अगर ऐसे पोस्टर बनाने से मसीहा के कर्म छुप जाए जल्दी छुपाओ वैसे सच्चाई तो सबको पता चल ही चुकी हैं !
पहले दौसा रेलवे स्टेसन्न,खाद बीज, भरती प्रकरण, और अब गहलोत जी के पैरो में गिरना ये भगवान स्वघोषित मीन भगवान से क्या क्या करवाकर छोड़ेगा 😭🤣
कांग्रेस बीजेपी को और बीजेपी कांग्रेस को हमेशा से बचाती रही है।
मुख्यमंत्री भजनलाल जी ने कहा था कि पेपरलीक में बड़े मगरमच्छों को पकड़ेंगे, मगरमच्छ को पकड़ा तो नहीं, उल्टा उन्हीं का बचाव करने लगे है, किरोड़ीलाल जी हमेशा मगरमच्छों के खिलाफ सबूत देते रहे, लेकिन मुख्यमंत्री जी ने कोई कार्यवाही नहीं की, क्योंकि यहां पर पार्टी से परे व्यक्तिगत गठबंधन ज्यादा हावी हो गया है, एक दूसरे के बचाव में विपक्ष के नेता अपना धर्म भूल गए, और सत्ता पक्ष के नेता अपना कर्तव्य भूल गए।
जब भी किसी मुद्दे पर कांग्रेस को बोलना होता है कांग्रेस और उसके नेता चुप्पी साध लेते है, क्योंकि जैसे ही मुंह खोलेंगे, ईडी के छापे शुरू होने लगते है, जैसे तैसे बचाव में चुप्पी साध कर आंतरिक गठबंधन कर लेते है, आंतरिक गठबंधन का जीता जागता उदाहरण खींवसर उपचुनाव ही देख लो, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बीजेपी नेता की पत्नी को ही कांग्रेस उम्मीदवार घोषित कर देते है, क्योंकि उन्हें हनुमान बेनीवाल जी की लोकप्रियता पचती नहीं है, तो सीधा सीधा बीजेपी उम्मीदवार को ही वोट डायवर्ट करवा दिए, नतीजतन कांग्रेस उम्मीदवार 5000 वोट ही ला सकी।
यह आंतरिक गठबंधन इससे आगे भी निरंतर जारी रहा, संतों का इतना बड़ा आंदोलन हुआ पर अपने आप को विपक्ष बताने वाली कांग्रेस के नेता न तो इस मुद्दे पर संतों के पक्ष में बोले और न ही सरकार के खिलाफ। भाई ऐसी भी क्या मजबूरी हो गई आप लोगों की जो आप संतों के समर्थन में भी नहीं बोल पाए?
इससे आगे भी आंतरिक गठबंधन जारी रहा..... मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साले प्रमोद शर्मा के खिलाफ अवैध जमीन कारोबार के आरोप लगे, लेकिन यहां भी कांग्रेस के नेताओं ने मौन धारण कर लिया..... कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अपने काले कारनामों को छिपाने के लिए और गिरफ्तारी से बचने के लिए आखिर कब तक मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी के चरणों में दंडवत प्रणाम करेंगे?
क्या कांग्रेस नेता केवल किरोड़ीलाल मीणा के खिलाफ ही बोलने की ताकत रखते है? भजनलाल शर्मा के खिलाफ बोलने की उनकी हिम्मत नहीं है या कोई बड़ी मजबूरी है? जनता सब समझ रही है कि प्रदेश में मुख्य विपक्ष की भूमिका कौन निभा रहा है और कौन नहीं!
@BhajanlalBjp
वसुंधरा–गहलोत के अंदरूनी तालमेल के बाद अब राजस्थान की राजनीति में एक नया अघोषित गठजोड़ साफ दिखने लगा है भजनलाल शर्मा + गोविंद डोटासरा।
पिछले 4–5 दिनों से कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद डोटासरा की paid IT cell जिस तरह भजनलाल सरकार के बचाव में लगी हुई है, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जो लोग खुद को विपक्ष बताते हैं, वही आज सत्ता के सबसे बड़े ढाल बनकर खड़े हैं।
सवाल यह है कि आखिर भजनलाल सरकार की नाकामियों, घोटालों, कानून व्यवस्था की बदहाली, युवाओं के साथ धोखे, किसानों की उपेक्षा और जनता की पीड़ा पर चुप्पी क्यों ? क्या यह सिर्फ संयोग है… या फिर कोई राजनीतिक सौदा चल रहा है ?
