बरेली शरीफ़ में “आई लव मोहम्मद ﷺ” के नाम पर जो कुछ हुआ और जिस तरह पुलिस ने बर्बरता दिखाई, वह पहले से रची गई साज़िश और योजना का हिस्सा था। पुलिस ने मौलाना तौक़ीर रज़ा ख़ान को घर में नज़रबंद कर दिया और बाहर निकलने नहीं दिया। इसके बावजूद भीड़ पर लाठियाँ बरसाई गईं और बाद में पुलिस ने यह दावा किया कि भीड़ ने पत्थरबाज़ी की, जबकि इसका कोई सबूत अब तक पेश नहीं किया जा सका।
मौलाना तौक़ीर रज़ा ख़ान की गिरफ़्तारी बेहद निंदनीय और दुखद है। उन पर लगाए गए तमाम आरोप पूरी तरह ग़लत और मनगढ़ंत हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान साफ़ तौर पर यह दर्शाता है कि बरेली की घटनाओं और मौलाना की गिरफ़्तारी के पीछे सुनियोजित योजना थी। यह मुसलमानों को यह संदेश देने की कोशिश थी कि किसकी सरकार है और इस दौर में वे अपने नबी से मोहब्बत का इज़हार तक नहीं कर सकते, यहाँ तक कि “आई लव मोहम्मद ﷺ” का पोस्टर भी नहीं लगा सकते।
मौलाना ने हमेशा संविधान के दायरे में रहकर मुसलमानों पर होने वाले अत्याचार और अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद की है। योगी का बयान ऐसा लगता है जैसे उन्होंने किसी बादशाह को कैद कर बड़ी जीत हासिल कर ली हो।
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