मारवाड़ री माटी रा, सोने जेड़ा चमकता रेत रा धोरो और उणरे ऊपर हालता ऊंट और अटे रा मिनख मानें घणा ही सोवणा लागे।
बाकी पुराणे जमाने री तो बातें ही न्यारी है, पुराणे जमाने रा मिनख और मिनखा री बाता, उणरो सार ही अलग है।
और राजनीति सारी एक-दूसरे री वफादारी ऊं चालती।
#TharPoltics
सियासत जब सरोकारों की ज़मीन पर उतरती है..."
लोकतंत्र केवल पाँच साल में एक बार मतदान करने का नाम नहीं है, बल्कि यह हर दिन जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की एक अनवरत साधना है। बाड़मेर-जैसलमेर-बालोतरा के लोकप्रिय, कर्मठ और सादगी की मिसाल आदरणीय सांसद श्री उम्मेदाराम बेनीवाल @UmmedaRamBaytu जी का दो वर्ष का कार्यकाल (2024-2026) इसी सेवा साधना का एक जीवंत प्रमाण बनकर उभरा है।
अक्सर कहा जाता है कि मरुस्थल की भौगोलिक चुनौतियाँ विकास की राह में रुकावट बनती हैं, लेकिन जब नीयत साफ़ हो और इरादे बुलंद हों, तो यही मरुधरा प्रगति की नई परिभाषा लिखती है।
1. "शिक्षा ही संकल्प" – आने वाली पीढ़ी के सुनहरे कल की बुनियाद
एक संवेदनशील जनप्रतिनिधि तात्कालिक लोक-लुभावन घोषणाओं के बजाय आने वाली पीढ़ियों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करता है। बेनीवाल जी ने अपनी सांसद निधि का 82.14% हिस्सा (लगभग ₹7.98 करोड़) केवल शिक्षा क्षेत्र के सुधार में समर्पित कर देश के सामने एक अभूतपूर्व उदाहरण पेश किया है।
• आधुनिक शिक्षा: सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम का निर्माण।
• ढांचागत विकास: नए स्कूल भवनों और आधुनिक कक्षा-कक्षों का निर्माण।
• संसाधनों का लोकतंत्रीकरण: समृद्ध पुस्तकालयों की स्थापना और युवाओं के शारीरिक विकास हेतु खेल मैदान व खेल उपकरणों की उपलब्धता।
2. कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचा – विकास की नई रफ़्तार
सुदूर मरुस्थलीय गांवों और ढाणियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बुनियादी ढांचे का ऐतिहासिक सुदृढ़ीकरण किया गया है:
• सड़कों का जाल: प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत ₹824.70 करोड़ की लागत से 1278.86 किलोमीटर नई सड़कों का निर्माण।
• महामार्ग कनेक्टिविटी: NH-11 को NH-68 से जोड़ने वाली ₹1237 करोड़ की विशाल परियोजना।
• रोशनी की किरण: सीमावर्ती ढाणियों को रोशन करने हेतु घरेलू विद्युत कनेक्शन के लिए ₹459 करोड़।
• रेलवे का सुदृढ़ीकरण: सुदूर क्षेत्रों को जोड़ने वाली जैसलमेर-भाभर रेल परियोजना के सर्वेक्षण हेतु ₹10 करोड़ की स्वीकृति और कई नई व बंद ट्रेनों का पुनः संचालन।
3. संसद में गूंजती जनता की बुलंद आवाज
बेनीवाल जी केवल क्षेत्र में ही सक्रिय नहीं रहे, बल्कि देश की सबसे बड़ी पंचायत (लोकसभा) में बाड़मेर-जैसलमेर के हक की आवाज को पूरी प्रखरता के साथ बुलंद किया है:
• 99% उपस्थिति: सदन की कार्यवाही में उनकी असाधारण और अनुकरणीय उपस्थिति।
• 39 बहसें और 119 प्रश्न: स्थानीय समस्याओं को लेकर सरकार से सीधे और तीखे सवाल।
• जमीनी सरोकार: संसद में जल जीवन मिशन की अनियमितताओं (घोटाले) के खिलाफ आवाज उठाना, बेमौसम बारिश से बेहाल मरुस्थलीय किसानों के मुआवजे की मांग, सीमावर्ती क्षेत्र विकास योजना (BADP) का विस्तार, युवाओं को दलदल में धकेल रही नशा तस्करी (MD/स्मैक) के खिलाफ कड़ा रुख, और स्थानीय युवाओं को रोजगार देने हेतु सीमेंट फैक्ट्री व रेलवे कारखाने की स्थापना की मांग।
संदेश:
"उम्मेदाराम बेनीवाल जी का यह दो साल का रिपोर्ट कार्ड केवल कागजी आंकड़ों का पुलिंदा नहीं है। यह अक्स है उनकी ईमानदारी का, उनकी कर्मठता का और जनता के प्रति उनके निश्छल समर्पण का। भारतीय राजनीति को आज इसी तरह के जन-केंद्रित, पारदर्शी और वैचारिक रूप से समृद्ध नेतृत्व की आवश्यकता है।"
