🛑 *"तृतीय श्रेणी शिक्षक राज्य सरकार के कर्मचारी हैं, उनके वेतन से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं!" - विपिन प्रकाश शर्मा* 🛑पे-प्रोटेक्शन..शिक्षकों के हितों पर कुठाराघात हम किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे!.. राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ
🛑 *"तृतीय श्रेणी शिक्षक राज्य सरकार के कर्मचारी हैं, उनके वेतन से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं!" - विपिन प्रकाश शर्मा* 🛑पे-प्रोटेक्शन..शिक्षकों के हितों पर कुठाराघात हम किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे!.. राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ
RGHS सेवाएं वापस शुरू हुई है लेकिन जयपुर सहित बड़े नगरों के अस्पतालों में एक डॉक्टर की मात्र 5 पर्ची RGHS की काट रहे हैं, अब कोई कर्मचारी अपने पसंदीदा डॉक्टर को दिखाने के लिए बस इंतजार करता रहता है और खाली हाथ लौट के आता है🙏
कर्मचारियों के साथ न्याय हो।
@officialRGHS@RajCMO
भीषण गर्मी को देखते हुए जनगणना करने वाले कार्मिकों के स्वास्थ्य के मध्येनजर जनगणना का कार्य आगे स्थगित किया जाए पूरे भारतवर्ष में 40 से अधिक तापमान हो रहा है, ऐसे में कार्मिकों के लिए लिए SOP जारी किया जाएं..... विपिन प्रकाश शर्मा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, टीचर्स फैडरेशन ऑफ इंडिया
देखिए, लगातार जो है, मेडिकल स्टोर के प्राइवेट हॉस्पिटल के भुगतान नहीं हो रहे है, जिसकी वजह से मैं समझता हूं बहुत बड़ी परेशानी लोगों के सामने खड़ी हो चुकी है। लंबे समय से पेमेंट नहीं हो रहा है, लगभग 3000 करोड़ रुपए बाकी हैं, जो सरकार उनका भुगतान नहीं कर रही है।
दूसरी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि RGHS के अंदर जो कर्मचारी हैं और जो पेंशनर्स हैं, उनका पैसा कट रहा है। वह पैसा हर महीने मेडिकल के नाम पर काटा जाता है, लेकिन जब मेडिकल की जरूरत होती है तो सरकार भुगतान नहीं कर रही है। उनको सुविधा ही नहीं मिल पा रही, उनको दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं, उनका इलाज नहीं मिल पा रहा है, तो कहां जाएंगे ये लोग?
काफी समय से यह परेशानी उनके सामने आ रही है और सरकार सुनने को तैयार नहीं है। सरकार अलग-अलग मॉडल की बात कर रही है, तो कब लेकर आएंगे मॉडल? जनता तो परेशान है, लोग तो परेशान हैं। पैसे देने के बाद भी इलाज नहीं हो पा रहा है, यह भयंकर स्थिति है।
मैं समझता हूं सरकार को इस पर निर्णय लेना चाहिए। बहुत लंबा समय बीत चुका है और सरकार ने चुप्पी साध रखी है।
राजस्थान में जनहित योजनाओं की ज़मीनी हकीकत: कागज़ी दावों और जनता के दर्द के बीच का फासला!
जयपुर। राजस्थान में इस समय सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी साख और लोक-कल्याणकारी सरकार के 'नरेटिव' (छवि) को बचाए रखने की है। एक तरफ जहां नेता से लेकर आला अधिकारी तक हर मंच से जनहित की योजनाओं का ढिंढोरा पीट रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर इन योजनाओं का दम टूटता नज़र आ रहा है। दो सबसे बड़े मोर्चे—शिक्षा और स्वास्थ्य—इस वक्त आम जनता के लिए सिरदर्द बन चुके हैं...
1. RTE एडमिशन: स्कूलों की मनमानी, अभिभावक परेशान
शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के तहत निजी स्कूलों में गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25% सीटें आरक्षित हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि कई नामी और स्थानीय निजी स्कूल एडमिशन देने में आनाकानी कर रहे हैं।
अभिभावकों की लाचारी: पोर्टल पर नाम आने के बाद भी अभिभावक दस्तावेजों की स्क्रूटनी और स्कूलों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
बहानेबाज़ी का खेल: कभी 'सीटें फुल होने' तो कभी 'दस्तावेजों में कमी' का बहाना बनाकर बच्चों को वापस लौटाया जा रहा है।
असर: शिक्षा विभाग का ढीला रवैया निजी स्कूलों के हौसले बुलंद कर रहा है, और गरीब बच्चों का भविष्य अधर में लटका है।
2. RGHS (राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम): इलाज के लिए भटकते कर्मचारी और पेंशनर्स
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए संजीवनी मानी जाने वाली RGHS योजना इस समय खुद 'वेंटिलेटर' पर है। प्रदेश के अधिकतर निजी अस्पतालों ने इस योजना के तहत इलाज करने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
अस्पतालों का तर्क: निजी अस्पतालों का कहना है कि सरकार की ओर से करोड़ों रुपये का भुगतान (Reimbursement) अटका हुआ है।
जनता पर मार.....
गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बुजुर्ग और पेंशनर्स अस्पतालों के काउंटरों से बैरंग लौटाए जा रहे हैं। जिन्हें मुफ्त इलाज का हक था, उन्हें मजबूरन जेब से लाखों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं या इलाज टालना पड़ रहा है।
सरकार का नरेटिव कहां से ठीक होगा?
एक पत्रकार के दृष्टिकोण से देखें, तो किसी भी सरकार का 'नरेटिव' विज्ञापनों, होर्डिंग्स या सोशल मीडिया की रील्स से नहीं, बल्कि डिलीवरी सिस्टम (योजनाओं के क्रियान्वयन) से बनता है। सरकार का नरेटिव तब तक ठीक नहीं हो सकता, जब तक वह इन तीन मोर्चों पर कड़े कदम नहीं उठाती....
सख्त प्रशासनिक हंटर: जो स्कूल RTE के तहत एडमिशन देने से इनकार कर रहे हैं, उनकी मान्यता रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई हो। सिर्फ नोटिस देने से काम नहीं चलेगा।
बजट और भुगतान का संकट दूर हो: RGHS के तहत अस्पतालों के बकाए का तुरंत भुगतान किया जाए, ताकि वे मरीजों को मना न कर सकें। जनता को सरकारी और निजी तंत्र के बीच की लड़ाई का शिकार बनाना बंद होना चाहिए।
जवाबदेही तय हो: हर जिले में जिला कलेक्टर और संबंधित विभाग के अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय हो। यदि कोई योजना सुचारू रूप से नहीं चल रही है, तो गाज अधिकारियों पर गिरनी चाहिए...
जनता को इस बात से सरोकार नहीं होता कि बजट में कितनी बड़ी घोषणाएं हुईं, उन्हें सरोकार इस बात से है कि जब उनका बच्चा स्कूल जाए तो उसे दाखिला मिले और जब परिवार में कोई बीमार हो तो उसे अस्पताल में बेड मिले। अगर सरकार को अपनी छवि सुधारनी है, तो उसे 'घोषणा मोड' से बाहर निकलकर 'एक्शन मोड' में आना होगा। वरना कागजी योजनाओं और जमीनी हकीकत का यह अंतर आगामी चुनावों में भारी पड़ सकता है।
RGHS योजना के मूल स्वरूप से छेड़छाड़,
समर्पित अवकाश (Surrendered Leave) के भुगतान पर अघोषित रोक,
पदोन्नति आदेश जारी नहीं होना,
संविदा कर्मचारियों को नियमित करने में देरी,
तथा RMLCL गठन लंबित रखना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
✊ कर्मचारी एकता ज़िंदाबाद
✊ हक हमारा — संघर्ष हमार
#RGHS
राजस्थान में राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के अंतर्गत सूचीबद्ध अस्पतालों को लंबे समय से सरकार द्वारा भुगतान नहीं किए जाने के कारण गंभीर स्थिति बन गई है। कई अस्पतालों ने कैशलेस उपचार सीमित या बंद करना शुरू कर दिया है, जिससे प्रदेश के लाखों सरकारी कार्मिक, पेंशनर्स और उनके परिवारजन इलाज के लिए परेशान हो रहे हैं। बीमार व्यक्ति को उपचार के समय आर्थिक और प्रशासनिक परेशानी झेलनी पड़े, यह किसी भी व्यवस्था के लिए चिंताजनक है। आरजीएचएस जैसी योजना का उद्देश्य राहत देना था, लेकिन अस्पतालों के बकाया भुगतान लंबित रहने से इसका लाभ प्रभावित हो रहा है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp को अस्पतालों के लंबित भुगतान को नियमानुसार शीघ्रता से जारी करवाने हेतु आवश्यक निर्देश देने चाहिए ताकि राज्य सरकार के कर्मचारियों व पेंशनर्स को बिना किसी बाधा के उपचार मिल सकें |
जन - स्वास्थ्य से जुड़े विषय को अनावश्यक रूप से लंबित रखना सरकार की नकारात्मक सोच को दर्शाता है |
@RajCMO
राजस्थान में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह ICU में पहुंच चुकी है, और मुख्यमंत्री जी चौपाल में चारपाई पर बैठकर फोटोशूट में व्यस्त हैं।
