@BHEEM_BAUDH Bhai mere aise 14 centres hai NEET ke jo desh ke bahar hai.. ye topic chhod do tumhara favourite topic pe hi likha kar...bsp ke khilaaf..nam me baudh hai buddhu jada lagte ho..
बहनजी व मान्यवर कांशीराम जी के कारण "ज्योतिबा फुले जी" को बड़े स्तर पर याद किया जा रहा है।
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आज ज्योतिबाफुले जी का जन्मदिन है. इसपर याद आया की लॉकडाउन में अपने पड़ोसी सैनी परिवार से मेने जब पूछा की ज्योतिबाफुले को जानते हो, पुरे परिवार में केवल मुखिया जो की 80 साल के थे, वो जानते है, बाकी उसके चार लडके व उनके बच्चे तक नही जानते. जबकि सैनी उत्तर भारत की वो ही माली जाति है, जो की महाराष्ट्र में ज्योतिबाफुले की माली जाति है.
1.दिन में काफी लोगो के कमेन्ट देखे, जिसमे कह रहे थे की बहनजी ने फुले को याद नही किया और अखिलेश यादव कर रहे है. जबकि;
"जो ऐसा कह रहे है, वो, उनके पिता-दादा, तक नही जानते थे की फुले दम्पति कौन है, जब बहनजी ने ��नकी विशाल मुर्तिया पुरे उत्तर प्रदेश में खड़ी करी, तब जाकर उनके बाप-दादाओ तक को पता लगा की फुले दम्पति का कौन थे, और उनका क्या योगदान था. इसके अलावा बहनजी ने बसपा पार्टी की तरफ से सावित्री बाई फुले स्कोलरशिप बालिकाओं के लिए शुरू तक करी. सैकड़ो योजनाये चलाई.
जबकि फुले दम्पति के नाम से जो भी योजनाये बहनजी ने चलाई, उन्हें अखिलेश ने बंद कर दी. फुले दम्पतियों की मूर्तियों को फिजूलखर्ज सपा बताती रह�� है"
2.अब इसलिए में इन्हें जोशीले, नौशिखिया, अपरिपक्व समाज कहता हूँ क्युकी जिसने जमीनी स्तर पर फुले दम्पति को घर घर तक पहुचाया, उससे सवाल और जिन्होंने बहनजी द्वारा फुले दम्पति को घर घर तक पहुचाने को रोका, उनका गुणगान. इसलिए यह समाज अभी तक पिछड़ा है, क्युकी यह दिखावटी कार्य पर जाते है, न की जड से वार करे हुए कार्य पर.
3.सहारनपुर के गागलहेडी का मुख्य चौक कभी देखे, जन्हा से देहरादून, हरिद्वार, शेष उत्हराखंड, नई दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, जम्मू कश्मीर से आने जाने वाले वाहन गुजरते है. यह काफी महत्वपूर्ण चौक है, भीम आर्मी के चन्द्रशेखर का घर इन्हा से 8 किलोमीटर दूर है.
अब इस मुख्य चौराहे पर "ज्योतिबाफुले" की भव्य कांस्य की मूर्ति स्थापित है. बाकी किसी और की आसपास स्थापित नही की गयी, लेकिन बहनजी ने ज्योतिबाफुले को इन्हा इतने महत्वपूर्ण स्थान पर इसलिए स्थापित किया, जिससे समाज जान सके की भारत के महान महापुरुष के रूप में "ज्योतिबाफुले व सावित्री बाई फुले" हुए है.
4.मान्यवर कांशीराम जी और बहन कुमारी मायावती जी ने जिन महापुरुष को सम्मान दिया, उनके नाम के स्थल बनाये, उनकी मुर्तिया इसलिए स्थापित करी जिससे जन मानस उनसे रूबरू हो सके, उनके बारे में जान सके, वो अधिकतर ओबीसी समुदाय से है. लेकिन यह सभी "महिला सम्मान, अधिकार" �� शोषित वर्ग की शिक्षा व अधिकारों के लिए संघर्ष करे, इसलिए इन महापुरुषो को मान्यवर साहब ने महाराष्ट्र से बाहर निकालकर पुरे भारत में और विशेष तौर से उत्तर भारत के घर घर में पंहुचा दिया. बहनजी ने इनके हर चौक में मुर्तिया खड़ी करके लोगो तक पहुचने का स्थाई रास्ता बनाया.
