आदि शंकराचार्य ने लिखा है पैसा, मोह, ताक़त और घमंड सब ��ाया है जब ब्रह्म का बोध हो जाता है तब ये सब एक भ्रम की तरह ग़ायब हो जाते है…ये रस्सी को सांप समझ लेने जैसा है…यहीं से उनके अद्वैतवाद का महत्वपूर्ण वाक्य अहं ब्राह्मास्म निकला…इसका मतलब यही है कि जब पद, पैसा, वैभव के भ्रम से व्यक्ति निकल जाता है तब वो ब्रह्म को पा लेता है…
अब आप फोटो में मौजूद पद्म श्री पाए चिकित्सक डाक्टर तपन लहिरी को देखिए..रिटायरमेंट के बाद अनगिनत लोगों का ईलाज किया वो भी बिना पैसे के…इंग्लैंड के रॉयल कॉलेज आफ सर्जंस से फेलोशिप ली..चाहते तो इंग्लैंड में डाक्टर बनकर करोड़ों कमाते लग्ज़री गाड़ियों से घूमते…पाँच सितारा होटल में नाश्ता करते और अपने आलीशान बंगले की रील बनवाते फिर वो लाखों फ़ॉलोवर्स के बीच भ्रम के देवता बने होते…लेकिन उन्होंने ब्रह्म को पाने की सोची…अपने को न��राकार बनाया…1994 में अमरीका से लौटने के बाद
महज 294 रुपए में BHU में पढ़ाने लगे..बहुत सारी संपत्ति दान दे दी..इनके पास न गाड़ी है न कोई आलीशान बंगला..
रिटायर होने के बाद बिना पैसे के सेवा देने लगे..पैदल अस्पताल जाते सैकड़ों लोगों का ईलाज करते…आप गहराई से ��ोचिए असल दुनिया के खलनायक लेकिन हमारे मोबाइल में स्क्रोल करते रील के हीरो कौन हैं…वहीं असल दुनिया के हीरो लेकिन डाक्टर तपन रील बनाने में ज़ीरो…
#varanasi
विनोद कुमार शुक्ल ने बरसों पहले लिखा था-
संसार में रहते हुए/ मैं कभी घर लौट न सकूं/ बस संसार में रहूं/ जब संसार में न रहूं/ तब घर लौटूं/ और घर मुझसे ख़ाली रहे.
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शैलेंद्र नगर के सी-217 वाला उनका घर अब सचमुच ख़ाली है.
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कैंसर एक ऐसी बीमारी ने जिसने करोड़ो घर तबाह किए हैं ।
सिर्फ मरीज ही नहीं बल्कि मरीज के परिवारों को ।
दवाइयों का खर्च वहन करते करते लोग टूट जाते हैं ।
और कैसे नहीं टूटेंगे अगर 600 रुपये की दवाई पर सरकार ने छूट दे रखी है 12000 रुपये MRP रखने की ।
जी हाँ ।
दवाई है Paclitaxel ।
रिटेलर खरीदते हैं 600 में और MRP है 12000.
एक मरीज को कई बार 20-30 vial की ज़रूरत पड़ती है ।
और ये कोई एक दवाई की बात नहीं ।
कीमोथेरेपी की ज़्यादातर दवाइयों का यही हाल है ।
200% मार्जिन भी समझ में आता है लेकिन 1900% margin??
वो कैंसर जैसी बीमारी में , जिसका इलाज वैसे भी काफ़ी लंबा चलता है??
ग़रीब तो मर ही जाएगा ना?
ये तो ठीक नहीं हैं ना साहब ?
@PMOIndia
@saket71 भाई साहब , 35 मिनट में । अरे नहीं ! हम भी उसी दिन इंडोनेशिया से टर्मिनल तीन में आए लेकिन समान ज़्यादा होने की वजह से कैब ली और उसने हमको एक घंटे में इंदिरापुरम छोड़ दिया । 5:30 P.M. पर घर । इंदिरापुरम से संसद मार्ग तक जाने में लगभग 45 मिनट लग जाते हैं ।