आइए, मिलकर इस सकारात्मक बदलाव और सच्चे जनसेवक के प्रयासों की सराहना करें, क्योंकि जब ऐसे प्रतिनिधि आगे बढ़ते हैं, तभी हमारा देश प्रगति के नए शिखर छूता है।
#शिक्षा_ही_संकल्प #उम्मेदाराम_बेनीवाल #बाड़मेर_जैसलमेर_बालोतरा #विकास_की_नई_रफ्तार #पारदर्शिता_और_विश्वास #संसदीय_सक्रियता #सच्चा_नेतृत्व
आज राजस्थान हाईकोर्ट ने लोकतंत्र और जनता के अधिकारों की रक्षा के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए भाजपा सरकार को 31 जुलाई 2026 तक पंचायत एवं नगर निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही न्यायालय ने OBC आयोग को 20 जून तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने और निर्धारित समयसीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी करने को कहा है।
लोकतंत्र में सबसे अधिक महत्व जनता के विश्वास और भागीदारी का होता है, न कि सत्ता के अहंकार का। पंचायत और निकाय चुनाव समय पर होना इसलिए आवश्यक है ताकि जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही बनी रहे, विकास कार्य निरंतर चलते रहें और जनता की लोकतांत्रिक भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
लेकिन इसके विपरीत राजस्थान सरकार द्वारा लगातार कभी “वन स्टेट-वन इलेक्शन”, कभी OBC आयोग की रिपोर्ट और आरक्षण प्रक्रिया, कभी कार्मिकों की कमी, तो कभी भीषण गर्मी, मानसून एवं शैक्षणिक सत्र का हवाला देकर चुनाव टालने का प्रयास किया गया, जो लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना के विपरीत है। भाजपा की राज्य सरकार को यह स्पष्ट भय हैं कि यदि समय पर चुनाव हुए तो जनता के जनमत के माध्यम से उसके कार्यकाल की वास्तविकता सामने आ जाएगी। इस प्रकार की सियासत करके राजस्थान में चुनाव टालने की कभी भी परंपरा नहीं रही हैं।
14 नवंबर 2025 को न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि राज्य निर्वाचन आयोग 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराए, लेकिन भाजपा सरकार ने उन आदेशों की भी अनदेखी की। यह लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास किया गया हैं।
आज राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए लोकतंत्र की रक्षा के पक्ष में ऐतिहासिक हस्तक्षेप कर 31 जुलाई 2026 तक चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं यह भाजपा सरकार की मनमानी और बहानेबाजी कर अपनी नाकामियों को छुपाकर जिम्मेदारियों से भागने की मंशा पर करारा तमाचा हैं।
इससे बुरी स्थिति क्या होगी...
राजस्थान के बाड़मेर जिले में गौ माता के ये हाल है नेताओं से लगाकर अधिकारी फाइलों कागजों और फोटो में व्यस्त है जमीनी हकीकत आप सब के सामने है ये स्थिति सिर्फ शिव कस्बे के देरासर की नहीं बल्कि पश्चिमी राजस्थान के लगभग हर गांव की है। अब ना जाने कब ये सिलसिला थमेगा।
@BarmerDm@RajCMO@OnlineKanhaiya
ये सिर्फ़ एक पेपर लीक नहीं है… ये हमारे राष्ट्र की रूह पर गहरा ज़ख़्म है।
एक किसान का बेटा, एक मज़दूर की बेटी, एक साधारण घर का नौजवान, जो अपनी नींद, अपनी जवानी, अपनी हँसी-खुशी सब कुछ एक बेहतर ज़िन्दगी के लिए कुर्बान कर देता है, जब उसे ये पता चलता है कि उसकी मेहनत का इम्तहान पहले ही बिक चुका था, पेपर पहले ही चोरी हो चुका था, नतीजा पहले ही तय था…
तब केवल एक एग्जाम नहीं टूटता…
उसके अंदर राष्ट्र के प्रति यक़ीन टूटता है।
और जिस दिन किसी मुल्क के नौजवानों का यक़ीन टूटने लगे, समझ लो कि उस मुल्क की रूह घायल हो चुकी है।
आज सवाल सिर्फ़ “पेपर लीक” का नहीं है। सवाल ये है कि क्या हम वो मुल्क बनते जा रहे हैं जहाँ मेहनत हार जाए और भ्रष्टाचार जीत जाए? जहाँ इल्म हार जाए और जुगाड़ जीत जाए? जहाँ किरदार हार जाए और चोरी इज़्ज़त बन जाए?
