नमः समस्तभूतानामादिभूताय भूभृते | अनेकरूपरूपाय विष्णवे प्रभविष्णवे ||
सृष्टि में वैविध्य स्वाभाविक है ! हमारी संस्कृति,परिवेश व भाषाएं भिन्न हो सकती है किंतु अखण्ड-आनंद प्राप्ति की चाह सभी में एक सी है; जो कि ईश्वरीय साक्षात्कार से संभव है।अतः अंतर्मुखी बनें ! #SanatanaDharma