5.बिना बहनजी और मान्यवर साहब के इमेजिन करे, की कितने सैनी समाज के व्यक्ति जो संख्या में अभी भी ज्यादा नही है, यह जानते है की फुले द��्पति उनके समाज से है, या कोई फुले दम्पति हुए थे. वास्तव में सैनी से अलग उत्तर भारत या महाराष्ट्र से बाहर अधिकतर फुले दम्पति को नही जानते थे.
6.वास्तव में सीधी सी बात है की जो स्कुलो में पढ़ाया जाता है, चर्चा में होता है, उसका मेटेरियल बनाने में बहुजन समाज के व्यक्ति नही है, क्युकी सरकार ही बहुजन समाज की नही रही है, इसलिए आपका इतिहास, भी दबा दिया गया. लेकिन एकमात्र उत्तर प्रदेश में वास्तविक बहुजन समाज की सरकार बहनजी के नेतृत्व में बनी, उन्होंने अल्प समय में ही बहुजन महापुरुषो के संदेशो व उनकी पहचान का प्रसार कर दिया.
7.इन्हा मेने वास्तविक बहुजन समाज की पार्टी बसपा को क्यों कहा है. इसका कारण यह है की सपा और आरजेडी भी बहुजन समाज से आने वाली पार्टी है, लेकिन इन्हा सपा ने ओबीसी से आने वाले महापुरुषो को, उनकी पहचान को, उनके संदेशो को खत्म करने का कार्य अपने कार्यकाल में मनुवादी विचारधारा के लोगो के इशारे पर किया.
8.मान्यवर व बहन कुमारी मायावती जी को राजनीती से अलग करके आप वर्तमान की स्तिथि पर सोचे, आपको दिखेगा क�� जो "महापुरुष" आप पर थोपे गये, आप उन्हें ही मानकर चलते, लेकिन जो वास्तविक महापुरुष है, उनके बारे में आपको सोचने के लिए मेटेरियल या फिर जानकारी तक नही दिया. आपको यह ही नही पता लगता की ज्योतिबा फुले पहले व्यक्ति थे जिन्होंने मनुवादी व्यवस्था पर "गुलामगिरी किताब" लिखकर प्रहार किया.
वास्तव में ज्योतिबाफुले व महिलाओ के लिए शिक्षा का द्वार खोलने वाली सावित्री बाई फुले के नाम पर "शिक्षिक दिवस" मन��या जाना चाहिए, क्युकी वास्तविक तौर पर वो इसकी हकदार है.
विकास कुमार जाटव
"Arrest Ruchi Tiwari urgently." 🚨
This casteist lady is mocking, instigating
and trying her best to create violence against the Dalit community in India.
The Delhi police should arrest her under the NSA and SC-ST Act without any delay.