हमारे मुल्क की राजनीतिक संस्थाएँ पहले ही जनता के विश्वास को खो चुकी है, और आने वाले समय में प्रशासनिक संस्थाएँ भी भ्रष्ट हाथों में चली जाएँ, तो यह केवल शासन का संकट नहीं रहेगा, यह राष्ट्र की बौद्धिक मृत्यु का आरम्भ होगा।
राजस्थान पुलिस की SOG ने जो “गेस पेपर” पकड़ा है, जिसमें 100 से 140 सवाल असली NEET 2026 से मिलते-जुलते पाए गए, वो सिर्फ़ एक कागज़ का टुकड़ा नहीं। वो इशारा है उस गहरे संस्थागत पतन का, जहाँ कोचिंग माफिया, व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी और भ्रष्ट हाथ मिलकर लाखों नौजवानों के ख़्वाबों को लूट रहे हैं।
@NTA_Exams कह रही है “जांच चल रही है”… लेकिन, जांच तो हर बार होती है। गिरफ्तारियाँ भी होती हैं। फिर क्यों हर साल यही ज़ुल्म दोहराया जाता है?
ये कोई साधारण ग़लती नहीं। ये व्यवस्था की बेग़ैरती है।
हमारे सबसे ईमानदार नौजवान आज सबसे ज़्यादा बेइज़्ज़त महसूस कर रहे हैं। वो लाइब्रेरी में रात भर जागते हैं, लेकिन सिस्टम उनके सपनों की हिफ़ाज़त नहीं कर पा रहा। वो संविधान पर यक़ीन करना चाहते हैं, लेकिन भ्रष्टाचार उनकी उम्मीदों का गला घोंट रहा है।
और सबसे ख़तरनाक बात यह है कि हम धीरे-धीरे इस ज़ुल्म के आदी होते जा रहे हैं। हर नया घोटाला अब हमें गुस्सा नहीं, सिर्फ़ थकान देता है।
यह किसी भी राष्ट्र के लिए सबसे खतरनाक अवस्था होती है,
जब जनता अन्याय देखकर क्रोधित होना छोड़ दे।
री-एग्ज़ाम सिर्फ़ दोबारा परीक्षा नहीं है, ये हमारी प्रशासनिक नाकामी का सार्वजनिक सबूत है। इसमें सिर्फ़ पैसे नहीं जलते, नौजवानों का समय जलता है, परिवारों की आरज़ू जलती है, और मुल्क का यक़ीन जलता है।
अगर आज हम ख़ामोश रहे, तो कल वही लोग हमारा मुल्क चलाएँगे जिनके पास न किरदार होगा, न संवेदना, न दूरदृष्टि और न ही विचार।
और जब किसी राष्ट्र का प्रशासन विचारहीन हाथों में चला जाए, तब वह राष्ट्र केवल आर्थिक रूप से नहीं, बल्कि बौद्धिक और नैतिक रूप से भी पंगु होने लगता है।
तो फ़ैसला हमें करना है -
क्या हम वो मुल्क चाहते हैं जहाँ चोर इज़्ज़तदार हों और मेहनतकश बेइज़्ज़त? क्या हम वो समाज चाहते हैं जहाँ ईमानदारी को मूर्खता कहा जाए? क्या हम वो भविष्य चाहते हैं जहाँ ताक़त हार जाए और सिफ़ारिश जीत जाए?
नहीं ना!