राजस्थान में मेडिकल शट-डाउन सिर्फ डॉक्टरों का विरोध नहीं, बल्कि भाजपा सरकार के पूरे हेल्थ सिस्टम के फेल होने का खुला प्रमाण है।
भाजपा सरकार एक तरफ निजी हॉस्पिटलों के बकाया 2200 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं कर रही है, और दूसरी ओर डॉक्टर्स पर झूठे मुक़दमे बना रही है। निजी अस्पतालों में OPD बंद, जांच बंद, इलाज बंद.. और मरीज परेशान, पर सरकार बेखबर। जिस प्रदेश में जनता का इलाज ठप हो जाए, वहां समझ लिजिए संवेदनहीन सरकार की प्रशासनिक नाकामी अपने चरम पर है।
#Jaipur: सरकारी कर्मचारियों को नहीं मिल रहा RGHS योजना का लाभ
सचिवालय सेवा फोरम ने इसको लेकर जताई नाराजगी, सचिवालय यूनियन फोरम ने सीएस वी. श्रीनिवास के नाम दिया ज्ञापन,...
@RajGovOfficial@rituraj9999@svoruganti1466
राजस्थान में #RGHS के तहत निजी अस्पतालों में इलाज बीते 20 दिनों से पूरी तरह बाधित है, जिससे कैशलेस चिकित्सा व्यवस्था ठप पड़ गई है। इस स्थिति ने प्रदेश के करीब 50 लाख कर्मचारी, पेंशनर्स और उनके परिवारों को गंभीर संकट में डाल दिया है, जो इलाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
जानकारी के अनुसार सरकार पर 2200 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया होने के बावजूद अब तक कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।
यह पूरा मामला सरकार की कार्यशैली, वित्तीय प्रबंधन और स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति गंभीर लापरवाही को उजागर करता है। जिस योजना को राहत का माध्यम होना चाहिए था, वह आज अव्यवस्था और असमंजस का प्रतीक बनती जा रही है। जनता को राहत देने के बजाय यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता और नाकामी का बड़ा उदाहरण बन गई है।
@GovindDotasra
राजस्थान में 20 दिन से निजी अस्पतालों में RGHS के तहत इलाज बंद पड़ा है, लेकिन भाजपा सरकार कोई फर्क नहीं पड़ता।
विडंबना देखिए.. 50 लाख कर्मचारी, पेंशनर्स और उनके परिवार इलाज, दवाइयों और जांचों के लिए दर-दर भटक रहे हैं। पिछले महीने से कैशलेस इलाज बंद पड़ा है, लेकिन भाजपा सरकार बेरवाह बनी हुई है।
भाजपाई भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी RGHS योजना अब लापरवाही, अव्यवस्था और संवेदनहीनता का सबसे बड़ा उदाहरण बन चुकी है। सरकार पर 2200 करोड़ रुपए से ज्यादा बकाया है। सबसे शर्मनाक बात ये है कि भाजपा के ढाई साल के कार्यकाल में ये योजना 3 बार बंद हो चुकी है।
आखिर ये कैसा "सुशासन" है, जहां बीमार कर्मचारी और बुजुर्ग पेंशनर्स अस्पतालों के बाहर लाइन में खड़े हों और सरकार सिर्फ विज्ञापन व इवेंट मैनेजमेंट में व्यस्त रहे?
आज मेरे जन्मदिवस पर एक हृदयस्पर्शी क्षण तब आया, जब बाड़मेर के 'हापो की ढाणी' की एक बच्ची लीला कंवर ने अपने पैरों से मेरा शानदार चित्र बनाकर मुझसे फोन पर बात की और शुभकामनाएँ दीं।
वर्ष 2013 में एक बिजली हादसे में दोनों हाथ खराब होने के बावजूद उसने जिस हिम्मत और जिंदादिली के साथ न केवल जीवन को स्वीकार किया, बल्कि अपनी शिक्षा भी पूरी की, वह सचमुच प्रेरणादायक है।
लीला कंवर आत्मविश्वास और संघर्ष की सजीव मिसाल है। मैं उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ और उसे आशीर्वाद देता हूँ कि वह ज़िंदगी में खूब कामयाब हो और आगे बढ़े।