जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग फिर जोर पकड़ रही है , आइए जानते हैं आजादी के बाद अब तक जनसंख्या नियंत्रण को लेकर किस तरह से आगे बढ़ी सरकारें :-
दो या तीन बच्चे होते हैं घर में अच्छे... हम दो हमारे दो... छोटा परिवार सुखी परिवार... हिन्दू हो या मुसलमान, एक परिवार एक संतान... ये ऐसे नारे हैं जो भारत में बढ़ती जनसंख्या के मद्देनजर लोगों में जागरूकता लाने के लिए समय-समय पर भारत सरकार एवं समाजसेवी संस्थाओं ने दीवारों पर लिखकर या फिर इश्तहारों और विज्ञापनों के माध्यमों से लोगों तक पहुंचाए थे ।
इसमें कोई संदेह नहीं लोगों में इसका असर भी हुआ, लेकिन सफलता उम्मीद के अनुरूप नहीं मिली। वर्तमान में भारत की आबादी 135 करोड़ के लगभग हो चुकी है। समय-समय पर जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग भी उठती रही है। वर्ष 2014 में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के केंद्र की सत्ता में आने के बाद इस मांग ने और ज्यादा जोर पकड़ा ।
जनसंख्या विनियमन विधेयक, 2019 : आरएसएस विचारक @RakeshSinha01 ने 2019 में जनसंख्या विनियमन विधेयक, 2019 पेश किया गया था। यह प्राइबेट मेंबर बिल था। इस बिल में ज्यादा बच्चे पैदा करने वाले लोगों को दंडित करने और सभी सरकारी लाभों से भी वंचित करने का प्रस्ताव था। उस समय कुछ लोगों ने कहा था कि गरीब आबादी पर बुरा प्रभाव पड़ेगा तो कुछ का कहना है कि ये बिल मुसलमान विरोधी है।
2000 में गठित हुआ था आयोग : भाजपा नीत अटल बिहारी वाजपेयी की एनडीए सरकार की ओर से वर्ष 2000 में गठित वेंकटचलैया आयोग ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून बनाने की सिफारिश की थी। आयोग ने 31 मार्च 2002 को अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी थी ।
आयोग के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एमएन वेंकटचलैया थे, जबकि जस्टिस आरएस सरकारिया, जस्टिस जीवन रेड्डी और जस्टिस के पुन्नैया इसके सदस्य थे। पूर्व अटॉर्नी जनरल के परासरन तथा सोली सोराबजी, लोकसभा के महासचिव सुभाष कश्यप, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा, तत्कालीन सांसद सुमित्रा कुलकर्णी, वरिष्ठ पत्रकार सीआर ईरानी और अमेरिका में भारत के राजदूत रहे वरिष्ठ राजनयिक आबिद हुसैन भी इस आयोग में शामिल थे।
@AshwiniUpadhyay ने दिया था प्रजेंटेशन : वर्ष 2018 में भाजपा नेता सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय ने दिसंबर 2018 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर जनसंख्या नियंत्रण कानून पर संसद में बहस कराए जाने की मांग की थी। उपाध्याय ने पीएमओ में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर 2018 में एक प्रजेंटेशन भी दिया था। उन्होंने अपने प्रजेंटेशन में वेंकटचलैया आयोग का भी उल्लेख किया था। इससे भी एक कदम आगे हिन्दू रक्षा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महामंडलेश्वर प्रबोधानंद गिरि ने मोदी को पत्र लिखकर कहा था कि दो से ज्यादा बच्चे होने पर नागरिकता समाप्त करने की वकालत की थी। पूर्व में भाजपा सांसद हरनाथ सिंह यादव भी राज्यसभा में जनसंख्या विस्फोट का मुद्दा उठा चुके हैं।
आपातकाल के दौरान नसबंदी : 1975 के आपातकाल के दौरान अपने विवास्पद फैसलों के कारण इंदिरा गांधी विपक्ष के निशाने पर रही थीं। लेकिन, उस दौरान जनसंख्या नियंत्रण के लिए पुरुषों की जबरिया नसबंदी की खूब आलोचना हुई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी ने परोक्ष रूप से नसबंदी अभियान की कमान संभाली थी। उस समय शिक्षकों से लेकर बड़े नौकरशाहों को नसबंदी अभियान को सफल बनाने के लिए टारगेट दिया गया था। लक्ष्य पूरा न होने पर वेतन काटने की चेतावनी भी दी गई
इसका असर यह रहा कि इस अभियान के एक साल में ही 62 लाख पुरुषों की जबरन नसबंदी करवा दी गई। उस समय का माहौल ऐसा था कि ग्रामीण इलाकों में सरकारी गाड़ी देखकर ही लोग खेतों और जंगलों में जाकर छिप जाते थे। विभिन्न रिपोर्टों की मानें तो नसबंदी के दौरान हुई लापरवाहियों के कारण 2000 से ज्यादा पुरुषों की मौत भी हो गई थी। प्रसिद्ध लेखक @SalmanRushdie की किताब 'मिडनाइट चिल्ड्रन' में इस अभियान का जिक्र है ।
बरहाल देश के कई हिस्सों में बदलती जनसांख्यिकी को रोकने और सामाजिक ताने बाने को बनाए रखने के लिए हिंदू समाज के हित में जनसंख्या नियंत्रण कानून बेहद आवश्यक है !!
#विश्व_जनसंख्या_दिवस
चौदह वर्ष की बच्ची का वडोडरा में मुन्ना अब्बास, आफताब और शाहबूद अली ने गैंगरेप किया। 14 वर्ष मात्र! अपराध? मुसलमानों के बीच से गरबा के लिए निकलना। @Vadcitypolice ने तीनों को पकड़ा है। @sanghaviharsh जी, इन दरिंदों को फाँसी दो।
@IMSahalQureshi अबे 1000 साल पहले तो तुम मानवता के विरोधी राक्षस पैदा हुए हो , और सारी पृथ्वी सनातन है तुमसे कहीं पहले से सोमनाथ वहां विराजमान है तुम हो कौन बे ? तुम्हारा कोई वजूद नहीं है !!