अब सामान्य ज्ञान का स्तर देखकर-सुनकर समझ में आया कि ये प्रतियोगी परीक्षाओं के विरोधी क्यों हैं?
उत्तर प्रदेश के युवा याद रखें ये वही हैं जिन्होंने बेरोज़गारों की बेरोज़गारी का मज़ाक़ उड़ाते हुए कहा था कि कमी नौकरी की नहीं है बल्कि युवाओं में योग्यता की कमी है।
अपने नाम रूप जो काम होना चाहिए, उस तक में तो ये लड़खड़ाते हैं और दूसरों पर अयोग्यता का आरोप लगाते हैं।
अगर इतना सामान्य ज्ञान नहीं है तो भला प्रदेश क्या चलाएंगे और ‘ज्ञान’ है पर किसी वजह से ‘ध्यान’ नहीं है तो ये और भी गलत बात है। कम-से-कम बाहर जाने पर तो संयम बरता जाए।
इससे संपूर्ण विश्व में उत्तर प्रदेश की छवि को गहरी ठेस पहुँची है, दुनिया कह रही है ऐसे लोगों के हाथ में अगर उप्र की बागडोर है तो फिर क्या ही उम्मीद करना।
वैसे इसका एक कारण ये भी हो सकता है कि इनके गुट के लोग तो स्वतंत्रता आंदोलन में थे नहीं, इसीलिए स्वतंत्रता सेनानियों का इतिहास ये भूमिगत भूमिका निभाने वाले लोग क्या जानें। ये ज्ञान नहीं एक कान से दूसरे कान तक बात पहुँचानेवाले लोग रहे हैं।