A very prominent journalist came to Jantar Mantar today to cover Sonam Wangchuk’s hunger strike.
Police officials stopped the journalist and falsely claimed that Sonam Wangchuk was not there and had been taken to the hospital.
Why are the police stooping so low? Why are they lying to journalists and preventing them from covering the protest?
भारत के चुनावी सिस्टम पर UN की सनसनीखेज रिपोर्ट!
संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूतों ने अपारदर्शी AI तकनीक के ज़रिए अल्पसंख्यक वोट काटने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उधर चुनाव आयोग ने बिना कानूनी संशोधन के 'फॉर्म-6' बदलकर पैरेंट्स की संवेदनशील SIR जानकारी मांग ली है।
@AditiChatt2512
सोनम वांगचुक, जिसने कभी अपने लिए नहीं माँगा, कुछ कि पद चाहिए, सत्ता चाहिए।
अपनी ज़िंदगी देश, समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए लड़ते रहे है और 15-16 दिनों से अनशन पर बैठे हैं!
अपने लिए नहीं, देश के लिए। देश के बच्चों के भविष्य के लिए! उसके बाद भी देश के नेताओं की सोई हुई संवेदनाएँ नहीं जाग पा रही।
सत्ता की ख़ामोशी बरकरार है।
भूख हड़ताल और अनशन भी अगर व्यवस्था को सुनाई नहीं दे रहा, तो एक आम नागरिक की आवाज़ की कीमत क्या ही होगी?
अब दर्द सिर्फ़ यह नहीं कि एक व्यक्ति अनशन पर है, बड़ा दर्द यह है कि देश धीरे-धीरे उस मुकाम पर पहुँच रहा है जहाँ जनता की पीड़ा का महत्व खत्म है और उस पर सत्ता हावी है।
सोचिए, आज अगर एक ऐसे व्यक्ति की आवाज़ अनसुनी की जा सकती है, जिसने अपना जीवन देश के लिए लगा दिया, तो कल बेरोज़गार युवा, न्याय की गुहार लगाता परिवार, किसान, छात्र या कोई भी आम नागरिक किस उम्मीद से अपनी तकलीफ़ के लिए लड़ पाएगा और कौन उसकी सुनेगा?
लोकतंत्र का मतलब सिर्फ़ चुनाव है क्या? अगर सत्ता अपने शांत नागरिक की आवाज़ नहीं सुन रही, तो ये लोकतंत्र पर सवाल नहीं है?
और अगर वह आवाज़ भी अनसुनी होने लगे! तो यह चिंता सिर्फ़ पूरे देश को होनी चाहिए।
Be stand with Sonam Wangchuk
Sonam wangchuk sir is on hunger strike till the resignation of Education minister,
Please 🥺 come and support peacefully at Jantar Mantar,
It's for you and your children not personal.🤯
बेसिक शिक्षा विभाग नगरीय क्षेत्रों के साथ ग्रामीण पदों के रिक्त 50,000 पदों पर शीघ्र अधियाचन शिक्षा सेवा चयन आयोग को प्रेषित करें।
जिससे टीईटी परिणाम बाद नई बेसिक भर्ती प्रक्रिया शुरू हो रही सके।
#UPPRT_संयुक्त_विज्ञापन_दो@upesscprayagraj@UPGovt@PrashantK_IPS90
'अगर कोई रिश्वत मांगे, तो बस कह देना कि आप रिश्वत नहीं देंगे और मेरा नाम ले लेना. सीधे उस अधिकारी का नाम मुझे बता देना. उसके बाद का मैं देख लूंगा…'
- 'थलापति' विजय, सीएम, तमिलनाडु
हमारी प्रमुख मांगें:
✅ नगरीय एवं ग्रामीण शिक्षक भर्ती का एक साथ विज्ञापन जारी हो।
✅ सभी रिक्त पदों पर Bharti ho
आइए, सोशल मीडिया पर एकजुट होकर अपनी आवाज़ बुलंद करें।
@UPGovt@myogiadityanath@kpmaurya1
पहले भरोसा रहता था कि कम से कम उद्घाटन तक सड़क टिक जाएगी अब तो बनते-बनते ही सेफ्टी वॉल टूटने लगी है।
करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट ,लेकिन पहली ही बारिश में निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो जाते हैं। और सबसे दुख की बात यह है कि इन सवालों से न ठेकेदारों को कोई फर्क पड़ता है, न जिम्मेदार अधिकारियों को और न ही नेताओं को।
ठेकेदार बच जाएगा, फाइलों पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारी बच जाएंगे, और बचाव में कोई न कोई नेता यह कह देगा कि सड़कें बनती हैं तो टूटती भी हैं
अगर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी पहली बारिश नहीं झेल पा रहा, तो जवाबदेही किसकी तय होगी?
टैक्स जनता देती है, जोखिम भी जनता उठाती है... फिर जवाबदेही से हर बार बच कौन जाता है?