@umashankarsingh@ramakantgaur टीवी से सोशल मीडिया तक सफर बदला है, लेकिन आवाज़ और अंदाज़ वही है। यही निरंतरता किसी भी अच्छे पत्रकार की असली पहचान होती है। 👏
रांची में प्रवेश के लिए अब शायद वीजा और इंटरव्यू दोनों जरूरी हो गए हैं
😂 पूछो क्यों रोक रहे हैं तो प्रशासन भी मुंह फेरकर नो कमेंट मोड में है
#HemantMustResign
राहुल गांधी का सफेद टीशर्ट छोड़कर अचानक गुलाबी शर्ट अपना लेना फैशन वर्ल्ड के लिए एक कूल एंड बोल्ड स्टेटमेंट है जिसकी गूंज दूर तलक सुनाई देगी...
फैशन वर्ल्ड में एक अघोषित नियम है कि नीला रंग पुरुष के लिए और गुलाबी महिलाओं के लिए होता है पर राहुल गांधी ने इसे अपनाकर ये साबित कर दिया कि किसी भी रंग पर किसी धर्म, समुदाय, लिंग का कब्जा नहीं है।
रंग को किसी जन्मजात लैंगिक पहचान या रूढ़िवादिता में कैद नहीं किया जा सकता।
गुलाबी क्यों न हो पुरुष के लिए क्या उनमे ममत्व नहीं होता या पुरुष केवल कठोर हृदय विहीन प्राणी हैं जिनका काम बस मर्दानगी दिखाना है...?
जिन पुरुषों में ममत्व का भाव नहीं वो मर्द हो ही नहीं सकते।
राहुल गांधी का फैशन के कड़े नियमों को तोड़ना सच्चा आत्मविश्वास और आधुनिक सोच को व्यक्त करता है। और मैं भी अब जा रही हूं तीन नए नीले ड्रेस खरीदने के लिए..😎
अब्दुल कल भी पंचर लगाता था, अब्दुल आज भी पंचर लगाता है।।।
फर्क क्या आया? पहले 10 रु लेता था, आज 50रु लेता है। कल को 60 रु भी लेगा, 70 रु भी लेगा और अगर महंगाई बढ़ी तो 100 रु भी लेगा।।।
लेकिन फर्क किस पर पड़ा??? फर्क पड़ा पांडे जी पर और पांडे जी के लौंडे पर। पांडे जी का लौंडा मल्टिनेशनल कंपनी में काम करता था, कंपनी में छटनी हुई, जॉब से निकाल दिया गया।।।
फर्क पड़ा मौर्या जी पर। मौर्या जी ने लोन लिया था, अपने लड़के की नीट की तैयारी करवा रहे थे, कमबख्त पेपर लीक हो गया।।।
फर्क पड़ा सिंह साहब पर और सिंह साहब के लौंडे पर। सिंह साहब का लौंडा रेलवे में काम करता था, सोचा था कि पक्का हो जाएगा, गवर्नमेंट ने प्राइवेटाइजेशन कर दिया।।।
लेकिन यार अब्दुल पर कोई फर्क नहीं पड़ा। अब्दुल कल भी पंचर लगाता था, अब्दुल आज भी पंचर लगाता है।।।
800 रु पूरे दिन में कमाता है, 500 रु में घर जाकर चिकन बिरयानी, चिकन चंगेजी, पाए, कोफ्ते, नान, तंदूरी रोटी, बटर रोटी खा पीकर अल्लाह का शुक्रिया अदा कर टांगे पसार कर सो जाता है।।।
बस इतनी सी कहानी है अब्दुल की।।।
जिसे अच्छी लगे वो आगे बढ़ाए 🙏🙏
AI Generated image,,,,
Hey @grok Why is my impression not increasing in the last two days? It is showing only 50400 whereas in two days I have increased my impressions by more than 15000. Verified. Why is it not happening?
Is anyone else having this problem or is it just me?
योगी आदित्यनाथ जी के शहर से सटे कुशीनगर शहर मे योगी जी की पुलिस की नई करतूत!
एक रात खाकी की मर्यादा को ताख पर रखकर
एक ढाबा संचालक से झगडा की और उसकी पत्नी का अपहरण करके और उसके साथ छेड़खानी की!
इसमें उमाशंकर यादव और उसके साथी सिपाही महेंद्र यादव भी शामिल रहा। महेंद्र यादव जौनपुर जिले का रहने वाला है।
आजमगढ़ जिले का रहने वाले उमाशंकर यादव
के खिलाफ कई बार शिकायत की गयी लेकिन उसके उपर कोई एक्शन नहीं लिया गया!