तो अब आवाज़ उठानी होगी। सवाल पूछने होंगे। जवाब माँगने होंगे। क्योंकि राष्ट्र सिर्फ़ सीमाओं से नहीं, अपने नौजवानों के यक़ीन से बचता है।
जिस दिन ये नौजवान पूरी तरह निराश हो गया, उस दिन हार सिर्फ़ एक छात्र की नहीं होगी, उस दिन हार पूरे हिंदुस्तान की होगी।
#NEET2026 #PaperLeak #इंसाफ_चाहिए #नौजवान_की_आवाज़ #मेहनत_की_इज़्ज़त
देश की कमान पिछले 12 वर्षों से जिस प्रधानमंत्री के हाथों में है, यदि हर संकट के समय स्वयं द्वारा उनकी सरकार की नाकामियों को छुपाते हुए जवाबदेही से बचने के लिए राष्ट्रभक्ति के नाम पर बार-बार 'इमोशनल' शोषणकारी नीति अपनाकर जनता पर ही जिम्मेदारी और बोझ डालकर उपदेश देने लगे कभी खाने-पीने की चीजें कम करने की सलाह, कभी सोना न खरीदने की बात, कभी विदेश यात्रा से बचने का संदेश, कभी पेट्रोल-डीजल व गैस का कम उपयोग करने का आग्रह, तो कभी किसानों को खाद कम खरीदने और लोगों को घरों से बाहर निकलने तक की नसीहत तो यह स्वाभाविक है कि देश की आर्थिक और वैश्विक स्थिति किस विकट हालात में हैं। आखिर देश किस दिशा में खड़ा है, इसका अंदाज़ा जनता स्वयं लगा सकती हैं।
वैसे भी देश के प्रधानमंत्री स्वयं कई बार कह चुके हैं कि “मैं फकीर आदमी हूँ, झोला लेकर चला जाऊँगा” और चुनावी भाषणों में “मंगलसूत्र छीनने” जैसे बयान भी दे चुके हैं। ऐसे में आज की परिस्थितियों और लगातार दिए जा रहे त्याग व संयम के उपदेशों को देखकर यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या देश को उन्हीं कथनों की ओर धीरे-धीरे अग्रसर किया जा रहा है?
जिस प्रधानमंत्री ने देश को “अच्छे दिन” और “विकसित भारत” का सपना दिखाया था, आज उन्हीं के 12 साल के कार्यकाल के बाद जनता यह सुनने को मजबूर है कि क्या खरीदना चाहिए, क्या नहीं खरीदना चाहिए, कहाँ जाना चाहिए और कहाँ नहीं जाना चाहिए। हर संकट में जिम्मेदारी जनता पर डाल देना और स्वयं जवाबदेही से बच निकलना एक चिंताजनक प्रवृत्ति बन चुकी है।
वर्तमान हालात के दौर से देश में महंगाई पर नियंत्रण नहीं, रोजगार की गारंटी नहीं, किसानों को राहत नहीं, मध्यम वर्ग को सुरक्षा नहीं और ऊपर से त्याग एवं संयम का प्रवचन। यह स्थिति एक कमजोर नेतृत्व और आर्थिक नीतियों की विफलता का प्रमाण है।
देश जनता की उम्मीदों, विश्वास और मजबूत आर्थिक नीतियों पर चलता है। केवल भाषणों, नारों और इवेंट मैनेजमेंट से नहीं चलता हैं। देश को दिखावे की नहीं, बल्कि ईमानदार नेतृत्व, ठोस नीति-निर्धारण और जवाबदेही आवश्यकता हैं।
#PMIsCompromised
माननीय प्रधानमंत्री जी,
आपकी हर अपील में जनता से “कम खाओ, कम जलाओ, कम खरीदो” की बात सुन-सुनकर अब निराशा नहीं, गुस्सा और चिंता जाग रही है। पिछले 12 साल बाद भी “अच्छे दिन” और “विकसित भारत” के सपने अधूरे क्यों? महंगाई, बेरोजगारी, किसान-मजदूर की पीड़ा पर सरकार क्यों चुप है और हर बार बोझ हम पर डाल रही है?
लोकतंत्र सिर्फ़ चुनाव नहीं, जवाबदेही है! सरकार जनता की सेवक है, जनता सरकार की नहीं। जब नेता “फकीर” बनकर त्याग की बात करते हैं, तो पहले खुद की जिम्मेदारी क्यों नहीं निभाते?
जनता अब जाग चुकी है! हम सवाल पूछेंगे, जानकारी फैलाएंगे, वोट की ताकत दिखाएंगे और शांतिपूर्ण तरीके से जवाबदेही मांगेंगे।
प्रधानमंत्री जी, अब “जनता त्याग करे” वाला नारा बंद कीजिए। देश की समस्याओं का हल आपकी मेज़ पर है, जनता की थाली में नहीं!
साथ मिलकर सच्चा विकसित भारत बनाएँ,
जहाँ सरकार जिम्मेदार हो और जनता सशक्त!
#JantaKiJawabdehi #RealViksitBharat
संसदीय क्षेत्र बाड़मेर जैसलमेर बालोतरा सहित पश्चिम राजस्थान के समस्त क्षेत्रवासियों के लिए अत्यंत हर्ष एवं खुशी का विषय है कि लंबे समय से क्षेत्रवासियों की मांग व हरिद्वार यात्रियों की यात्रा में हो रही परेशानी को लेकर रेलवे अधिकारियों से निरंतर आग्रह के परिणामस्वरूप उत्तर रेलवे द्वारा बाड़मेर-हरिद्वार-बाड़मेर (BME-HW-BME) विशेष रेल सेवा के संचालन का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है। आप सभी क्षेत्रवासियों को इस सौगात की हार्दिक बधाई!