She is truly a big threat to society. 👹
माधुरी जाधव को यह ऐतराज है कि मिनिस्टर गणतंत्र दिवस पर बाबा साहब का नाम नही ले रहा है। सभी का ले रहे है। लेकिन बाबा साहब का नाम नही ले रहे थे।
माधुरी जाधव की सही बात है। जो नौशिखिया इसपर हाय तौबा मचाये है यह उनके लिए, उदाहरण के लिए अनुज शुक्ला को दिक्कत हो रही है तो यह बिल्कुल ऐसा है कि;
"अनुज शुक्ला के जन्मदिन पर उनके माँ-पिता के योगदान की जगह पड़ोस वाले रहमान चच्चा का गुणगान करना"
बाबा साहब ड्राफ्टिंग कमेंटी के चेयरमैन थे। ड्राफ्टिंग कमेटी ही निर्माता कही जाती है। उंसके 7 सदस्यों में से 2 विदेश, 2 इस्तीफे, दो कभी मीटिंग में नही आये। इसके बाद भी अकेले हर सैंक्शन पर अपने मत देकर, मेरिट डिमेरिट विस्तार से लिखकर, सभा मे बहस करवाकर व फिर वोटिंग करवाकर शामिल किया और फिर अंतिम रूप से इतना विशाल सँविधान भारत को दि��ा। जिसके लिए उन्हें "Father of the Constitution" कहा जाता है।
अब गणतंत्र पर "Father of the Constitution" को याद न करना ऐसे ही है जैसे अनुज शुक्ला के जन्मदिन पर पिता की जगह पड़ोस वाले रहमान चच्चा को याद करना।
माधुरी जाधव सम्मान की पात्र है।
उन्हें जय भीम। जय भारत।
Baba Sahab Dr B R Ambedker को नमन।
विकास कुमार जाटव
#RepublicDay
#RepublicDay2026
#RepublicDayIndia
National Flag
दिल्ली सरकार डॉ अंबेडकर स्कूल ऑफ़ एक्सीलेंस का नाम सीएम श्री स्कूल रख रही है। यह सीधे तौर पर बाबा साहब डॉ भीमराव अ���बेडकर का अपमान है।
आप और कांग्रेस ��ोनों इस मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे हैं।
बसपा दिल्ली प्रदेश को भी उठाना चाहिए या मुद्दा। @ramjigautambsp संज्ञान लीजिए।
चोरी के साथ 'चमारी' क्यों?❌🚨
भूमिहार प्रशांत पांडे 'चोरी-चमारी' शब्द का प्रयोग इसलिए कर रहा है क्योंकि सवर्ण परिवारों में दलितों के लिए यही भाषा यूज होती है। ऐसी गालियां देने का sanction उन्हें परिवार एवं समाज से ही मिलता है।
अन्यथा उसने खुद की जाति को गाली क्यों नहीं दिया?
यह एक अत्यंत प्रेरणादायी और आकर्षक वीडियो है, जिसे एक युवा कार्यकर्ता ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके बनाया है।
यह वीडियो बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी को समर्पित एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि है।
#9_अक्टूबर_लखनऊ_��लो
#जयभीम #जयभारत #लखनऊ #UttarPradesh
#विशाल_राज्यव्यापी_कार्यक्रम
सभी बसपाई साथियों से अनुरोध ���ै कि फटाफट इस ट्वीट को रीट्वीट कीजिए भाई आकाश आनंद जी के लिए इन दोनों हैशटैग को ट्रेंड कराने सहयोग कीजिए।
#बिहार_में_आकाश_आनंद
#बिहार_में_बसपा
अशोक चिन्ह धार्मिक चिन्ह नही है बल्कि महान अशोक से जुड़ा हुआ है। यह बात महबूबा मुफ़्ती जी की लड़कीं इल्तिजा मुफ़्ती को कोई जाकर समझाए की जिस श्रीनगर में बैठकर यह बात कह रही है उस श्रीनगर को अशोक ने ही अपने प्रवास के दौरान बसाया था। कल्हण की राजतरंगिणी तब लिखी गयी जब 1148 में मुस्लिम शासन भारत मे स्थापित भी नही हुआ था।
अशोक चिन्ह एक देश की सम्प्रभुता, उसका प्रतीक, उंसके अधिकारक्षेत्र, उंसके सरकारी संस्थाएं को दर्शाता है। यह श्रीनगर में वक्फ बोर्ड पर लगा था। वजफ बोर्ड सरकारी संस्था है। सरकारी संस्था अपने सरकारी होने का प्रमाण अशोक चिन्ह से देती है।
लेकिन श्रीनगर में अफवाह का शिकार धार्मिक अंधता में जड़ी भीड़ ने अशोक चिन्ह को धार्मिक चिन्ह बताकर मिटा दिया।
महबूबा मुफ्ती जी ��ी लड़कीं ��ो विदेश में पढ़ी है और ऑस्ट्रेलिया में जॉब तक कि है राजनीति के चक्कर मे गलत जानकारी दे रही है।
देश से ऊपर कुछ नही है। यह लोकतंत्र व सेक्युरिज्म का मूल तत्व है। उस देश के प्रतीक चिन्ह का अनादर के लिए क्या शब्द होना चाहिए, महबूबा मुफ्ती जी की लड़कीं को स्वयं आंकलन करना चाहिए।
विकास कुमार जाटव
@MehboobaMufti
@IltijaMufti_