राज्यसभा निर्वाचन में आज नाम निर्देशन पत्र की जांच में यह तथ्य सामने आया कि कांग्रेस प्रत्याशी ने अपराध से संबंधित जानकारी को छिपाया था। कानूनन उन्हें इसका उल्लेख करना था।
भाजपा प्रत्याशी श्री महेश केवट जी ने इस प्रकरण में आपत्ति दर्ज कराई थी। कांग्रेस प्रत्याशी के विरुद्ध दर्ज प्रकरण पर न्यायालय ने संज्ञान लिया था। समन भी जारी किया था। कांग्रेस प्रत्याशी ने अपना जवाब भी दाखिल किया।
इस मामले में चुनाव अधिकारी ने कानून के अनुसार निर्णय लिया है। मैं उसका स्वागत करता हूं। कांग्रेस को आत्ममंथन करना चाहिए।
The audacity is astonishing, but the hypocrisy is not surprising.
जिस दल ने दशकों तक लोकतंत्र को परिवारवाद की बेड़ियों में जकड़े रखा, वह आज लोकतंत्र की दुहाई दे रहा है। लोकतंत्र में चुनाव लड़ना, प्रत्याशी उतारना तथा समर्थन जुटाना संवैधानिक प्रक्रिया है, लेकिन कांग्रेस को हर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में साज़िश दिखाई देती है क्योंकि उसकी राजनीति केवल एक पारिवारिक सत्ता केन्द्रित ही रहती है।
कांग्रेस "सियासी मंडी" की बात करती है, जबकि देश ने देखा है कि जोड़-तोड़, खरीद-फरोख्त तथा जनादेश के अपमान की परंपरा उसी के राजनीतिक इतिहास का हिस्सा रही है। देश की जनता को याद है जब 1959 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने केरल की पहली लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार को बर्खास्त कर दिया था। अनुच्छेद 356 का सबसे अधिक उपयोग कांग्रेस सरकारों के दौर में हुआ। अनेक निर्वाचित राज्य सरकारों को बर्खास्त किया गया। जनता द्वारा चुनी गई सरकार को राजनीतिक कारणों से हटाना कांग्रेस की तानाशाही सोच का परिचायक रहा है।
अब अपनी संभावित हार से घबराकर कांग्रेस पहले से ही बहानों की पटकथा लिख रही है।
जहां तक महिला सम्मान की बात है, कांग्रेस को उपदेश देने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए। भाजपा सरकार द्वारा बहनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरु की गई "लाड़ली बहना योजना" से लेकर जनजातीय महिला के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुँचने के अवसर पर भी कांग्रेस राजनीति से ऊपर नहीं उठ सकी। जिस काँग्रेस ने वोटबैंक की राजनीति के चलते शाह बानो मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को कानून बनाकर पलट दिया, वो आज महिला अधिकारों की बात कर रही है...
इसके अलावा अभी हालिया दिनों में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को संसद में गिरा कर काँग्रेस ने अपनी महिला विरोधी सोच का परिचय दिया था । देश की जनता यह भी जानती है कि आपातकाल लगाकर लोकतंत्र का गला किसने घोंटा था! लोकतंत्र की रक्षा का दावा करने वालों को पहले अपने इतिहास के आईने में झांकना चाहिए।
सत्य यह है कि जनता कांग्रेस की अवसरवादी राजनीति को पहचान चुकी है और इसी कारण कांग्रेस चुनाव दर चुनाव जनता का विश्वास खोती जा रही है।
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Time to share our secret sauce- “de-risking”.
We are doing so at #WEF#Davos.
Alps is the new setting for #renewables to reach Himalayan heights.
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@DrMohanYadav51 शर्मनाक टिप्पणी कांग्रेस विधायक फूलसिंह बरैया की विकृत मानसिकता का प्रमाण है।
मौत पर राजनीतिक रोटियाँ सेंकने मध्यप्रदेश आ रहे राहुल गांधी अपने बेलगाम और समाज में नफ़रत का ज़हर बोने वाले विधायक से सहमत हैं?
#महिला_विरोधी_कांग्रेस
@jitupatwari 60 साल तुम्हारी सरकार रही तब तुम लोगों ने ध्यान नहीं दिया अभी यहां ट्विटर पर ज्ञान पेल रहे हो, अगर यही तुम्हारी सरकार ने ध्यान दिया होता तो आज हिंदुस्तान कहां होता