार पर होना चाहिए।
RAS-2024 के साक्षात्कार परिणामों को लेकर भी कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जो साक्षात्कार प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं।
उदाहरण के तौर पर, लिखित परीक्षा में 302.5 अंक प्राप्त कर टॉपर रहने वाले अभ्यर्थी दिनेश विश्नोई को साक्षात्कार में 49 अंक मिले फिर भी अंतिम रैंक में टॉप किया। वहीं 296 अंक प्राप्त करने वाले एक अभ्यर्थी को साक्षात्कार में केवल 37 अंक मिले, फिर भी लिखित परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के कारण उन्होंने सातवीं रैंक हासिल की।
इसी प्रकार, लिखित परीक्षा में 271 अंक प्राप्त कर 13वीं रैंक हासिल करने वाले एक अभ्यर्थी को साक्षात्कार में मात्र 37 अंक दिए गए, जिसके परिणामस्वरूप उनकी अंतिम रैंक 42वीं हो गई। 247.5 अंक प्राप्त करने वाले एक अन्य अभ्यर्थी को भी साक्षात्कार में केवल 30 अंक दिए गए।
दूसरी ओर, लिखित परीक्षा में 82 अंक प्राप्त करने वाले एक अभ्यर्थी को साक्षात्कार में 50 अंक, 153 अंक वाले अभ्यर्थी को 59 अंक, 187 अंक वाले अभ्यर्थी को 60 अंक और 169 अंक वाले अभ्यर्थी को 56 अंक दिए गए। वहीं 217 अंक प्राप्त करने वाले एक अभ्यर्थी को साक्षात्कार में केवल 30 अंक मिले।
इन आंकड़ों को केवल संयोग कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जब लिखित परीक्षा में लगभग 300 अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में 30-37 अंक मिल रहे हो और 100 से भी कम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को 50-60 अंक तक दिए जा रहे हो, तो स्वाभाविक रूप से साक्षात्कार प्रक्रिया के मानदंड, मूल्यांकन प्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
सरकार को इन मामलों पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देना चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि साक्षात्कार में अंक देने के लिए कौन से वस्तुनिष्ठ मानदंड निर्धारित हैं तथा क्या सभी अभ्यर्थियों के साथ समान मापदंड अपनाए गए हैं।
मेरी सरकार से मांग हैं कि RPSC की RAS-2024 साक्षात्कार प्रक्रिया में सामने आए ऐसे सभी मामलों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। विशेष रूप से उन अभ्यर्थियों के मामलों की पारदर्शी समीक्षा होनी चाहिए, जिन्होंने लिखित परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, लेकिन साक्षात्कार में असामान्य रूप से कम अंक प्राप्त किए।
राजस्थान के युवाओं ने वर्षों तक मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की है। उनके लिए यह केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि उनके भविष्य और परिवार के सपनों से जुड़ा सवाल है। किसी भी स्तर पर यदि जातिगत पूर्वाग्रह, व्यक्तिगत पसंद-नापसंद अथवा किसी अन्य प्रकार का भेदभाव पाया जाता है, तो यह न केवल उस अभ्यर्थी के साथ अन्याय है, बल्कि पूरी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर आघात है।
RPSC जैसे संवैधानिक संस्थान में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
राजस्थान के हर युवा को यह भरोसा होना चाहिए कि उसकी मेहनत का मूल्यांकन उसकी योग्यता के आधार पर होगा, न कि उसकी जाति, धर्म, सामाजिक पहचान या किसी अन्य व्यक्तिगत आधार पर।
सरकार को इस पूरे मामले में चुप्पी तोड़नी चाहिए, तथ्यों को सार्वजनिक करना चाहिए और प्रदेश के युवाओं को न्याय दिलाना चाहिए।
@LokBhavanJaipur@RajCMO@RajGovOfficial
राजस्थान की जनता से अपील 🙏
टूटी सड़कें, जलभराव, बंद स्ट्रीट लाइटें, कचरे के ढेर, पट्टों के लिए भटकते लोग... यही है BJP सरकार की हकीकत।
कांग्रेस जीतेगी तो शहरों में काम होगा। 9 और 11 सितंबर को अपने वार्ड में कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में मतदान कर कांग्रेस को भारी बहुमत से विजयी बनाएं।
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार गंभीर शिकायतें उजागर हो रही हैं। विशेष रूप से जाति विशेष को टारगेट कर योग्य अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में अपेक्षाकृत कम अंक दिए जाने के आरोप बेहद गंभीर और चिंताजनक हैं।
RPSC की असिस्टेंट प्रोफेसर सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी (सुपर स्पेशियलिटी) भर्ती प्रक्रिया-2024 में लिखित परीक्षा में 89.93 अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान पर रहने वाले अभ्यर्थी को साक्षात्कार में मात्र 6 अंक देना और लिखित परीक्षा में पीछे रहने वाले अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में 13 अंक देकर मेरिट सूची में आगे लाने का आधार क्या था?