Mrunal Thakur Yashasvi Jaiswal Love rumors
started spreading after they were seen leaving the same café.
Mrunal Thakur quickly shut down the dating rumors
and asked people to show proof of them actually being together.
She questioned why educated people believe fake news so easily
and urged everyone to relax instead of spreading baseless gossip.
Her message was clear: focus on real issues happening in the country
instead of wasting time on false celebrity gossip.
@VEDIKA397147 रास्ता कठिन जरूर है, लेकिन अकेले चलने की जरूरत नहीं। छोटे creators अगर एक-दूसरे को support करें तो 500K verified impressions का सफर काफी आसान हो सकता है।
मात्र 7 दिनों में 3200 फॉलोवर का आंकड़ा पार कर लिया है और इसी बीच एक पोस्ट भी 2 मिलियन गयी है यह सब आप सभी साथियों की बजह से हुआ है।
लेकिन अभी भी कुछ साथी हैं जिन्होंने फ़ॉलो बैक नहीं दिया है आप सभी साथी फॉलो बैक दे दें क्योंकि x के नए नियम ने vip प्रथा खत्म कर दिया है
500k वेरिफाइड इम्प्रेशन तभी मिलेंगे जब vip प्रथा आप खत्म करेंगे वरना सभी सिर्फ मेहनत करते रहेंगे और नतीजा कुछ नहीं निकलेगा।
रास्ता कठिन है लेकिन सहयोग सबका या एक दूसरे का रास्ता आसान हो जाएगा
आज बाजार में जाना हुआ तभी मेरी नजर एक हाथगाड़ी पर गई उस पर किकोड़़े देख कर मन प्रफुल्लित हो गया क्योंकि यह मेरी सबसे पसंदीदा सब्जी में से एक है।
खुश होकर ठेले वाले से भाव पूछा ठेले वाले ने भाव 600/kg बताया तो भाव सुनकर मेरी मुस्कान पल में फुर्र हो गई।
किकोड़ा इतना महंगा होगा मेने पहली बार सुना था आपके यहां किकोडे क्या भाव है कमेंट में जरुर बताएं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थोड़ी ही देर में कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीतने वाले भारतीय खिलाड़ियों से मिलेंगे। प्लेयर्स की बस प्रधानमंत्री आवास पहुंच चुकी है।
मुक्केबाज लवलीना बोरगेहन और वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने कहा- हम प्रधानमंत्री से मिलने के लिए एक्साइटेड हैं।
भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज समेत कुल 39 मेडल जीते। भारत मेडल टैली में चौथे नंबर पर रहा।
यदि आपके साथ cyber froud हुआ हे तो घबराएं नहीं, इस आसान step से पैसा सीधे आपके खाते में आएगा।
क्या आप जानते हैं गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा cyber ठगी के पैसे Refund MRM पोर्टल शुरू किया है?
Cyber ठगी का पैसा सीधा आपके अकाउंट में घर बैठे आएगा, ना कोर्ट के चक्कर में वकीलों का खर्च जानते हैं कैसे,
चलो मैं आपको बताता हूं, आपके साथ जैसे ही froud होता है तुरंत golden hour मे 1930 पर शिकायत दर्ज करें,
जैसे ही आप शिकायत दर्ज करेंगे ठग का Acount freeze कर दिया जाएगा,
और आपको SMS के माध्यम से 14 अंको की NCRP आईडी दी जाएगी,
आवेदन कैसे करें?
