राजस्थान में 11 वर्षों से कार्यरत व्यावसायिक शिक्षकों का भी भला कर दो 3 माह से 11 माह तक कि सैलरी बकाया है, ठेका प्रथा से शोषण का शिकार है अन्य राज्यों में स्थाई नीति बन गईं राजस्थान में क्यों नहीं??
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व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत कार्यरत व्यावसायिक शिक्षक अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए आज मैदान में आ चुके हैं जॉब सिक्युरिटी , नियुक्ति , बकाया वेतन |
शिक्षा संकुल जयपुर का दृश्य
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माननीय @rashtrapatibhvn@dpradhanbjp#राजस्थान राज्य में #कौशल#शिक्षा पर आधारित #व्यावसायिक शिक्षा 11 साल से संचालित है जो ठेके पर चल रही है जिनका ठेका #सितंबर#माह में पूरा हो रहा है जो शिक्षा विद्यार्थियों के हुनर को तरासती हैं यदि इस तरह कौशल शिक्षा चलेगी तो भारत कैसे विकसित #भारत बनेगा | भारत सरकार व राज्य सरकार से अपील है की व्यावसायिक शिक्षकों को नियमित किया जाए |
क्या शिक्षा ठेके पर चलनी चाहिए?? @MSDESkillIndia
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राजस्थान में व्यावसायिक शिक्षा = शोषण+ठेका+वेतन बंद
राजस्थान की सरकारी शिक्षा व्यवस्था का एक कड़वा सच इन दिनों चुपचाप, गुमनाम और बेहाल हो रहा है। नाम है व्यावसायिक शिक्षक।
ये वही शिक्षक हैं जो स्किल इंडिया के पोस्टर बॉय हैं, जो प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत देश की युवा पीढ़ी को हुनरमंद बनाने आए थे। लेकिन पिछले 16 महीने से इन शिक्षकों को एक भी पैसा वेतन नहीं मिला। कारण? IISD और IDAKSHA जैसी कंपनियों की लापरवाही, संवेदनहीनता और सरकार की खामोशी।
राजस्थान सरकार ने सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा देने के लिए निजी कंपनियों को टेंडर दिया, लेकिन ये कंपनियां न तो समय पर वेतन देती हैं, न छुट्टी, न मातृत्व अवकाश, न ही चिकित्सा सुविधा। सबसे शर्म की बात तो ये कि राजस्थान का शिक्षा संकुल इन सब अनियमितताओं को जानते हुए भी इन कंपनियों का अनुबंध 3 महीने और बढ़ा देता है। क्या यही डबल इंजन की सरकार का डिलीवरी मॉडल है? हरियाणा मॉडल में शिक्षकों को समय पर वेतन, मातृत्व अवकाश, आपातकालीन छुट्टियां और चिकित्सा अवकाश मिलता है। राजस्थान में? सिर्फ टेंडर, एक्सटेंशन और प्रेस रिलीज।
सरकार को जवाब देना होगा...
- IISD और IDAKSHA के साथ जारी अनुबंध क्यों नहीं रद्द किए गए?
- क्यों नहीं राज्य सरकार खुद हरियाणा मॉडल लागू करती?
- शिक्षा संकुल परिषद के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं?
यह सिर्फ शिक्षकों की लड़ाई नहीं है। यह उस व्यवस्था का आइना है जिसने शिक्षा को संविदा, ठेका और टेंडर के हवाले कर दिया है। वहीं, शिक्षकों को डिजिटल गुलाम बना दिया है। शर्म आती है, जब डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया का नारा देने वाले शासन में एक शिक्षक 16 महीने से बिना वेतन अपनी बेटी की दवा नहीं खरीद पाता। शिक्षा का गला घोंटकर कोई राष्ट्र निर्माण नहीं होता।
(राजस्थान संयुक्त कर्मचारी एवं मजदूर महासंघ पत्र, शिक्षकों के बयान व ग्राउंड इनपुट के आधार पर यह लेख लिखा गया है।
@skbishnoi164@madandilawar@RajCMO