सिर्फ इस एक भर्ती तक ही मामला सीमित नहीं है, RAS-2024 भर्ती के साक्षात्कार में भी ऐसी ही गंभीर विसंगतियों के आरोप सामने आए हैं। सरकार को इन मामलों पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
RPSC में बैठे कुंठित एवं जातिवादी मानसिकता से ग्रसित लोग किसी अभ्यर्थी के साथ उसकी जाति या सामाजिक पहचान के आधार पर भेदभाव कर रहे हैं, यह तो अभ्यर्थियों के साथ सरासर अन्याय है। यह संविधान और समान अवसर की भावना पर सीधा प्रहार है।
सरकार को इन गंभीर शिकायतों का तत्काल संज्ञान लेकर RPSC की साक्षात्कार प्रक्रिया की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच करवानी चाहिए। लिखित परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में असामान्य रूप से कम अंक मिलने के मामलों की पारदर्शी समीक्षा आवश्यक है।
प्रदेश के युवाओं की मेहनत और सपनों के साथ कुठाराघात करना सरासर गलत है। आखिर RPSC जैसे संवैधानिक और महत्वपूर्ण संस्थान में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित क्यों नहीं की जा रही है?
बड़ा दुर्भाग्य यह भी हैं कि डबल इंजन वाली भाजपा सरकार RPSC को स्थायी नेतृत्व देने में भी असफल रही है। जातिवादी पूर्वाग्रह रखने वाले व्यक्ति को कमान सौंपेंगे तो न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है? RPSC सहित भर्ती संस्थाओं में नियुक्तियों और कार्यप्रणाली को लेकर लगातार उठ रहे सवाल सरकार की मंशा और प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करते हैं।
प्रदेश के सभी मेहनती एवं योग्य युवाओं को न्याय मिलना चाहिए। किसी भी युवा का भविष्य किसी व्यक्ति की जातिवादी मानसिकता, व्यक्तिगत पूर्वाग्रह या राजनीतिक संरक्षण की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए।
@LokBhavanJaipur@BhajanlalBjp@RajCMO@RajGovOfficial
फिर से कह रहा हूं। हमारे पुरखों की राह पर चलो। कंजूसी का जीवन जियो। कोई नशा मत करो। महंगे मकान मत बनाओ। महंगे सामाजिक समारोह मत आयोजित करो। फालतू के सामाजिक रीति-रिवाज़ों को मत मनाओ। वैसे किसके लिए इन सबका दिखावा करना हैं? हमारे घर तो हमारे भाई और संबंधी आते हैं,1/.
दंगाई राज सिंह शेखावत को दिल्ली पुलिस डिटेन करके ले जा रही थी उसके समर्थकों ने रास्ते की सारी गाड़ियों की चाभी निकालकर पुलिस वैन को रोक लिया,
आखिर इस गुंडे के समर्थकों को कार की चाभी निकालने का हक किसने दिया।
@DelhiPolice इन गुंडों पर कोई कार्यवाही होगा?