MRM के आधिकारिक पोर्टल पर जाएं जैसे ही आप पोर्टल खोलेंगे National cyber crime reporting पोर्टल खुल जाएगा,
शिकायत वाले मोबाइल नंबर और OTP से लॉगिन करें,
रिक्वेस्ट डालें Raise refund request पर click करें फिर अपनी 14 अंकों की NCRP आयडी डालें,
फिर अपनी पूरी डिटेल्स भरें आपका खाता नंबर IFSC कोड और पैन कार्ड अपलोड करें,
Submit करने के बाद अपने 14 अंकों की रिक्वेस्ट आईडी से अपने रिफंड का स्टेटस चेक करते रहें,
यदि आपके साथ हुए Froud की राशि ₹50000 से कम है तो Fir या कोर्ट ऑर्डर की जरूरत नहीं रहती है,
आपकी राशि बॉन्ड भर के दी जा सकती है,
Froud की राशि ₹50000 से ज्यादा होने पर fir अनिवार्य है कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर ही पैसा रिफंड होगा,
याद रखें यह सरकारी सेवा है और पूरी तरह से फ्री है, इसमें आपको किसी को भी फीस या चार्ज के नाम पर पैसा नहीं देना है,
इस पोर्टल के बारे में सभी लोगों को जानकारी होना चाहिए, क्या आप इसके बारे में पहले जानते थे।
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रौशन आनंद सर ने सुभांकर मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहे कि
शुभांकर मिश्रा को शर्म नहीं आता है अगर शर्म आता तो शुभांकर मिश्रा खान सर का प्रोडकास्ट हटा देना चाहिए क्योंकि पूरा का पूरा झूठ पॉडकास्ट है उसको शर्म नहीं है शर्म बेच के पी गया है।
रौशन आनंद कह्ते है कि जब हम उससे समय मांगे तो तो हमको समय नहीं दिया जबकि मेरा भाई मरा था अभी जल्दी ही इसीलिए
मै कहता हु शुभांकर मिश्रा को बायकाट करना चाहिए वो पैसा लेकर पॉडकास्ट करता है।
महत्वपूर्ण सूचना:
यह कहानी किसी सत्य घटना पर आधारित नहीं है। यह एक काल्पनिक/प्रेरणादायक कहानी है, जिसका उद्देश्य माता-पिता के प्रति सम्मान, प्रेम और जिम्मेदारी का संदेश देना है। इसे वास्तविक अदालत की घटना न समझे।
अदालत में पहली बार ऐसा मुकदमा आया...
जहाँ तीनों बेटे ज़मीन नहीं, अपने बूढ़े माँ-बाप को अपने साथ ले जाने की ज़िद कर रहे थे।
जिला न्यायालय का कमरा नंबर 7 लोगों से खचाखच भरा हुआ था।
बाहर खड़े लोग एक-दूसरे से पूछ रहे थे—
“किस बात का केस है?”
किसी ने जवाब दिया—
“सुना है तीनों बेटे लड़ रहे हैं...”
एक आदमी हँसकर बोला—
“फिर वही ज़मीन-जायदाद का झगड़ा होगा।”
तभी कोर्ट का दरवाज़ा खुला।
अंदर जो दृश्य था, उसने सबकी सोच बदल दी।
कटघरे में कोई अपराधी नहीं खड़ा था।
वहाँ बैठे थे सत्तर वर्षीय रामस्वरूप मिश्रा और उनकी पत्नी सरला देवी।
दोनों की आँखों में आँसू थे।
उनके सामने खड़े थे उनके तीनों बेटे—विनय, दीपक और मोहित।
जज ने फाइल खोली और मुस्कुराकर पूछा—
“तो बताइए... विवाद क्या है?”
सबसे बड़े बेटे विनय ने हाथ जोड़कर कहा—
“माननीय न्यायालय... मैं अपने माता-पिता को अपने साथ रखना चाहता हूँ।”
जज ने दूसरे बेटे की ओर देखा।
दीपक बोला—
“नहीं साहब... पिछले दस साल से बड़े भैया ने सबसे ज़्यादा सेवा की है। अब मेरी बारी है। मैं उन्हें अपने घर ले जाना चाहता हूँ।”
तीसरा बेटा मोहित रोते हुए बोला—
“दोनों भाई गलत हैं। माँ-बाबूजी मेरे साथ रहेंगे। मैं सबसे छोटा हूँ... मुझे उनका कर्ज़ उतारने दीजिए।”
पूरा अदालत कक्ष एकदम शांत हो गया।
ऐसा मुकदमा वहाँ किसी ने पहले कभी नहीं देखा था।
जज ने पूछा—
“अगर तीनों अपने माता-पिता को रखना चाहते हैं... तो अदालत क्यों आए?”
रामस्वरूप जी ने काँपती आवाज़ में कहा—
“हुजूर... यही तो हमारी परेशानी है।”
उन्होंने आगे कहना शुरू किया—
“हमने तीनों बेटों को ईमानदारी से पाला। खेत बेचकर पढ़ाया। खुद फटे कपड़े पहने, लेकिन बच्चों की फीस कभी नहीं रुकी।”
“आज हमारी उम्र हो गई है। हम चाहते थे कि किसी एक बेटे के पास रहें ताकि बाकी दो अपने परिवार पर ध्यान दें।”
“लेकिन...”