यह विशेष ट्रेन ग्रीष्मकालीन एवं धार्मिक यात्रा सीजन में पश्चिम राजस्थान के यात्रियों व श्रद्धालुओं के लिए बड़ी सौगात सिद्ध होगी। प्रस्तावित विशेष ट्रेन का संचालन द्वि-साप्ताहिक रूप से किया जाएगा, जिससे पश्चिम राजस्थान सहित हरियाणा, पंजाब एवं उत्तराखंड जाने वाले यात्रियों को बड़ी सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। विशेष रूप से हरिद्वार यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को अब सुगम, सुरक्षित एवं सीधी रेल सेवा में 2 AC, 3 AC व स्लीपर यात्रा सुविधा मिल सकेगी।
● प्रस्तावित द्वि-साप्ताहिक रेल सेवा संचालन अवधि: ट्रेन संख्या 04811 (बाड़मेर-हरिद्वार) 11 मई 2026 से 17 जुलाई 2026 तक प्रत्येक सोमवार एवं गुरुवार तथा ट्रेन संख्या 04812 (हरिद्वार-बाड़मेर) 12 मई 2026 से 18 जुलाई 2026 तक प्रत्येक मंगलवार एवं शुक्रवार को होगा।
● रेल सेवा का प्रमुख ठहराव: बाड़मेर, बायतु, बालोतरा, समदड़ी, धुंधाड़ा, जोधपुर, नागौर, बीकानेर, हनुमानगढ़, भटिंडा, अंबाला कैंट, सहारनपुर एवं हरिद्वार होगा।
मैं समस्त क्षेत्रवासियों से आग्रह करता हूँ कि अधिक से अधिक संख्या में बाड़मेर-हरिद्वार-बाड़मेर (04811/04812) विशेष ट्रेन सेवा का उपयोग करें, ताकि यात्रियों की मांग एवं भार के अनुरूप भविष्य में रेलवे मंत्रालय एवं प्रशासन द्वारा इस रेल सेवा के नियमित संचालन पर सकारात्मक निर्णय लिया जा सके।
जनहित में यह महत्वपूर्ण रेल सुविधा उपलब्ध करवाने हेतु रेलवे मंत्रालय, उत्तर रेलवे प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों का हार्दिक आभार।
@AshwiniVaishnaw@RailMinIndia@RailwayNorthern@DRMJodhpurNWR
भारत सरकार द्वारा देशभर में जनगणना प्रक्रिया 2026 के तहत चल रही जनगणना को लेकर सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। जनगणना प्रपत्र के 12वें कॉलम में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के साथ अन्य का तो विकल्प दिया गया है यह अच्छी बात हैं वर्गों की गणना को सार्वजनिक करने की माँग भी हैं, लेकिन उसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की गणना के लिए कोई विकल्प का उल्लेख नहीं रखा गया। यह OBC वर्ग के साथ स्पष्ट भेदभाव प्रतीत होता है।
गृह मंत्री श्री @AmitShah जी आपने संसद में एक सवाल के जवाब में कहा था कि “घर की कोई जाति नहीं होती।” लेकिन वर्तमान में चल रही जनगणना में घर और परिवार से जुड़ी लगभग हर प्रकार की जानकारी ली जा रही है, और उसी में 12वें कॉलम में SC, ST तथा अन्य का चयन भी शामिल किया गया है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब अलग से वर्गीकरण का विकल्प रखा गया है, तो OBC जाति की गणना के लिए क्यों नहीं?
यदि सरकार वास्तव में अपने जातिगत जनगणना के वादा निभाने को लेकर गंभीर और ईमानदार प्रतिबद्ध होती, तो इस गणना में भी OBC के लिए अलग कॉलम जोड़कर सभी वर्गों की समुचित गणना सुनिश्चित करती। संसद में जातिगत जनगणना करवाने की हामी भरने के बाद भी OBC वर्ग को इस प्रक्रिया से बाहर रखना सरकार की मंशा पर संदेह उत्पन्न करता है।
सरकार कहती है कि घरों की कोई जाति नहीं होती हैं, तो अब वर्गीकरण किया जा रहा हैं उसमें OBC वर्ग को बाहर रखना समझ से परे है। यदि सरकार सही और पारदर्शी तरीके से जातिगत जनगणना करवाना चाहती है, तो उसे आधी-अधूरी प्रक्रिया अपनाने के बजाय 12वें कॉलम में संशोधन कर OBC वर्ग को भी शामिल करना चाहिए, ताकि सभी वर्गों की वास्तविक और निष्पक्ष गणना हो सके।
@narendramodi@PMOIndia@HMOIndia@mygovindia@AmitShahOffice@INCIndia@kharge@RahulGandhi@kcvenugopalmp@priyankagandhi
पश्चिम बंगाल में TMC की हार-जीत पर बहस करने के लिए तो बहुत कुछ है, लेकिन मैं उस बात पर नहीं जाऊँगा। क्योंकि असली सवाल यह नहीं है कि बंगाल के लिए कौन सही था। असली सवाल यह है, कि BJP ने बंगाल को किस तरीके से जीता? चुनाव आयोग (ECI) की क्या भूमिका रही? और सबसे बड़ी बात कि क्या यह चुनाव वाकई मुक्त और निष्पक्ष (Free and fair) थे?
