87 वर्षीय आसाराम बापू की बिगड़ती तबीयत के बीच अब सुप्रीम कोर्ट का रुख करना बहुत जरूरी!
6 अगस्त के आदेश में स्वास्थ्य बिगड़ने पर दोबारा अदालत आने की अनुमति दी गई थी।
स्वास्थ्य सर्वोपरि है। समय पर उपचार जरूरी है। #RightToHealth
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No. 371
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क्या सच में मानवता मर गई है?
90 वर्षीय आसाराम बापू जी को गंभीर बीमारियों में उपचार की अनुमति क्यों नहीं?
हाईकोर्ट ने पुरानी अर्जी पर सुनवाई के बजाय नई अर्जी लगाने को कहा!
क्या मानवीय आधार पर उपचार का अधिकार भी नहीं?
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90 वर्ष की उम्र,13 साल का कारावास!
आसाराम बापू के मामलों में FIR और साक्ष्यों पर बचाव पक्ष के सवाल!क्या अनुच्छेद 21 के तहत स्वास्थ्य व निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार नही?
क्या वृद्धावस्था में स्थायी जमानत मानवीय आधार पर नहीं मिलनी चाहिए?
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No.369
90 वर्षीय संत के साथ अमानवीय व्यवहार क्यों?
Critical Health में सरेंडर करने पहुंचे संत आसाराम बापू पर देरी के कारण FIR दर्ज!
जब देरी में सरकारी अड़चनें थीं,तो FIR क्यों?क्या उम्र और बीमारी का भी लिहाज नहीं? #JusticeForBapuji
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जयपुर जेलब्रेक, जोधपुर जेल में मोबाइल बरामदगी, निरीक्षण विवाद और कैदियों की भूख हड़ताल—जेल अधीक्षक प्रमोद सिंह की कार्यशैली पर सवाल क्यों?
अब आसाराम बापू के मामले में FIR भी चर्चा में है।
क्या प्रमोद सिंह की निष्पक्ष समीक्षा होगी?
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No.368
89 वर्षीय गंभीर रूप से बीमार आसाराम बापू जोधपुर जेल में बंद हैं।
जेल के एक कैदी को चिकित्सा देरी पर हाईकोर्ट ने चिंता जताई।
बापूजी के इलाज की जिम्मेदारी कौन लेगा?क्या उम्र और बीमारी के आधार पर कानूनी राहत नहीं मिलनी चाहिए?
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No. 10
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2016 में दैनिक भास्कर ने उड़ान में देरी को आसाराम बापूजी के समर्थकों के हंगामे से जोड़कर खबर फैलाई, जबकि Jet Airways ने उड़ान में देरी की शुरुआती वजह Bird Strike बताई थी।
क्या तथ्यों से ज़्यादा सनसनी को महत्व दिया गया?
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No. 8
#DainikBhaskarNewsLaundering
दैनिक भास्कर के इतिहास का एक अहम तथ्य:2009 में तत्कालीन चेयरमैन रमेश चंद्र अग्रवाल को "राजीव गांधी लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड" मिला था।
यह साफ दर्शाता है कि अखबार का झुकाव सत्ता की तरफ कैसा रहा है।
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No. 7
#DainikBhaskarExposed
दैनिक भास्कर की विश्वसनीयता पर सवाल क्यों न उठें?
दूसरों से जवाबदेही मांगने वाला खुद सवालों से परे क्यों रहे?
