कहानी: “माटी का वादा”
झारखंड के एक छोटे से गाँव में आदिवासी परिवार का बेटा मनोज था। उसका सपना था—खाकी पहनकर अपने गाँव की रक्षा करना। पिता खेतों में मजदूरी करते, माँ जंगल से लकड़ी लाती, ताकि मनोज पढ़ सके और अपने लोगों का सहारा बन सके।
किस्मत ने साथ दिया, और मनोज सहायक पुलिस में भर्ती हो गया। तनख्वाह कम थी, लेकिन उसे लगा—
"सेवा में गर्व है, पैसों में नहीं।"
लेकिन हकीकत उससे अलग थी। महीनों तक मनोज और उसके साथी नक्सल इलाकों में ड्यूटी देते, शहरों में धूप हो या बारिश हो तभी भी डियुटी करते,पसीना ही नहीं कभी-कभी खून भी बहता। फिर भी उन्हें सिर्फ "तेरह हज़ार रुपये मिलते।"
उधर राजधानी तथा अन्य क्षेत्रों में मुख्यमंत्री जी मंच से बार-बार कहते—
मैं अपनी माटी, अपने आदिवासियों का बेटा हूँ।
लेकिन जब उसी माटी के बेटे का हक मार लिया जाता, अधिकारियों के अन्याय से उसका मनोबल टूटता, तब मुख्यमंत्री जी खामोश रहते।
गाँव के लोग पूछते—
जब मुख्यमंत्री जी खुद को माटी का बेटा कहते हैं, तो क्या माटी के बेटों का दर्द सुनना उनका फर्ज़ नहीं?
मनोज ने उस दिन ड्यूटी पर खड़े-खड़े सोचा—
शायद हम इस माटी के बेटे हैं, लेकिन सरकार के लिए हम बस एक सस्ती ताकत हैं, जो चुपचाप जान दे भी दे, तो भी वे समझते हैं कि हमको ज्यादा दे रहे हैं।
और उस दिन मनोज की आँखों में सिर्फ़ गुस्सा नहीं, बल्कि अपने ही माटी के नेताओं से टूटा हुआ भरोसा भी था।
यही हकीकत है माननीय। कि आपलोग को लगता है कि हम सहायक पुलिस को 13000 ज्यादा दे दे रहे हैं। आज हमारे गांव में एक मजदूर को भी हमसे (433रू) से कहीं ज्यादा मिलता है। झारखंड के आम जनमानस से भी पुछ लिजीए की क्या एक सहायक पुलिस का पारिश्रमिक 13000 देना सही है या नहीं।
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#jharkhand_sahayak_police
माननीय मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM जी मुझे याद है सहायक पुलिस को लेकर विधानसभा में हमलोग ने कितनी लंबी लड़ाई लड़ी थी, उस वक्त आपने कहा था की इनका समायोजन पुलिस में कर लिया जाएगा परंतु एक साल से ऊपर हो गया सहायक पुलिस का ना समायोजन हुआ ना ही मानदेय में आपकी सरकार ने सम्मानजनक बढ़ोतरी किया उल्टा उनका अनुबंध समाप्त करने की धमकी दी जा रही है ..
मैं आग्रह करूँगा की यह सहायक पुलिस के बदौलत जो आज थोड़ा बहुत क़ानून व्यवस्था बचा है उस पर सहानुभूति पूर्वक विचार करें ..
@BJP4Jharkhand@yourBabulal
माननीय विधायक राजेश कच्छप एवं सहायक पुलिस वार्ता में शामिल तमाम विधायक,मंत्रीगण
एवं माननीय मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM जी से निवेदन पूर्वक कहना है कि माननीयों के साथ हुई वार्ता को सहायक पुलिस स्वीकार करती है लेकिन पूर्व में मिले दो दो बार धोखा से सहायक पुलिस कर्मी अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं। हम सभी सहायक पुलिस एवं सहायक पुलिस प्रतिनिधि कोई विपक्ष एवं किसी नेता के बहकावे में नहीं है हम सभी को राजनीति से कोई मतलब नहीं है हम सभी गांव गरीब के बच्चे हैं सरकार से अनुरोध है कि जो जो बिंदु पर सहमती बनी है उसे कैबिनेट द्वारा पारित करा कर जिलादेश कर दिया जाए । हम सभी सहायक पुलिसकर्मी खुशीपूर्वक सरकार को "धन्यवाद " देते हुए अपने अपने जिला को लौट जाएंगे। हम सभी ऐसा कोई भी काम नहीं करेंगे जिससे विधि व्यवस्था में दिक्कत हो। कैबिनेट से पारित होने तक हमलोग शांतिपूर्वक मोरहाबादी मैदान में बने रहेगें।
🙏🏿धन्यवाद🙏🏿
@JMMKalpanaSoren@IrfanAnsariMLA@DipikaPS@MithileshJMM@kumarsudivya@JharkhandCMO@JharkhandPolice@ranchipolice
पिछले 4 वर्षों से झारखण्ड राज्य के अग्नीवीर आंदोलनरत हैं पर इनकी तकलीफ़ को समझने वाला कोई नहीं है। राहुल जी आप तो झारखण्ड में सत्ता में हैं कृपया करके इनकी दुखों को दूर करने का पहल करें l धन्यवाद!
@RahulGandhi@ravishndtv@AdiwasiVoice@bhupeshbaghel
@naveenjindalbjp अब जब दिखा ही रहे हैं तो तो सबका दिखाईये हमारे राज्य के सारे cm कैसे रहते हैं किस किस होटलों में रुकते हैं सब दिखा दीजिए हमारे बहुत अच्छा होगा
@yourBabulal@JmmJharkhand नेता पक्ष को हो या विपक्ष का सब के सब भ्रष्टाचार में लिप्त है सब नेताओं का निष्पक्ष जांच करवा लिया गया तो सब नेता सलाकों के पीछे होंगे
ये बात अलग है कि जो पार्टी पावर में आती है जनता हो या विपक्ष का नेता दोनों पर शासन करती है
@HemantSorenJMMआपने सहायक पुलिस का सेवा विस्तार का ऐलान तो कर दिए लेकिन आपको भी पता है हमारा मानदेय मात्र 10000₹ है
आज का तारीख में 10000₹ में परिवार चलाना संभव नहीं है,ये आपको भी पता है फिर क्यों आप हमारी पीड़ा को महसूस नहीं कर पा रहे हैं🙏हमारे साथ न्याय कीजिए।@Jhsahyakpolice
@HemantSorenJMMआज आप कोल्हान की पावन धरती में बेरोजगार युवकों को रोजगार ऑफर लेटर दे रहे हैं, और इसी कोल्हान के 400 सहायक पुलिस पिछले 6 सालों से मात्र 10000₹ की मानदेय पर दिन रात एक करके राज्य की सेवा की, और आज वही बेरोजगार होने के कगार पर हैं; यह किस प्रकार का न्याय
मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM जी, एक तरफ धीरे-धीरे नक्सली घटनाएं बढ़ रही है तो दूसरी तरफ नक्सल प्रभावित जिलों में कार्यरत सहायक पुलिसकर्मियों की सेवा धीरे-धीरे खत्म करना कहाँ तक उचित है? आज जब देश आज़ादी का जश्न मना रहा है तो उनके चेहरे पर एक सवाल है कि उनका क्या होगा ?