ऐसे दृश्य कितने जरूरी थे। हिंदुस्तान में लोकतंत्र की आत्मा आज गर्व कर रही होगी कि उसके पास एक ऐसा विपक्ष है जो उसे बचाने के लिए देश के संविधान और देश के नागरिकों के लिए ईमानदारी से ताल ठोंक कर खड़ा हो सकता है।
आज देश के छात्रों को गर्व हो रहा होगा कि जब नुकीली लाठियों से उनकी पीठ छिली जा रही है उनके पास राहुल और अखिलेश जैसे दिलेर नेता हैं जो उनके अधिकारों के लिए जिद थाम कर बैठे हैं।
BREAKING : This is historic 🔥
Rahul Gandhi is doing march towards Gandhi smriti with Indian constitution in his hand
He has put everything on line for students
Look at his body language, he is not going to stop before Dharmendra Pradhan resigns
यह ठीक नहीं है बिल्कुल नहीं। लेकिन भाईसाहब आपको भी भगवा कुर्ता पहन मौके पर नहीं जाना था। अब भगवा पहनने का मतलब झूठा, दंभी, अराजक हो गया है। अब यह लड़के कपड़े से पहचान रहे हैं।
सब अच्छा भला चल रहा था, भर्तियां निकल रही थीं नौकरी मिल रही थी, प्राइवेट सेक्टर भी चमक रहा था, शिक्षा व्यवस्था में भी विश्वसनीयता थी,तमाम कमियों के बावजूद कम से कम पत्रकारिता भी होती थी। फिर एक नॉन बायोलॉजिकल अवतार हुआ और देश रणक्षेत्र बन गया। एक एक कर सबका जीवन एक युद्ध बन गया।
Do you know why the BJP is facing all of this today?
First, they held the Pran Pratishtha ceremony for Ram Mandir before the temple was completed, just to gain political mileage in the elections.
Second, they allowed the Chanda Chori at the Ram Mandir to happen and didn’t punish anyone responsible.
This is poetic justice, Prabhu Shri Ram spares no one.
जिन गधो ने कार्टूनिस्टों को इस बात के लिए अदालतों में खींचा कि उन्होंने कार्टून बना कर मोदी या आरएसएस का अपमान किया।
जिन जजों ने कार्टूनिस्टों को ज्ञान देने की कोशिश की कि कार्टून कैसे बनाए जाने चाहिए।
उन पर हंसने का दिन है आज। देखिए मोदी और आरएसएस पर कैसे-कैसे मीम बना रहा है युवा। कुछ तो सीधे गाली दे रहे हैं।
उखाड़ लीजिए जज साब जो उखाड़ सकते हैं इन लोगों का।
ये हालात दरअसल सुप्रीम कोर्ट के पैदा किए हुए हैं जिसने सरकार को अकाउंटेबिलिटी से एकदम बाहर कर दिया। और संविधान को ताक पर रख कर नागरिक को छोड़ सरकार को बार बार बचाया।
स्कूल में एक रफ कॉपी होती थी, जिसपे बस खाली पैन चलाकर देखते थे और फालतू चीजें लिखते थे, होमवर्क में उसका कोई काम नहीं था
नड्डा भाजपा की रफ कॉपी है, पहले प्रकाश जावड़ेकर होते थे।
प्रिय दिल्ली पुलिस कुछ पता चला इनका। वर्ना लोग प्रदर्शनों में इनकी तरह कपड़े में जाने लगेंगे और लाठी लेकर भी। आपको लगेगा कि पुलिस ही पुलिस आई है। जनता तो आई नहीं। सोशल मीडिया में इस तरह के पोस्टर चल रहे हैं।
नागरिकों पर पैलेट गन का इस्तेमाल कई अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन का उल्लंघन है तथा मानवाधिकारों की स्पष्ट उपेक्षा है - पर सुप्रीम कोर्ट ने तो कह दिया उनके पास इस सब के लिए वक़्त ही नहीं है.
Delhi police can say it didn't use Shock-batons. But Shock batons were used by RAF gear, which was working alongside Delhi Police and deployed in and around Jantar Mantar.
@ravishranjansh आज के समय का सबसे बेहतरीन, सुलझा पत्रकार हैं । लेकिन अफ़सोस की बात हैं फ़ील्ड में काम करने वाले पत्रकारों को अपने संस्थान , संपादक के कारण भी बहुत कुछ झेलना पड़ता हैं
भाई 22 साल के पत्रकारिता कैरियर में 4 राज्यों के 6 शहरों में काम किया है..सरकारें आई और गई कभी किसी से 2 रुपए का ना तो फ़ायदा लिया और ना ही कभी सत्ता की चापलूसी की…इसलिए सिर झुकाने का सवाल ही नहीं उठता है…मैं ग्राउंड का रिपोर्टर हूँ जो देखता हूँ उसे निष्पक्षता के साथ रिपोर्ट करता हूँ…