कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल 25 और 26 अक्टूबर को राजस्थान और पंजाब के दौरे पर जाएंगे। इस दौरान वो 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान होने वाली रैली की तैयारियों की बैठक लेंगे। वेणुगोपाल इसके अलावा पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, PAC मेंबर, जिलाध्यक्षों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान पंजाब कांग्रेस के प्रभारी महासचिव सचिन पायलट भी मौजूद रहेंगे।
@GovindDotasra पहली बार प्रदेश में ऐसा देखा जा रहा है कि, सरकार पर विपक्ष के धरना प्रदर्शनों का रती भर भी असर नहीं हो रहा!
ऐसा तभी होता है, जब विपक्ष के जिम्मेदार नेता अपने पापों की फाइलें खुलने के खौफ़ मे सरकारों से सहमें हों और दिखावे की नौटंकी करते हों।
ਕਪੂਰਥਲਾ ਤੋਂ ਸਾਹਮਣੇ ਆਈ ਇਹ ਵੀਡੀਓ ਪੰਜਾਬ ਦੀ ਭਿਆਨਕ ਹਕੀਕਤ ਨੂੰ ਉਜਾਗਰ ਕਰਦੀ ਹੈ। ਬੱਚੇ ਅਤੇ ਨੌਜਵਾਨ ਨਸ਼ਿਆਂ ਦੇ ਜਾਲ ਵਿੱਚ ਫਸ ਰਹੇ ਹਨ, ਜਦਕਿ ਸਰਕਾਰ ਇਸ ਗੰਭੀਰ ਸੰਕਟ ਨਾਲ ਨਜਿੱਠਣ ਵਿੱਚ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਨਾਕਾਮ ਨਜ਼ਰ ਆ ਰਹੀ ਹੈ।
ਸਮਾਜ ਨੂੰ ਨਸ਼ਿਆਂ ਦੀ ਇਸ ਦਲਦਲ ਵਿੱਚ ਧੱਕਿਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਪਰ ਇਸ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਕੋਈ ਪ੍ਰਭਾਵਸ਼ਾਲੀ ਕਦਮ ਨਜ਼ਰ ਨਹੀਂ ਆ ਰਹੇ। ਗੈਰ-ਕਾਨੂੰਨੀ ਦਵਾਈਆਂ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਸਿੰਥੈਟਿਕ ਨਸ਼ਿਆਂ ਤੱਕ, ਨਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਜਾਲ ਪੂਰੇ ਸਿਸਟਮ ਵਿੱਚ ਡੂੰਘੀਆਂ ਜੜ੍ਹਾਂ ਫੈਲਾ ਚੁੱਕਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇੱਕ ਪੀੜ੍ਹੀ ਨੂੰ ਤਬਾਹ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹੈ।
ਪੰਜਾਬ ਦਾ ਭਵਿੱਖ ਅੱਜ ਗੰਭੀਰ ਸੰਕਟ ਦੇ ਕੰਢੇ ਖੜ੍ਹਾ ਹੈ। ਸੂਬੇ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਪ੍ਰਤੀ ਚਿੰਤਾ ਜਤਾਉਣ ਦੇ ਦਾਅਵੇ ਕਰਨ ਵਾਲੀ AAP ਅਤੇ BJP ਦੋਵੇਂ ਆਪਣੀ ਜਵਾਬਦੇਹੀ ਤੋਂ ਭੱਜਦੀਆਂ ਨਜ਼ਰ ਆ ਰਹੀਆਂ ਹਨ।
कपूरथला से सामने आया यह वीडियो पंजाब की भयावह हकीकत उजागर करता है। बच्चे और युवा नशे की गिरफ्त में हैं, जबकि सरकार इस गंभीर संकट से निपटने में पूरी तरह नाकाम नजर आ रही है।
समाज को नशे के इस दलदल में धकेला जा रहा है, लेकिन इस पर रोक लगाने के लिए कोई प्रभावी कदम नजर नहीं आ रहे है। अवैध दवाओं से लेकर सिंथेटिक ड्रग्स तक, नशे का जाल पूरे तंत्र में गहरी पैठ बना चुका है और एक पूरी पीढ़ी को तबाह कर रहा है।
पंजाब का भविष्य आज गहरे संकट के मुहाने पर खड़ा है। प्रदेश की जनता के प्रति चिंता जताने का दावा करने वाली AAP और BJP के पास अपनी जवाबदेही का अभाव है।
@INCPunjab@INCIndia
@dineshbohrabmr निकाय चुनावों मे करनी सेना भाजपा को वोट न देने की मार्मिक अपील कर चुकी है,उसी दरम्यान दिल्ली जंतर मंतर से करनी सेना को भगाया दौड़ाया जा रहा था।
हुआ क्या?