लोकतंत्र मतलब वोट का अधिकार है। और यह अधिकार किसी योजना के नाम पर, कुछ महीने पहले ही, SIR जैसी विशेष तीव्र संशोधन (Special Intensive Revision) योजना चला कर छीन लिया जाए, तो यह किसी भी प्रगतिशील, चिंतनशील राष्ट्र के लिए खतरे की घंटी है। एक राज्य में करोड़ों नाम मतदाता सूची से गायब हो गए। लाखों भारतीय मतदाताओं, महिलाओं, गरीबों, किसानों और जिनका ख़ून हमारी मातृभूमि से लिपटा हो, जिनका वोट का अधिकार संवैधानिक था, अचानक 'अनुपयुक्त' घोषित कर दिया जाए। क्या यह लोकतंत्र है? या लोकतंत्र का सौंदर्य चुराने का सुनियोजित खेल?
हम एक ऐसे दौर में खड़े हैं जहां बहुमत के नाम पर संस्थाओं से भरोसा उठ रहा है। ECI से, जिसे हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का रक्षक मानते थे। अगर आम जनता और विपक्षी दलों का भरोसा चला गया है, तो आने वाले समय में चुनाव सिर्फ़ औपचारिकता बनकर रह जाएंगे। जीत-हार पहले ही तय हो चुकी होगी।
यह सवाल सिर्फ़ बंगाल का नहीं, पूरे भारत का है।
लोकतंत्र तब तक जीवित रहता है, जब तक उसकी प्रक्रिया पर विश्वास बना रहता है। जब वह विश्वास टूटता है, तो राष्ट्र की सरकारें सिर्फ कागजों, पोस्टरों और डिजिटल स्क्रीनों तक ही सीमित हो जाती हैं।
हम सब, चाहे छात्र हों, चाहे BJP समर्थक हो या फिर चाहे आम नागरिक, अगर देश से थोड़ी भी मोहब्बत रखते हैं, तो इस पर गंभीरता से सोचें।
पार्टियों की छोटी-छोटी राजनीति से ऊपर उठकर
लोकतंत्र की रक्षा की बड़ी लड़ाई लड़ें।क्योंकि आज बंगाल में जो हो रहा है, वह कल कहीं और हो सकता है।
और अंत में सिर्फ़ एक ही हार होगी और वो होगी भारत की।
जय हिंद। जय लोकतंत्र।
#SaveIndianDemocracy #ECI_Question #LoktantraKiRaksha
देश के एक बड़े और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पचपदरा रिफाइनरी में हुई आगजनी की घटना, सुरक्षा मानकों तथा प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के प्रस्तावित दौरे में हुई गंभीर सुरक्षा चूक के साथ प्रोजेक्ट में सामने आ रहे कथित भ्रष्टाचार पर जवाबदेही तय करने व स्पष्टीकरण देने के बजाय प्रदेश के मुख्य सचिव का इस गंभीर विषय पर हंसना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना भी है।
प्रदेश की स्थिति और अधिक चिंताजनक हो रखी हैं, कि जब मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी के नेतृत्व वाली सरकार के शीर्ष अधिकारी मुख्य सचिव ही तथ्यों को लेकर या तो स्पष्ट नहीं हैं या फिर जनता को भ्रमित करते नजर आ रहे हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा हैं कि सुरक्षा मानकों और गुणवत्ता की अनदेखी कर भ्रष्टाचार के भेंट चढ़े इस प्रोजेक्ट की वास्तविकता सामने लाने के बजाय बयानबाजी के जरिए जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया जा रहा है।
यदि IIT Jodhpur ने इस गंभीर तकनीकी घटना की जांच में सहयोग की पेशकश की थी, तो सरकार ने उसे अनुमति क्यों नहीं दी? क्या निष्पक्ष और विशेषज्ञ जांच से बचने की कोशिश की जा रही है?
