बिहार के उन छात्रों और युवाओं से मिला, जिन्होंने सिर्फ परीक्षा व्यवस्था में धांधली के खिलाफ आवाज़ उठाने पर भयंकर पुलिस बर्बरता झेली।
पुलिस की लाठियों, AK-47 और पिस्तौल से चली गोली ने कई छात्रों को घायल कर दिया। सेना में जाकर देश की सेवा करने की ख्वाहिश रखने वाले एक युवा का पैर AK-47 से गोली मारकर तोड़ दिया - साथ ही उनकी जिंदगी का सपना भी।
ये युवा सिर्फ निष्पक्ष अवसर, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और अपने अधिकार मांग रहे थे। ऐसी मांग पर लाठियां और गोलियां चलाने की क्या जरूरत थी?
और इतनी बड़ी बर्बरता की जिम्मेदारी सिर्फ कुछ छोटे अधिकारियों पर डालकर सरकार बच नहीं सकती। यह कार्रवाई या तो ऊपर के आदेश का नतीजा है या फिर सत्ता की घोर नाकामी।
बिहार सरकार कुछ भी कर ले मैं इन युवाओं के साथ खड़ा हूं। इनकी हर संभव मदद करने को तैयार हूं।
BJP याद रखे - युवाओं की आवाज़ दबाने वाली हर सत्ता को एक दिन जनता के सामने जवाब देना पड़ता है। वह दिन अब दूर नहीं है।
#ChhatronKiGoonj
@KrNeerajJadaun भाई जी को मैं व्यक्तिगत जानता हूं वह बहुत अच्छे और बहुत नेक दिल ईमानदार अधिकारी हैं वह गरीबों के मसीहा है भ्रष्टाचारियों के लिए बहुत बड़ा खतरा है।। नीरज भाई जी।।
@sspaligarh नीरज जादौन जी को व्यक्तिगत जानता हूँ वह गरीबों के मसीहा है हर इंसान की बात सुनते हैं जब से अलीगढ़ में आए हैं तब से गुंडागर्दी बिल्कुल खत्म हो चुकी है। जिस तरह से बात चल रही है वह बिल्कुल गलत है।।
@sspaligarh#neerajjadonji
साहिल की FIR दर्ज हुई। यह न्याय की तरफ़ पहला क़दम है।
पर सोचिए - एक FIR लिखने की इजाज़त तक गृह मंत्रालय से आनी पड़ी। अब समझ आया कि न्याय पर लगाम किसने लगा रखी है।
लगभग साढ़े सात घंटे बीत जाने के बाद और गृह मंत्री अमित शाह से अनुमति मिलने के बाद FIR दर्ज हुई। ये हालात तब बने, जब नेता प्रतिपक्ष @RahulGandhi जी ने साहिल और उसके परिवार को न्याय दिलाने के लिए दबाव बनाया और धरने पर बैठे।
@priyankagandhi@UdayBhanuIYC@IYC_UPWest@INCUPWest
ये न्याय का पहला कदम है- केस दर्ज किया गया है।
साहिल के शरीर और आंख में छर्रे हैं। इनके दिल के पास भी छर्रे लगे हैं, एक आंख से दिखाई नहीं दे रहा है।
हम सुबह 11:30 बजे FIR करवाने आए थे, लेकिन करीब 06:45 बजे FIR दर्ज की गई है।
सोचने वाली बात है कि जब दिल्ली के बीच मौजूद पुलिस स्टेशन पर न्याय मिलने में इतना समय लग रहा है, तो गांव और छोटे शहरों के पुलिस स्टेशन में क्या होता होगा।
हमने हिंदुस्तान के एक नागरिक और उसके परिवार के लिए न्याय मांगा और उसमें भी करीब साढ़े सात घंटे लग गए।
जब होम सेक्रेटरी और अमित शाह ने फाइनल परमिशन दी, तब जाकर पुलिस ने FIR दर्ज की। ऐसे में आप समझ सकते हैं कि FIR रोक कौन रहा था।
पुलिस FIR करना चाहती थी, लेकिन 'ऊपर' से न्याय पर ब्रेक लगा दी गई थी।
: नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi
नेता प्रतिपक्ष श्री Rahul Gandhi जी पीड़ित साहिल लोचव के साथ पुलिस के पास पहुंचे और कार्रवाई की मांग की। इसके बावजूद DCP द्वारा केस ऑफिसर और I/O नंबर उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।
14 अगस्त को साहिल लोचव अपने वकीलों के साथ दिल्ली पुलिस के पास लिखित शिकायत लेकर पहुंचे लेकिन उन्हें I/O नंबर तक नहीं दिया गया।
17 अगस्त को ईमेल और फोन के माध्यम से भी शिकायत पर कार्रवाई की मांग की गई लेकिन न I/O नंबर मिला। जब मामला संज्ञेय अपराध का है तो FIR दर्ज करना पुलिस की जिम्मेदारी है। फिर भी दिल्ली पुलिस FIR दर्ज करने से क्यों बच रही है?
नेता प्रतिपक्ष श्री @RahulGandhi जी पीड़ित साहिल लोचव के साथ पुलिस के पास पहुंचे और कार्रवाई की मांग की। इसके बावजूद DCP द्वारा केस ऑफिसर और I/O नंबर उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।
@UdayBhanuIYC@IYC_UPWest@IYC