पत्रकारिता की विश्वसनीयता सवाल पूछने से नहीं, अपने ऊपर उठे सवालों का जवाब देने से बनती है।
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No. 6
दैनिक भास्कर में काम कर चुके एल.एन शीतल ने बताया कि कोई भी अखबार या न्यूज चैनल ‘पवित्र गाय’ नहीं है,जिसे रक्षा-कवच प्राप्त हो।
अखबार के नाम पर जमीने हड़पने और पाठकों को भड़काने का दुष्कर्म करने में @DainikBhaskar सबसे आगे है।
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No. 5
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जब पत्रकारिता पैसे और TRP के लिए बिक जाए, तो उसकी निष्पक्षता खत्म हो जाती है।
ऐसी पत्रकारिता, पत्रकारिता नहीं रहती — वो दलाली और भ्रामक खबरों का अड्डा बन जाती है, जहाँ पैसे के लिए कुछ भी छापा या दिखाया जा सकता है।
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No. 4
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मेरे खिलाफ 10 से ज्यादा POCSO केस दर्ज हैं, फिर भी आराम से बैठा हूं— दैनिक भास्कर के मालिक LP पंत का कबूलनामा
सवाल सीधा है: यही स्थिति किसी आम आदमी की होती, तो क्या उसे भी इतनी राहत मिलती?
क्या कानून सबके लिए बराबर है?
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No. 2
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दूसरों पर कीचड़ उछालने से पहले अपना दामन देख लेना चाहिए। @pantlp
दैनिक भास्कर के मालिक सुधीर अग्रवाल और उनके सहयोगियों पर POCSO के गंभीर आरोप हैं, लेकिन मजाल है कि अखबार में एक शब्द भी छपे!
इसे कहते हैं—अपने ही 'आका' की गोद में बैठी पत्रकारिता ।
@ManishKasyapsob
No. 1
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दैनिक भास्कर से एक सीधा सवाल...
अपने MD सुधीर अग्रवाल व @pantlp पर POCSO मामले की खबरों पर चुप्पी क्यों?
वहीं, हमेशा संत आसाराम बापू के खिलाफ नकारात्मक खबरें, क्यों?
@DainikBhaskar क्या यही निष्पक्ष पत्रकारिता है?
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पत्रिका @patrika_mp का दावा है कि आसाराम बापू ने खुद को नपुंसक बताया और पोटेंसी टेस्ट से पोल खुल गई।
कथित बयान का प्रमाण कहाँ है?क्या आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद है?
@AmdAshram प्रबंधन खबर की कानूनी समीक्षा कर उचित कार्रवाई पर विचार करे।
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आसाराम बापू थर्रा गए, गलती मान ली! @rpbreakingnews पत्रिका के दावे का स्वतंत्र प्रमाण कहां है? जब किताब में घटनाओं को नाटकीय ढंग से पेश करने का जिक्र है, तो कथित बातचीत को सच कैसे मानें?
पत्रकारिता में सनसनी नहीं, प्रमाण जरूरी हैं।
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No. 365
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अरविंद भदौरिया सर, आपने प्रेमानंद जी महाराज को “धर्म के धंधे का प्रोडक्ट” और आसाराम बापू को “बलात्कारी” किस प्रमाण के आधार पर कहा?
क्या बिना ठोस प्रमाण संतों पर ऐसे आरोप लगाना ही आपकी तार्किकता और वैज्ञानिक सोच है?
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No.364
@ajeetbharti आसाराम बापू पिचकारी से क्या करते थे वो भी देख ले और क्यो करते थे वो भी देख ले।
सनातन को बाहरी नहीं,अपनों की गलत सोच से भी खतरा है।
जिस UGC रोलबैक के लिए लड़ रहे हो,उसी का सेम पैटर्न POCSO कानून है। @maltnewss
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No.363
हिंदुत्व की राजनीति और संतों से विश्वासघात?
स्वामी लक्ष्मणानंद को न्याय क्यों नहीं मिला,दारा सिंह की रिहाई का विरोध क्यो और आसाराम बापू की रिहाई के लिए पहल क्यों नहीं?
विपक्ष में हिंदुत्व की बात और सत्ता में अलग रवैया क्यों?
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No.362
संतो का सरकारीकरण या वोट बैंक की राजनीति?
क्या सत्ता के करीब रहने वाले संतो को प्रचार और सवाल उठाने वाले संतों को विवाद मिलते हैं?
आसाराम बापू,प्रेमानंद महाराज और अन्य संतों को लेकर मीडिया का अलग-अलग रवैया सवाल खड़े करता है।
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