कोई कहानी नई तो
कोई पुरानी हो गई
जिंदगी की वही फिर
मेहरबानी हो गई
मुस्कुरा के कोई देखा करता था
अपने खिड़की से, मझे
आज वही नहीं फिर हम दोनों की
जवानी हो गई
पतझड़ आई बहारों में
जमी में फिर वही बरसात की पानी हो गई
आज फिर हम दोनों की कुछ मेहरबानी हो गई
प्रज्ञा त्रिपाठी शायर ♥️