ये महिला पहले तो रिजर्वेशन वाले डिब्बे में घुसी फिर मुस्लिम बुजुर्ग व्यक्ति ने उठने को कहा तो उसे गालीगलौज कर रही है।
सोशलमीडिया पर वायरल ये क्लिप अगर नफरती मीडिया के हाथ लग जाती तो इस बुजुर्ग के खिलाफ ही नैरेटिव के साथ चला देते।।
आप कितनी भी बड़ी तोप क्यों न हों, लोग सवाल तो पूछेंगे!
Chief justice of India Suryakant was in London.
This is what happened yesterday at Birkbeck University of London.
India has exported 11,581,070 kilograms of Sheep & Goat meat to the world in the year 2024-25. Mostly to United Arab EMTs, Qatar, Kuwait, Bahrain, and Oman.
Also, India exported 1,254,775,310 kilograms (about 1.25 billion kg) of Cara Beef in the year 2024-2025. It exported mostly to Vietnam, Egypt, Malaysia, Iraq and Saudi Arab. Majorly from Uttar Pradesh, Maharashtra, Andhra Pradesh, Telangana and Kerela.
Happy Bakra Eid wishes in Advance.
जितनी आसानी से आप रेहड़ी वाले, दुकान वाले, सब्जी वाले के पास पहुंच कर पूछ लेते हो कि माहौल क्या है, क्या आप ऐसे ही 12 साल में कभी अपने प्रधानमंत्री से एक बार भी पूछ पाए हैं कि माहौल क्या है मोदी? आपके अंदर हिम्मत भी है, काबिलियत भी है, लेकिन वो मौका ही नहीं देते, पास ही नहीं फटकने देते। सवालों से उन्हें साजिश की दुर्गंध आती रहती है।
अब आप विदेशी जमीन की ढाल बनकर परोक्ष रूप से उनका बचाव कर रहे हैं तो उनकी ही धारणा को बल दे रहे हैं, उन्हें सही ठहरा रहे हैं।
हमारे देश के राज्याध्यक्ष साल में कितनी बार राज्याध्यक्ष जैसा आचरण करते हैं? कभी कोई ऐसा हफ्ता गुजरा है जिसमें उन्होंने दोयम दर्जे के राजनैतिक आक्षेप ना किए हों?
और अंतिम बात ये कि ज्यादा जनसंख्या होना ना शक्ति की निशानी है, ना खराब व्यवस्था को ढकने का बहाना हो सकता है। सीधी सी बात ये है कि हमारा राज्याध्यक्ष गैर ज़िम्मेदार है, वो सवाल पूछने के मौके नहीं देता। किसी को कहीं भी मौका मिले तो पूछ लेना चाहिए।
प्रणाम।
यह आज का नार्वे का अखबार Dagavisen @Dagsavisen है। लिखता है कि 43 वर्षों में यह पहली बार है कि किसी भारतीय नेता ने नॉर्वे का दौरा किया है।
डागसाविसेन की टिप्पणीकार हेले ल्युंग स्वेन्सेन @HelleLyngSvends ने प्रेस कॉन्फ्रेंस से बाहर जाते समय मोदी से यह प्रश्न पुकारकर पूछा “आप दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस के प्रश्नों का उत्तर क्यों नहीं देते?”उन्हें कोई उत्तर नहीं मिला।
अखबार कहता है कि भारत को अक्सर दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है, लेकिन आज देश मोदी के सत्ता में आने के समय की तुलना में उल्लेखनीय रूप से कम लोकतांत्रिक हो गया है।
इस समय भारत में लोकतंत्र 1977 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर है, जबकि 1998 इसका सर्वोच्च बिंदु था।वास्तव में, उदार लोकतंत्र के वी-डेम सूचकांक में इससे भी निम्न स्तर देखने के लिए 1949 तक जाना पड़ेगा, जब भारत ब्रिटेन से स्वतंत्र हुआ था। V-Dem (Varieties of Democracy) लोकतंत्र पर दुनिया की सबसे बड़ी शोध परियोजना है।
अखबार कहता है“भारत की 15 प्रतिशत आबादी मुसलमान है, और आर्थिक विकास के साथ-साथ उनके प्रति भेदभाव बढ़ता गया है।मुद्दा केवल यह नहीं है कि मोदी की पार्टी भाजपा प्रभुत्व रखती है, बल्कि यह भी है कि वह किस प्रकार प्रभुत्व रखती है। वह हिंदू राष्ट्रवाद चिंताजनक है। उसमें ऐसे तत्व हैं जिन्हें उदारवादी सोच रखने वाले लोग पसंद नहीं कर सकते।
हिंदू राष्ट्रवाद एक राजनीतिक विचारधारा है, जो भारत को मुख्यतः एक हिंदू राज्य और संस्कृति के रूप में देखती है, जहाँ राष्ट्रीय पहचान हिंदू मूल्यों और परंपराओं से जुड़ी होती है।
CJI के एक बयान ने शुरू की देश की सबसे बड़ी "Lazy & Unemployed" क्रांति!
जब देश के युवाओं को 'कॉकरोच' कहा गया, तो उन्होंने विक्टिम कार्ड खेलने के बजाय अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी बना ली, 'Cockroach Janta Party'!
#CockroachMovement#CockroachJantaParty#AbhijitDipke
(1/2)
🇮🇳 Common People Ki Awaaz Banoge?
Toh iss movement ka hissa baniye. 🪳
📝 Join The Movement:
Aapki awaaz hi hamari taqat hai. ❤️
@CockroachJanta
https://t.co/arbqYpqPio
As expected, Indian right wing trolls are now doxxing Norwegian journalist @HelleLyngSvends. Sharing her mobile number and even her home address online.
The Cockroach Janta Party started as a joke after the CJI’s remarks, but has received enormous support & has garnered >55,000 members in just 2 days! Shows that there millions of youth fed up with the present system & parties & want something new. We should encourage them & steer them in the right direction
If you’re trying to reach me on Instagram or Facebook, I would like to let you know I have been suspended from both accounts. I have wanted to respond to as many Indians as possible, but my responses will now be delayed. I hope I will get my accounts back. @Meta
अखबार के प्रतिनिधि चाहते थे कि इंटरव्यू आमने-सामने बैठ कर किया जाए। अखबार ने न सिर्फ इंटरव्यू करने से इनकार कर दिया, बल्कि यह बात पूरी दुनिया को भी बता दी थी।
https://t.co/5pwsl27KaQ
10 Apr 2015 को फ्रांस के दौरे पर नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू वहां के मशहूर अखबार 'ल मॉन्द' ने छापने से इनकार कर दिया था,इसकी वजह ये थी कि पीएम मोदी चाहते थे कि उन्हें इंटरव्यू से पहले प्रश्न भेज दिए जाएं और वह उनका उत्तर लिखकर देंगे। अखबार इसके लिए तैयार नहीं हुआ।