ये वैकेंसी नहीं ऊंट के मुंह में जीरा है 💯
प्रदेश में 1.43 लाख पद खाली है और 8 साल से कोई भर्ती भी नहीं हुई ✅
बच्चों के साथ अन्याय क्यों मा.मुख्यमंत्री जी?
20 लाख युवा और उनके परिवार वाले लगभग 80 लाख लोग इस भर्ती के इंतजार में है समझिए! बड़ी.....
@idrsarvanbaghel@spgoyal
सत्तर हजार वेतन वाला सरकारी टीचर अपने बच्चे को प्राइवेट स्कूल में भेजता है।
और 10 हजार वेतन वाला प्राइवेट टीचर उन्हीं सरकारी टीचर के बच्चों को पढ़ाता है।🤔
शिक्षा नहीं— पूरा सिस्टम ही उल्टा लटका हुआ है..!!
प्राइवेट स्कूल अब पढ़ाई की जगह दुकान जैसे लगने लगे हैं। कलम, किताब, कॉपी से लेकर ड्रेस तक - सब कुछ स्कूल से ही खरीदने का दबाव बनाया जाता है। शिक्षा का मकसद बच्चों को ज्ञान देना है, न कि सामान बेचकर मुनाफ़ा कमाना।
आख़िर ऐसा क्यों हो रहा है? क्योंकि सरकार इसे होने दे रही है। जब सख़्त नियम और निगरानी नहीं होती, तब स्कूल पढ़ाई से ज़्यादा कमाई पर ध्यान देने लगते हैं। यही वजह है कि शिक्षा धीरे-धीरे सेवा नहीं, कारोबार बनती जा रही है।
देश की प्रथम महिला अध्यापिका एवं नारी शिक्षा और नारी मुक्ति आंदोलन की अग्रदूत महान समाजसेविका सावित्रीबाई फुले जी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
शिक्षा, समानता और महिला सशक्तिकरण के लिए उनका योगदान सदैव देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा।
#SavitribaiPhule#women
3 साल पहले, अरविंद केजरीवाल ने मोदी की आंखों में आंखें डालकर पूछा था: "अगर शराब मामले में कुछ नहीं मिला, तो क्या आप इस्तीफा देंगे या माफी मांगेंगे?"
3 साल बाद, कोर्ट ने क्लीन चिट दे दी
क्या मोदी अब इस्तीफा देंगे?
#ArvindKejriwal
कुछ बातें जो कभी किसी को नहीं बतानी चाहिए...
1. अपनी योजनाएँ कभी किसी को न बताएँ।
2. अपनी जीवनशैली की private बात न करें।
3. कभी यह न बताएँ कि आप कितने साहसी, दयालू हैं।
4. कभी यह घोषणा न करें कि आप प्रबुद्ध/जागृत /समझदार हैं।
5. परिवार की समस्याओं के बारे में कभी बात न करें।
6. आपने जो अप्रिय बातें सुनी हैं, उन्हें दोहराएँ नहीं।
“3000 साल तक पढ़ाई लिखाई पर केवल ब्राह्मणों का हक था, 100% आरक्षण,
मतलब 10 प्रतिशत समुदाय ने सौ प्रतिशत सीटें तीन हजार सालों तक कब्जा किया !
व्यवसाय में सौ प्रतिशत कब्जा वैश्य समुदाय का कब्जा था!
और अब पिछड़े समुदाय की उन्नति पर पेट में दर्द हो रही है !
“मैं ख़ुद सवर्ण हूँ, और सवर्ण होने के बावजूद मैं जिस यूनिवर्सिटी में पढ़ा हूँ या जहाँ भी पढ़ा हूँ वहाँ देखा है वहाँ इस तरह के भेदभाव होते हैं”
ये बात ख़ुद SC ST का व्यक्ति नहीं बल्कि ख़ुद सवर्ण समाज का व्यक्ति स्वीकार कर रहा हैं कि स्कूलों और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव होता हैं।
यूजीसी बिल का विरोध अधिकतर वही लोग कर रहे हैं जो समानता की भावना नहीं रखते हैं ना वो जाति के आधार पर भेदभाव एवं उत्पीड़न पर रोकने की बात नहीं करते हैं न बोलते हैं।
क्योंकि UGC बिल में बड़े बड़े अक्षरों में लिखा है कि जो छात्र के साथ जातिगत भेदभाव या शोषण करता है तो बदले में उस पर मुक़दमा होगा लेकिन उससे पहले उस मामले की जाँच होगी और अगर जाँच दोषी साबित होंगे तो दोषी करार दिए जाएँगे।
अब बताओ एक शोषणकर्ता को सज़ा मिले इससे क्या होगा और इसलिए जातिगत आधार पर उत्पीड़न को रोकने के लिए ये कानून लाया गया है।
@priyanshu__63 सामान्य वर्ग की तीन मांग है,
1 झूठी शिकायत पाए जाने पर फर्जी आरोप लगाने वाले को दंड दिया जाए।
2 भेदभाव यदि सामान्य के साथ हो रहा है तो उसे भी अत्याचार के खिलाफ शिकायत का अधिकार हो.
3 कमेटी में OBC,SC,ST के साथ सामान्य वर्ग भी हो...
इन मांगों में कुछ भी बुरा नहीं लगता है।
“UGC लाकर गधों को घोड़ा बनाओगे।
तुम्हारी नस्लों की नस्लें टूटकर बिखर जाएँगी,
फिर भी तुम सवर्णों का रोआँ नहीं उखाड़ पाओगे।”
UGC के नए प्रावधान का विरोध कर रहे सवर्णों को बस आप सुन लीजिए।
बाक़ी, समझदार के लिए इशारा काफ़ी होता है।
अगर आपको UGC कानून से भय है तो अपने बच्चों को न्याय के मूल सिखाएँ। समानता सिखाएँ। सम्मान देना सिखाएँ। भारत में जातिगत भेदभाव, जातिवादी टिप्पणियों की अब कोई जगह नहीं है।
- श्याम मीरा सिंह, पत्रकार
#UGCRegulations#We_support_UGC_Act