राजस्थान की जनता सब देख रही है उसे समझ आ रहा है कि कौन सच में विपक्ष की भूमिका निभा रहा है और कौन सिर्फ दिखावे की राजनीति कर रहा है।
चर्चा ये भी है कि डोटासरा जी भजनलाल का बचाव इसलिए कर रहे है क्योंकि मुख्यमंत्री किरोड़ी लाल मीणा जी को किनारे लगाना चाहते है और हनुमान बेनीवाल जी की बढ़ती लोकप्रियता और सरकार पर लग रहे आरोपों से परेशान है । चूँकि दोनों का टारगेट एक ही है तो दुश्मन का दुश्मन दोस्त वाली चाल चली जा रही है ।
अगर सत्ता और तथाकथित विपक्ष एक-दूसरे को बचाने में लग जाएँ तो जनता की आवाज़ कौन बनेगा ?
राजस्थान को विपक्ष चाहिए, सत्ता का सहयोगी नहीं, जनता को संघर्ष चाहिए, सेटिंग नहीं।
न्याय का तकाजा तो यही कहता है कि
परफॉरमेंस या नैतिकता के आधार पर मोदी जी के इन नेताओं को अपना पद छोड़ देना चाहिए,
1- हरदीप पूरी
2- निर्मला सीतारामण
3- अश्विनी वैष्णव
4- धर्मेंद्र प्रधान
5- मोहन यादव
6- एस जयशंकर
7- भजनलाल शर्मा
8- सम्राट चौधरी
9- शिवराज सिंह चौहान
परफॉरमेंस और नैतिकता के आधार पर तो सच पूछो मोदी जी को भी पद छोड़ देना चाहिए,
पांचना बांध का मुद्दा जिस मोड़ पर आना था
वहां आ चुका है। राजनीति के खेल गजब होते हैं। किसी विद्वान राजनेता ने कहा है- राजनीति में जो होता है वह दिखता नहीं है और जो दिखता है वह होता नहीं है।
राजनीति का यही जादू है
उन्होंने हलफनामे में दिखाया था- ये जवाब पर्याप्त नहीं है।
सवाल संपत्ति छिपाने का है ही नहीं, बल्कि उस संपत्ति के बढ़ने में सरकारी पद और निर्णयों की भूमिका रही है- इसका है।
जमीन खरीदना अपराध नहीं है।
लेकिन सत्ता में रहते हुए ऐसे क्षेत्रों में जमीन खरीदना, जहाँ सरकारी नीतियाँ और परियोजनाएँ भविष्य में मूल्य बढ़ाने वाली हों, यह भ्रष्टाचार है।
भ्रष्टाचार हमेशा रिश्वत लेकर फाइल पास करने से ही नहीं होता।भ्रष्टाचार तब भी है जब सत्ता, जानकारी और प्रभाव कुछ लोगों को ऐसा लाभ दिला दें |
Indian Express की रिपोर्ट का Main point ये नहीं है कि "जमीन खरीदी गई" - जिन इलाकों में सरकार ने बाद में Infrastructure, सड़कें आदि विकसित कीं, उन्हीं क्षेत्रों में मुख्यमंत्री के परिवार द्वारा बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी गई। ये Conflict of Interest है।
यदि कोई मुख्यमंत्री, मंत्री, IAS, IPS या किसी प्राधिकरण का अध्यक्ष हो और उसके परिवार द्वारा उन्हीं क्षेत्रों में जमीन खरीदी जाए जहाँ बाद में सरकारी फैसलों से जमीनों का मूल्य कई गुना बढ़ने वाला हो, तो क्या ये जनता और देश, दोनों के साथ विश्वासघात नहीं है?
भारत इसलिए पीछे है क्योंकि यहाँ भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, सत्ता और व्यवस्था की मिलीभगत के खिलाफ लड़ने वाले बहुत कम हैं।
हम कब ऐसा भारत बना पाएँगे जहाँ मेहनत, ईमानदारी और योग्यता का मूल्य सत्ता, संपर्क और प्रभाव से अधिक हो?
गलत को गलत कहने की कीमत चाहे जो हो, चुप मत रहिए।
जब सबकी आवाज़ उठेगी तो वह दूर तलक जाएगी और फिर व्यवस्था से लेकर सत्ता तक, सबको कठघरे में खड़ा होना पड़ेगा।
किसानों की खाद समस्या को लेकर नरेश मीणा का अनोखा विरोध।
किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने की मांग को लेकर नरेश मीणा ने प्रशासन के सामने झोली फैलाकर प्रतीकात्मक रूप से “खाद की भीख” मांगी। उन्होंने कहा कि किसान खाद के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी समस्या का समाधान नहीं कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से तत्काल पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने की मांग की।