कुल 10 नगर निगमों में भाजपा 9 पर कब्जा कर चुकी है।
जो वोटबैंक किसी पार्टी का खास समर्थक या विकल्पहीन होता है, यही दशा होती है
MLA/MP से बड़ी टिकट या पार्टी का आशीर्वाद और क्या हो सकता है!इनके लिए तो IAS-IPS-धन्नासेठ तक तरसते हैं,फिर भी संतोष नही है।
जो बड़े पदों पर रहते रिश्तेदारों को थोक मे अधिकारी बना चुके,जितना लूटना था,लूट चुके, वो ज्यादा हड़क रहे हैं।
कार्यकर्ता क्या जीवन भर दरियाँ ही बिछाते रहे?
"जल ही जीवन" है,इसीलिए सदियों से राहगीरों व गरीबों को पानी पिलाने की परंपरा रही है। 'प्याऊ' लगाना बड़े धर्म का कार्य माना जाता है।
इस महाशय पर सैकड़ों करोड़ के पेयजल के पैसे डकारने के आरोप हैं,फिर भी जमानत मिलने पर जश्न तो ऐसे मना/मनवा रहे हैं,जैसे बड़ा पुण्य कर लौटे हों।
@Kapil_Jyani_ महाराष्ट्र,मध्यप्रदेश जैसे दर्जन भर राज्यों की चुनी सरकारों को भाजपा धराशायी कर चुकी है,तब चिंता नहीं हुई थी क्या?
कांग्रेस से चुनी हुई सरकार को कोई खतरा नहीं है,देश का मूड और युवाओं के आक्रोश को भाँपकर सरकार की बैसाखियाँ ही पल्ला झाड़ ले तो अलग बात है।
कांग्रेस क्यों चाहेगी कि,अखिलेश यादव up के CM बने?
ऐसा हुआ तो,भाजपा विरोधी वोट समाजवादी मे शिफ़्ट हो जाएगा और 2029 मे SP भी वही तेवर दिखाएगी,जैसे 2024 मे केजरीवाल व दीदी ने दिखाए थे,दीदी व केजरीवाल cm पद जाने पर ही नरम पड़े हैं। इसीलिए कांग्रेस भी भाजपा की तरह निपटाने मे लगी है।
यूपी चुनाव के लिए कांग्रेस ने छांट लीं 170 सीटें!
यूपी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों को लेकर बातचीत शुरू हो गई है. कांग्रेस ने सपा को करीब 170 सीटों की सूची सौंपी है.
इससे पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में 114 सीटों पर चुनाव लड़ा था. जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 399 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन जीत सिर्फ दो सीटों पर मिली थी.
हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की छह सीटें जीती थीं.
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‘आसान भाषा में’ समझिए,
- हूती लड़ाके कौन हैं और उनकी खास पहचान क्या है?
- हूती लड़ाके बच्चों को लड़ाई में कैसे शामिल करते हैं?
- हूती लडके किस चीज़ का नशा करते हैं? और इसका क्या असर होता है?
पूरा एपिसोड- https://t.co/YdzKdgfaYl
@ktakshish
[Houthis, Yemen, Saudi Arabia, Iran]
चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कैबिनेट सचिव से शिकायत की थी.
लेकिन कैबिनेट सचिवालय ने इन शिकायतों पर कार्रवाई करने से मना कर दिया. वजह बताई कि ये चिट्ठियां चुनाव आयुक्तों ने अपनी निजी हैसियत से लिखीं, न कि पूरे चुनाव आयोग की ओर से.
कैबिनेट सचिवालय का कहना है कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है. उसके कामकाज में सरकार का दखल नहीं होना चाहिए.
इसलिए पूरे आयोग की ओर से आधिकारिक चिट्ठी आए बिना, इन शिकायतों पर कार्रवाई करना ठीक नहीं होगा. RTI से सामने आए दस्तावेजों से ये जानकारी सामने आई है.
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@8PMnoCM गुणवत्ता व मानकीय दृष्टिकोण से तो राज्य स्तर पर ही खरीद होनी चाहिये,सस्ते भी पड़ेंगे और @BhajanlalBjp सरकार की सीधी जवाबदेही भी तय होगी।
मंत्री जी ने कुछ साल पहले अपने स्तर पर जो खेल किट खरीदेकर स्कूलों को थोपे थे,उसकी गुणवत्ता की व्यापक स्तर पर कड़ी आलोचना हुई थी,इसलिए डरे हैं।