इतना कहते-कहते उनकी आवाज़ भर्रा गई।
“तीनों बेटे हमें छोड़ने को तैयार ही नहीं हैं।”
विनय ने कहा—
“जब मैं छोटा था, मुझे पोलियो हो गया था। डॉक्टर ने उम्मीद छोड़ दी थी। बाबूजी मुझे रोज़ पाँच किलोमीटर गोद में उठाकर अस्पताल ले जाते थे। अगर उन्होंने हार मान ली होती... तो मैं आज चल भी नहीं पाता।”
दीपक ने कहा—
“जब इंजीनियरिंग की फीस भरने के पैसे नहीं थे, माँ ने अपने शादी के कंगन बेच दिए थे। लेकिन मुझसे कहा था कि कंगन चोरी हो गए हैं... ताकि मुझे अपराधबोध न हो।”
मोहित ने कहा—
“जब मेरा एक्सीडेंट हुआ था, डॉक्टर ने कहा था कि खून तुरंत चाहिए। बाबूजी का ब्लड प्रेशर बहुत कम था... फिर भी उन्होंने अपना खून दिया।”
मोहित फूट-फूटकर रो पड़ा।
“आज वही बाबूजी बूढ़े हो गए हैं... तो मैं उन्हें किसी और के भरोसे कैसे छोड़ दूँ?”
अब अदालत में बैठे लोग भी आँसू पोंछ रहे थे।
जज ने सरला देवी से पूछा—
“माँ... आप किस बेटे के साथ जाना चाहती हैं?”
सरला देवी मुस्कुराईं।
“यही तो मुश्किल है साहब...”
“तीनों हमारे दिल के टुकड़े हैं।”
कुछ देर अदालत में खामोशी रही।
फिर जज ने कहा—
“आज फैसला कानून नहीं... संस्कार करेंगे।”
उन्होंने तीनों बेटों से पूछा—
“अगर मैं माता-पिता को वृद्धाश्रम भेज दूँ...?”
तीनों बेटे एक साथ चीख पड़े—
“नहीं... कभी नहीं!”
जज की आँखें भीग गईं।
उन्होंने कहा—
“यह अदालत आदेश नहीं देगी कि माता-पिता किस बेटे के साथ रहें।”
“लेकिन यह दर्ज करेगी कि इस शहर में एक ऐसा परिवार है जहाँ बेटे संपत्ति के लिए नहीं... अपने माँ-बाप की सेवा के अधिकार के लिए लड़ रहे हैं।”
फिर उन्होंने मुस्कुराकर कहा—
“रामस्वरूप जी और सरला देवी जहाँ चाहें रहें... लेकिन हर रविवार तीनों बेटे, तीनों बहुएँ और सारे पोते-पोतियाँ एक ही छत के नीचे उनके साथ भोजन करेंगे।”
अदालत के बाहर मीडिया ने तीनों भाइयों से पूछा—
“आप लोग यह मामला आपस में भी सुलझा सकते थे।”
विनय ने जवाब दिया—
“हाँ... लेकिन हम चाहते थे कि दुनिया भी देखे...”
दीपक ने बात पूरी की—
“कि माँ-बाप बोझ नहीं होते...”
मोहित ने आँसू पोंछते हुए कहा—
“और जिस घर में माता-पिता के लिए झगड़ा हो... उस घर से बड़ा कोई तीर्थ नहीं होता।”
माता-पिता की सबसे बड़ी विरासत उनकी ज़मीन नहीं... उनका साथ होता है।
और जिस दिन बच्चे उस साथ के लिए लड़ने लगें...
समझ लेना कि उस परिवार ने इंसानियत की सबसे बड़ी परीक्षा पास कर ली।
❤️ काश हर घर ऐसा हो।
बच्चे को भगवान का रूप माना गया है
तो नन्हें मुने भगवान की जुबानी सुनो क्या सच क्या है ????
नरेंद्र मोदी ओर अमित शाह, आदित्य नाथ योगी की रैली
होती है तो स्कूलों कॉलेजों सरकारी कर्मचारियों को बसे भर भर कर लाया जाता है
प्रयागराज के केपी ग्राउंड में को राहुल गांधी को छात्रों की गूंज सुनने के लिए हजारों बची दूर दूर से आ गए
ये होता है जलवा किराए पर नहीं लाई जाती भीड़
जनता हमेशा खुद आती है
फिर पढ़े लिखे राहुल गांधी के लिए स्टूडेंट्स के यूथ खड़ा हो गया है
वही मोदी ओर बीजेपी की रैली में बाबा ओर अनपढ़ जाहिल अंधभक्त आते है
यही फर्क होता है पढ़े लिखे नेता ओर अनपढ़ नेता में
आप अपनी राय जरूर रख सकते है?????