सबसे गंभीर बात यह है कि जिस CDU-VDU यूनिट में आग लगी, उसके निर्माण को लेकर स्वयं मुख्य सचिव स्पष्ट जानकारी देने में असमर्थ दिखे या फिर भ्रामक बयान दिए। जिस यूनिट का निर्माण Tata Projects Limited द्वारा किया गया, उसमें Larsen & Toubro का नाम लेना या तो गंभीर अज्ञानता दर्शाता है या फिर जानबूझकर भ्रम फैलाने का प्रयास है। जबकि L&T यूनिट को ठीक करने और उसके दूरस्तीकरण में सहयोग कर रही है।
जब मुख्य सचिव यह कह रहे हैं कि जांच Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL) मैनेजमेंट द्वारा की जा रही है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि राज्य सरकार की भूमिका आखिर क्या है? यदि जांच उसी संस्था के भरोसे छोड़ दी जाए, जो स्वयं इस घटना में कहीं न कहीं जिम्मेदार हो सकती है, तो निष्पक्षता और पारदर्शिता की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
क्या सरकार इस गंभीर हादसे में वास्तविक जवाबदेही तय कर पाएगी, या फिर यह मामला भी लीपापोती का शिकार बन जाएगा?
@PMOIndia@mygovindia@PetroleumMin@HardeepSPuri@RajCMO@RajGovOfficial
थार भूमि के वीर सपूत, महान समाज चिंतक, राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी, समाज रत्न, युवाओं के प्रेरणास्रोत स्व. श्री हरलालजी जाट की जन्म जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि एवं शत-शत नमन।
आपकी दूरदर्शी सोच और समाजसेवा ने समाज को नई दिशा दी। आपके आदर्शों से प्रेरित “हरलाल जाट शिक्षण संस्थान छात्रावास” आज सैकड़ों विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य का आधार बन रहा है।
आपका योगदान सदैव हमारे दिलों में अमिट रहेगा।
जैसलमेर जिले के झिन्झिनियाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत जोगीदास का गाँव तेजमालता में कानोड़ (गिड़ा, बालोतरा) निवासी किसान परिवार की महिला हत्थूदेवी पत्नी श्री अमराराम की 21अप्रैल 2026 को रात्रि में उनके कृषि कुएं पर स्थित अकेली घर पर सो रही थी तब खिड़की में से गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना अत्यंत गंभीर और सुनियोजित प्रतीत होती हैं। इस प्रकरण के पीछे बड़ी साजिश और कई खुलासे हो सकते हैं।
स्थानीय पुलिस द्वारा राजनैतिक संरक्षण और दबाव में केवल एक आरोपी की गिरफ्तारी कर पूरे मामले की इतिश्री करना कई सवाल खड़े करता है। जिस प्रकार से इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया, उससे स्पष्ट है कि इसमें गहरी साजिश और पूर्व योजना शामिल रही हैं। आरोपी से लगातार कई लोगों से मोबाइल पर संपर्क, अवैध हथियार की उपलब्धता कराना और संभावित साक्ष्यों को मिटाने के प्रयास इस मामले को और गंभीर बनाती हैं।
यह भी संदेह है कि इस प्रकरण में कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका हो सकती है। पीड़ित परिवार को लंबे समय से प्रताड़ित किए जाने की बातें सामने आई हैं, जिससे यह आशंका और गहरी होती है कि जमीन-जायदाद के विवाद के साथ अन्य कई कारणों के चलते इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया गया हैं।साजिशकर्ताओं की यह भी मंशा थी कि परिवार को परेशान किया जाए ताकि जमीन जायदाद छोड़कर किसान परिवार चला जाए।
यदि इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच नहीं हुई, तो असली दोषी बच जाएंगे और पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल पाएगा। यह हत्याकांड कानून व्यवस्था और न्याय व्यवस्था पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
दुर्भाग्यपूर्ण यह भी है कि छोटी-छोटी घटनाओं पर मुखर होने वाले कई जनप्रतिनिधि इस गंभीर घटना पर मौन साधे हुए हैं। जो छुटपुट घटनाओं पर उन्माद फैलाने के लिए बुल्डोजर लेकर पहुँच जाते हैं अब कहाँ गए वो नेता और बुलडोजर?
अपराध के खिलाफ आवाज उठाना और इंसानियत को धर्म मानकर पीड़ित को न्याय दिलाना हम सभी की जिम्मेदारी है न कि उपद्रव व उन्माद फैलाना।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी एवं @PoliceRajasthan महानिदेशक आप इस पूरे प्रकरण की जांच एक उच्च स्तरीय एसआईटी गठित कर निष्पक्ष रूप से करवाई जाए, ताकि दोषियों को कड़ी सजा मिल सके और पीड़ित परिवार को न्याय प्राप्त हो।
@RajCMO@Igp_Jodhpur@JaisalmerPolice
साथियों,
भारतीय लोकतंत्र इस समय एक गहन परीक्षा की घड़ी से गुजर रहा है। जब कोई एक पार्टी संस्थाओं को राजनीतिक हथियार बनाकर विरोधियों पर दबाव डालती है, और जब कोई नई पार्टी अपनी विचारधारा की जड़ों को मजबूत किए बिना ही सत्ता के खेल में उतरती है, तो लोकतंत्र की नींव हिलने लगती है।
हालिया घटनाक्रम, आम आदमी पार्टी(@AamAadmiParty) के 7 राजसभा सांसद सदस्यों का भाजपा में शामिल होना, मात्र व्यक्तिगत फैसला नहीं, बल्कि एक बड़े सत्य का प्रतीक है।
अरविंद केजरीवाल (@ArvindKejriwal) के नेतृत्व में ‘आप’ में जो एकल केंद्रित निर्णय प्रणाली विकसित हुई, जिसमें पार्टी की विचारधारा जनता से ऊपर नेता की इच्छा को रखा गया, उसी ने इस पार्टी को विचार-शून्य बना दिया। बिना स्पष्ट, गहन और निरंतर विचारधारा के कोई भी राजनीतिक दल लोकतंत्र में टिक ही नहीं सकता। विचारधारा वह मिट्टी है जिसमें लोकतंत्र की जड़ें पकड़ती हैं। उस मिट्टी के अभाव में पौधा चाहे कितना भी हरा-भरा दिखे, अंततः वह सूख ही जाता है।
इसके विपरीत, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस @INCIndia सदैव एक ऐसी विचारधारा की वाहक रही है जो ‘जनता के लिए, जनता द्वारा और जनता के साथ’ के सिद्धांत पर टिकी है।
यह वह पार्टी है जिसने स्वाधीनता संग्राम से लेकर आज तक हर मोड़ पर देश की एकता, संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ी है। कांग्रेस की विचारधारा न तो सत्ता के लालच से पैदा हुई, न ही सत्ता के भय से डरी। वह जन-केंद्रित है, संवैधानिक है और चिरंतन है।
देशवासियों,
आज समय है गहन चिंतन का। यदि हम सच्चे लोकतंत्र को बचाना चाहते हैं, तो हमें उस एकमात्र पार्टी के साथ खड़ा होना होगा जिसकी विचारधारा न तो बिकती है, न धुलती है, और न ही दबाव में झुकती है। कांग्रेस वह प्राचीन वटवृक्ष है, जिसकी जड़ें गहरी हैं और जिसकी छाया में पूरा देश सदैव सांस ले सकता है।
विचार करें। समझें। और सही पक्ष चुनें।
लोकतंत्र की रक्षा केवल नारों से नहीं, सच्ची विचारधारा से होती है।
जय हिंद। जय कांग्रेस।
आज जैसलमेर की तपती धरती और धूप भरी दोपहरी में पोकरण विधानसभा क्षेत्र के फलसुण्ड में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री गोविंद सिंह डोटासरा जी के एक दिवसीय बाड़मेर-जैसलमेर प्रवास के दौरान आयोजित #संगठन_बढ़ाओ_लोकतंत्र_बचाओ अभियान में उमड़ा जनसैलाब केंद्र और राज्य सरकार की नाकामियों, तानाशाही रवैये और लोकतंत्र का गला घोटने के प्रयासों के खिलाफ जनता के आक्रोश का प्रतीक है।
यह जनसमर्थन कांग्रेस की मजबूती का स्पष्ट संकेत है, जो आगामी पंचायतीराज चुनावों में भी देखने को मिलेगा।
राजस्थान सरकार द्वारा पंचायतीराज व निकाय चुनाव टालना जनता से उसके संवैधानिक अधिकार छीनने का कुत्सित प्रयास है। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा आघात है और प्रणाली पर डाका डालने जैसा कदम है।
लोकतंत्र को बचाने और आमजन की आवाज को बुलंद करने की इस लड़ाई में हर नागरिक को एक सिपाही बनकर आगे आना होगा।
आमजन की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए, उनके हक और अधिकारों की रक्षा के लिए कांग्रेस परिवार हर कदम पर पूरी मजबूती के साथ आवाज उठाता रहेगा।
@GovindDotasra@INCRajasthan